February 14, 2026

मल्लिकार्जुन खड़गे ने धन्यवाद प्रस्ताव पर अपने भाषण के कुछ हिस्से सदन की कार्यवाही से हटाए पर जताया असंतोष

Delhi, 14 February 2026,

राज्यसभा में शुक्रवार को नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने राष्ट्रपति के अभिभाषण पर लाए गए धन्यवाद प्रस्ताव पर अपने भाषण के कुछ हिस्से सदन की कार्यवाही से हटाए असंतोष जताया है। वहीं खड़गे के भाषण के कुछ हिस्से हटाए जाने को सभापति ने नियमों के अनुरूप लिया गया बताया है।

नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने सभापति सी पी राधाकृष्णन से प्रश्नकाल के दौरान बौलने की अनुमति मांगी। अनुमति मिलने खड़गे ने कहा ” राष्ट्रपति के अभिभाषण पर लाए गए धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा के समय मैंने शुरू में ही कह दिया था कि राष्ट्रपति का अभिभाषण राष्ट्रीय महत्व के मुद्दों को उठाने का एक बेहतरीन अवसर था लेकिन इस अभिभाषण में वह परिलक्षित नहीं होता। इसीलिए मैंने अपनी बात व्यापक रूप से रखी थी।’उन्होंने कहा ”लेकिन राज्यसभा की में वेबसाइटने देखा कि मेरे अभिभाषण का बड़ा हिस्सा, बिना कोई कारण बताए हटा दिया गया। मैंने अपने भाषण में तथ्यों सहित बात रखी है और सरकार की कुछ अनुकहा तब खड़गे ने अपनी बात कहने की अनुमति मांगी। की है जो नेता प्रतिपक्ष होने के नाते मेरी जिम्मेदारी है। मुझे लगता है कि वे नीतियां भारतीय जनमानस पर प्रतिकूल प्रभाव डाल रही हैं। खड़गे ने कहा कि उन्होंने कुछ भी असंसदीय नहीं कहा था इसलिए उनके भाषण के हटाए गए अंशों को सदन की कार्यवाही में शामिल किया जाना चाहिए। सभापति ने कहा कि आसन की ओर से फैसला नियमों के अनुरूप लिया गया है।

उन्होंने आगे कहा, ‘मैंने पांच दशकों से अधिक समय तक सांसद के रूप में सेवा की है, एक विधायक और संसद सदस्य के रूप में समर्पण के साथ काम किया है, हमेशा गरिमा, शिष्टाचार और भाषा के प्रति सम्मान को बनाए रखा है। इसलिए, मैं विनम्रतापूर्वक निवेदन करता हूं कि मेरे भाषण के जिन अंशों को हटाया गया है, उन्हें बहाल किया जाए, क्योंकि उनमें कोई असंसदीय या मानहानिकारक शब्द नहीं हैं, और न ही वे नियम 261 का उल्लंघन करते हैं। मेरे भाषण के इतने बड़े हिस्से को हटाना लोकतंत्र और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के विरुद्ध है।’

‌जिस पर सभापति सीपी राधाकृष्णन ने खड़गे के हटाए गए बयानों को बहाल करने की मांग पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि हटाए गए अंशों को बहाल नहीं किया जा सकता और इस बात पर जोर दिया कि इस मामले पर अध्यक्ष को निर्देश देना सही नहीं और लोकतांत्रिक नहीं है।

सदन में मौजूद वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि राज्यसभा की नियमावली के नियम 261 के तहत भाषण में बोले गए शब्द अगर असंसदीय हों तो उन्हें सदन की कार्यवाही से हटाया जाना चाहिए।

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