जिनेवा में ईरान-अमेरिका परमाणु वार्ता बेनतीजा:स्थिति नहीं सुधरी, तो इस क्षेत्र में बड़ी तबाही की आशंका,
Delhi 18 February 2026,
जिनेवा में ईरान-अमेरिका परमाणु वार्ता बेनतीजा खत्म हो गई है। इस अहम बैठक से उम्मीद थी कि परमाणु मुद्दे पर कोई रास्ता निकलेगा। लेकिन बातचीत खत्म होने के बाद युद्ध अवश्यसंभावी नजर आ रहा है। इसी बीच ईरान ने होरमूर स्टेट में मिसाइल अभ्यास शुरू कर दिया है। वहीं अमेरिका ने पश्चिम एशिया में अपनी सैन्य मौजूदगी और मजबूत कर दी है।
ईरान की सरकारी मीडिया के मुताबिक यह बैठक करीब 3 घंटे चली लेकिन किसी ठोस सहमति पर नहीं पहुंच सकी। बातचीत ऐसे वक्त पर हुई जब पश्चिम एशिया पहले से ही तनाव की आग में झुलस रहा है। अमेरिका ने क्षेत्र में अपनी सैन्य ताकत बढ़ा दी है। जबकि ईरान ने इसे सीधे-सीधे उकसावे की कारवाई बताया है। इसी तनाव के बीच ईरान ने होरमुट स्टेट में बड़े पैमाने पर सैन्य अभ्यास शुरू कर दिया है। रिवोल्यूशनरी गार्ड ने फारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी के बीच मिसाइलें दागी हैं। ईरान ने युद्ध अभ्यास कर अपनी ताकत का एहसास कराया है। ईरान का दावा है कि सभी मिसाइलों ने अपने तय लक्ष्य को सफलतापूर्वक भेदा। सरकारी एजेंसी के मुताबिक रेवोलशनरी गार्ड से जुड़ी मिसाइलें ईरानी जमीन तट और दुप्पल से दागी गई है। सभी ने अपने टारगेट को सटीक तौर पर निशाना बनाया। अभ्यास से क्षेत्रीय सुरक्षा पर तनाव बढ़ने की आशंका भी है। ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई ने सोशल मीडिया पोस्ट में अमेरिकी सेना को धमकी दी है कि दुनिया की सबसे ताकतवर सेना पर भी ऐसा हमला होगा कि वे दोबारा उठ नहीं पाएंगे।
ईरान की अमेरिका की भारी घेराबंदी
ईरान और रूस के इस गठबंधन के जवाब में अमेरिका ने भी अपनी तैयारी पुख्ता कर ली है।घेरा राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने क्षेत्र में दो विशाल एयरक्राफ्ट कैरियर, दर्जनभर युद्धपोत और सैकड़ों लड़ाकू विमान भेजे हैं। इसके अलावा, F-35, F-22 और F-16 जैसे घातक विमानों की तैनाती लगातार बढ़ाई जा रही है। यूएसएस जेराल्ड आर. फोर्ड’ एयरक्राफ्ट कैरियर अपने स्ट्राइक ग्रुप के साथ मध्य पूर्व की ओर बढ़ रहा है। इसके साथ तीन मिसाइल डेस्ट्रॉयर यूएसएस माहन, बैनब्रिज और विंस्टन चर्चिल भी तैनात हैं। हालांकि, इसे पहुंचने में अभी करीब एक हफ्ते का समय लग सकता है, लेकिन यूएसएस अब्राहम लिंकन पहले से ही वहां मौजूद है। यह नौसैनिक घेराबंदी किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए तैयार की गई है।विशेषज्ञों का मानना है कि स्थिति नहीं सुधरी, तो इस क्षेत्र में बड़ी तबाही हो सकती है।
अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने कहा है कि ईरान अभी तक राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की तरफ से तय की गई मुख्य शर्तों को मानने के लिए तैयार नहीं है। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने बताया कि जिनेवा में हुई बातचीत ‘कुछ मायनों में ठीक रही’, क्योंकि दोनों देशों ने आगे भी बैठक जारी रखने पर सहमति जताई है। लेकिन उन्होंने साफ कहा कि ईरान ने अब तक ट्रंप की प्रमुख शर्तों को स्वीकार नहीं किया है। उनके मुताबिक- राष्ट्रपति ट्रंप ने कूटनीतिक समाधान के लिए कुछ स्पष्ट शर्तें रखी हैं। इन शर्तों में सबसे बड़ा मुद्दा ईरान का परमाणु कार्यक्रम है। ईरान अभी इन शर्तों पर खुलकर सहमति देने को तैयार नहीं दिख रहा।
अमेरिका चाहता है कि ईरान अपने यूरेनियम संवर्धन को कड़े और दीर्घकालिक प्रतिबंधों के तहत सीमित करे ईरान के बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम को अमेरिका क्षेत्रीय स्थिरता के लिए खतरा मानता है, जबकि ईरान इसे अपनी रक्षा नीति का हिस्सा बताता है।अमेरिका चाहता है कि ईरान पश्चिम एशिया में सक्रिय सशस्त्र संगठनों को वित्तीय और सैन्य सहायता बंद करे।
