Uttarakhand Forest Department ने बाघों की मौत के बाद तराई जंगलों में हाई अलर्ट किया जारी
Uttarakhand Forest Department ने हरिद्वार वन प्रभाग और Rajaji Tiger Reserve की श्यामपुर रेंज में हाल ही में हुई दो बाघों की संदिग्ध मौत के बाद पूरे प्रदेश में हाई अलर्ट जारी कर दिया है। वन्यजीवों की सुरक्षा को लेकर वन विभाग सतर्क हो गया है और संवेदनशील वन क्षेत्रों में निगरानी बढ़ा दी गई है।
इसी क्रम में उत्तराखंड के सबसे बड़े और संवेदनशील वन क्षेत्रों में शामिल Terai East Forest Division के प्रभागीय वनाधिकारी (डीएफओ) Himanshu Bagri ने आपात बैठक बुलाकर सभी रेंज अधिकारियों के साथ स्थिति की समीक्षा की। बैठक में पूरे वन क्षेत्र में विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए।
वन विभाग के अनुसार तराई क्षेत्र वन्यजीवों की दृष्टि से बेहद समृद्ध है, जिसके चलते यहां शिकारियों और वन्यजीव तस्करों का खतरा हमेशा बना रहता है। इसे देखते हुए डीएफओ हिमांशु बागरी ने सभी वनकर्मियों को 24 घंटे फील्ड में सक्रिय रहने के निर्देश दिए हैं। जंगलों के संवेदनशील और संदिग्ध रास्तों पर बड़ी संख्या में कैमरा ट्रैप लगाए जा रहे हैं, जबकि वनकर्मियों को जंगल के अंदरूनी हिस्सों में लंबी दूरी की गश्त बढ़ाने के आदेश दिए गए हैं।
वन विभाग ने जंगलों के प्रवेश द्वारों और प्रमुख बैरियरों पर निगरानी और सघन चेकिंग भी शुरू कर दी है। यहां से गुजरने वाले हर वाहन की जांच की जाएगी ताकि किसी भी संदिग्ध गतिविधि पर तत्काल कार्रवाई की जा सके।
वन अधिकारियों ने बताया कि शिकारी अक्सर रात के अंधेरे का फायदा उठाते हैं, इसलिए अब रात की गश्त को विशेष रूप से बढ़ाया गया है। वनकर्मी अब ‘एम-स्ट्राइक’ मोबाइल ऐप के जरिए पेट्रोलिंग करेंगे, जिससे अधिकारियों को उनकी लाइव लोकेशन और गश्त की वास्तविक समय की जानकारी मिलती रहेगी। विभाग ने दिन की तुलना में रात की गश्त को दोगुना करने के निर्देश दिए हैं।
इसके अलावा जंगलों के भीतर और सीमावर्ती क्षेत्रों में रहने वाले ग्रामीणों और खत्तावासियों की गतिविधियों पर भी नजर रखी जाएगी। वन विभाग ने साफ किया है कि जंगल में बिना अनुमति प्रवेश करने वाले बाहरी तत्वों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। विभाग ने कहा कि वन्यजीवों की सुरक्षा में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
प्रभागीय वनाधिकारी (डीएफओ) Himanshu Bagri
