February 5, 2026

सीनियर आईएएस अधिकारी बीवीआरसी पुरुषोत्तम ने स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति की इच्छा जाहिर की

उत्तराखंड के सीनियर आईएएस अधिकारी बीवीआरसी पुरुषोत्तम ने स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति की इच्छा जाहिर की है. उनका यह निर्णय बेहद चौंकाने वाला है. लेकिन ऐसा पहली बार नहीं हुआ है जब उत्तराखंड में इस तरह ऑल इंडिया सर्विस के अधिकारियों का विभिन्न कारणों से मोह भंग हुआ है.

उत्तराखंड में ब्यूरोक्रेसी की ट्रांसफर पोस्टिंग के दौरान अक्सर कई अधिकारियों को साइड पोस्टिंग पर ही संतोष करना पड़ता है. उधर ऐसे भी अधिकारी हैं जो अधिकतर महत्वपूर्ण जिम्मेदारी वाले पदों और विभागों को ही थामे रहते हैं. खैर ये निर्णय तो चतुर्थ तल में सीएम अपने करीबियों के सुझाव से लेते हैं. लेकिन इस बार मामला पोस्टिंग से जुड़ा नहीं, बल्कि एक ऐसे अफसर की स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति को लेकर है, जो अपने काम के लिए जाना जाता है और मेहनती अफसरों में शुमार है.

बताया स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति चाहने का कारण: शासन में पशुपालन, मत्स्य जैसे विभाग को बतौर सचिव देख रहे 2004 बैच के आईएएस बीवीआरसी पुरुषोत्तम ने स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति के लिए आवेदन किया है. वैसे तो इस आईएएस अधिकारी ने इसके पीछे का कारण पारिवारिक बताया है लेकिन चर्चाएं हैं कि आईएएस अफसर के पास निजी क्षेत्र में इससे बेहतर विकल्प अपने मूल राज्य में मौजूद हैं

वह पारिवारिक कारणों के चलते फिलहाल छुट्टी पर हैं और पारिवारिक वजहों के चलते ही उन्होंने स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति के लिए आवेदन किया है. हालांकि, उनकी अभी 12 साल के अधिक की नौकरी की अवधि है. उनका 2037 में रिटायरमेंट होना है.

खास बात यह है कि आईएएस अधिकारी बीवीआरसी पुरुषोत्तम पहले ही अपने मूल स्टेट (आंध्र प्रदेश) में प्रतिनियुक्ति पर जाने के लिए सरकार से दरख्वास्त कर चुके हैं. खबर है कि इसके बाद उत्तराखंड सरकार ने भी उन्हें इसके लिए एनओसी दे दी थी. लेकिन भारत सरकार में सचिव स्तर के अधिकारियों के लिए इंटर स्टेट डेपुटेशन को लेकर सख्त नियम है और इसीलिए वह अपने मूल राज्य में प्रतिनियुक्ति पर नहीं जा पाए.

ये अधिकारी ले चुके हैं वीआरएस:हालांकि उत्तराखंड में यह पहला मौका नहीं है जब आईएएस अधिकारियों ने विभिन्न कारणों से सेवाकाल रहते हुए पहले ही स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति ले ली हो. प्रदेश में आईएएस, आईपीएस और अब आईएफएस में भी कुछ अधिकारी हैं जिन्होंने ऐसा किया है. ताजा नाम पर गौर करें तो आईएएस अधिकारी रहे उमाकांत पंवार ने अपनी सेवानिवृत्ति के करीब 10 साल पहले ही स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति ले ली थी. इसके बाद उनकी पत्नी मनीषा पंवार ने भी स्वास्थ्य कारणों से स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति ली.

इस सूची में आईएएस अधिकारी रहे राकेश कुमार का नाम भी शामिल है जो बाद में उत्तराखंड लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष भी बने. इसके अलावा आईएस अधिकारी भूपेंद्र कौर औलख ने भी समय से पहले ही स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति ली थी. इसी तरह आईपीएस वी विनय कुमार ने भी सेवानिवृत्ति से पहले वीआरएस लिया था. इसके अलावा हाल ही में आईएफएस अधिकारी मनोज चंद्रन ने भी वीआरएस के लिए आवेदन किया है.

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