रघु ने जाते-जाते पांच लोगों को दिया जीवनदान, आंखें भी की दान, एम्स में हुई डोनेशन की प्रक्रिया
मृत्यु अंत नहीं, बल्कि किसी के जीवन की नई शुरुआत भी हो सकती है। ऋषिकेश के 42 वर्षीय रघु पासवान ने जाते-जाते इस बात को सच कर दिखाया है। ब्रेन डेड होने के बाद भी रघु ने पांच जिंदगियों में उम्मीद का उजाला भरा है। एम्स ऋषिकेश में संपन्न हुए इस कैडेवरिक ऑर्गन डोनेशन ने मानवता की एक ऐसी मिसाल पेश की है, जो सदियों तक याद रखी जाएगी।
