मोदी सरकार ने ₹5 लाख तक मुफ्त इलाज, सीएचसी व पीएचसी नेटवर्क, जनऔषधि केंद्र और स्वास्थ्य बीमा से जीएसटी हटाकर स्वास्थ्य सेवाओं को सुलभ व मजबूत बनाया: अमित शाह
Ahmedabad 28 December 2025,
केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने आज अहमदाबाद, गुजरात में इंडियन मेडिकल असोसिएशना आईएमए द्वारा आयोजित राष्ट्रीय सम्मेलन आईएमए नेटकॉन 2025 को संबोधित किया। इस अवसर पर गुजरात के मुख्यमंत्री श्री भूपेन्द्र पटेल सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।
केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री शाह ने कहा कि कोई भी संस्था अगर अपने 100 साल पूरे करती है, तो वह एक बहुत बड़े इतिहास को पीछे छोड़ जाती है। किसी भी संस्था के सामने आने वाली चुनौतियों के लिए भी शताब्दी वर्ष बहुत महत्वपूर्ण होता है। उन्होंने कहा कि इस देश के स्वास्थ्य क्षेत्र में आईएमए के माध्यम से जनता की सेवा में जो उपलब्धियाँ प्राप्त हुई हैं, उनका एक वर्ष में महिमामंडन कर उन्हें जन-जन तक पहुँचाना और सेवा-भाव, कर्तव्यनिष्ठा तथा उपलब्धियों को जनमानस में स्थापित करने का यह श्रेष्ठ माध्यम है। साथ ही, इस क्षेत्र में आए बदलावों, रजिस्टर्ड मेडिकल प्रैक्टिशनर से लेकर स्पेशलाइजेसन तक, को आने वाले समय के साथ कदम मिलाने के लिए भी यही सही समय है। उन्होंने कहा कि आईएमए का 100वें अधिवेशन तक पहुंचना उसके त्याग, सेवा और निरंतर योगदान का प्रमाण है।
अमित शाह ने कहा कि स्वास्थ्य का क्षेत्र मूल रूप से सेवा का क्षेत्र है। जब कोई व्यक्ति गंभीर रूप से बीमार होकर डॉक्टर के पास जाता है, तो उसे अपना उपचार करने वाले डॉक्टर में ही ईश्वर नजर आता है। उन्होंने कहा कि 100 साल पहले बनाए गए एथिक्स के डायमेन्शन और दायरे आज अप्रासंगिक हो गए हैं।100 साल पूरे होने पर अब स्वास्थ्य क्षेत्र के नैतिक मूल्यों एथिक्स के डायमेन्शन पर पुनर्विचार करना चाहिए। उन्होंने आईएमए के प्रतिनिधियों से आग्रह किया कि वे इस क्षेत्र के एथिक्स को फिर से परिभाषित करने और वर्तमान आवश्यकताओं के मुताबिक बनाने के लिए एक टीम का गठन करें। श्री शाह ने कहा कि मेडिकल शिक्षा प्राप्त करने मात्र से कोई सफल डॉक्टर नहीं बन सकता, बल्कि इस क्षेत्र के एथिक्स के सभी डायमेन्शन भी मेडिकल शिक्षा का हिस्सा होना चाहिए और यह जिम्मेदारी आईएएस की है। उन्होंने कहा कि एथिक्स को कोई थोप नहीं सकता, न ही किसी कानून से यह संभव है, क्योंकि यह एक नैतिक विषय है। गृह मंत्री ने कहा कि अगर आईएमए एथिक्स के सभी डायमेन्शन को फिर से परिभाषित कर इसे मेडिकल कोर्स का हिस्सा बनाने का सुझाव भारत सरकार को देता है, तो इससे आने वाले दिनों में सेवा को धर्म मानने वाले डॉक्टरों की संख्या बढ़ेगी, जिसकी आज बहुत जरूरत है। उन्होंने कहा कि अगर यह संभव कर दिया गया तो पिछले 100 साल की तपस्या के कारण जनता के मन में जो सम्मान और विश्वास पैदा हुआ है, वह कई सदियों तक कायम रहेगा।
शाह ने कहा कि स्वास्थ्य क्षेत्र से सीधे तौर पर जुड़े ‘आयुष्मान भारत मिशन’ को लागू किया जा रहा है, जिसके तहत पूरे भारत में गरीबों के लिए 5 लाख रुपए तक का इलाज निःशुल्क कर दिया गया है और कुछ राज्यों की अपनी योजनाओं के कारण देश के 70 प्रतिशत हिस्से में 15 लाख रुपए तक का इलाज मुफ़्त हो रहा है। यह प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी की दूरदर्शिता है।
अमित शाह ने कहा कि 2013-14 में केन्द्र का स्वास्थ्य बजट सिर्फ 37 हजार करोड़ रुपए था, आज 1 लाख 28 हजार करोड़ रुपया हो गया है, यानी स्वास्थ्य बजट में 102 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है और योजनाएँ कागज पर नहीं, धरातल पर उतरी हैं। उन्होंने कहा कि ₹1 लाख 81 हजार आयुष मंदिर को ताकत देना, इस देश के गरीब और गांव के नागरिकों के लिए बहुत बड़ी बात है। आयुष्मान भारत, मिशन इंद्रधनुष, काला-अजार में 90% से ज्यादा सुधार, डेंगू में मृत्यु दर घट कर 1% हुई, मातृ मृत्यु दर 25% घटी, संस्थागत प्रसव 20% बढ़ा, शिशु मृत्यु दर आधी हो गई—ये सब इसलिए संभव हुआ क्योंकि हमारी योजनाएँ सिर्फ घोषित नहीं, बल्कि लागू हुई हैं। मलेरिया के मामलों में 97% की कमी यह बताती है कि भारत जल्द मलेरिया मुक्त होने वाला है। श्री शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में केवल इंफ्रास्ट्रक्चर का विस्तार ही नहीं हो रहा है, बल्कि नागरिकों के स्वास्थ्य में अभूतपूर्व बदलाव लाने का काम भी हो रहा है। उन्होंने कहा कि आप सभी जो मेहनत कर रहे हैं, उसे इस मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर के साथ, इन योजनाओं के साथ और आपके प्रयासों के साथ पूरी तरह संरेखित करना होगा। तभी असली और बड़े परिणाम सामने आएंगे।
