November 7, 2026

कपाट बंद होने के बाद भी होंगे चारधाम के दर्शन, शीतकालीन यात्रा को मिलेगा बढ़ावा

Chardham

चारधाम के कपाट शीतकाल के लिए बंद होने के बाद भी श्रद्धालु भगवान के दर्शन और पूजा-अर्चना कर सकेंगे। बदरी-केदार मंदिर समिति (बीकेटीसी) के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने स्पष्ट किया कि चारधाम के कपाट बंद होने का मतलब तीर्थयात्रा का समाप्त होना नहीं है। परंपरा के अनुसार भगवान की चल-विग्रह उत्सव डोलियां शीतकालीन गद्दीस्थलों पर विराजमान होती हैं, जहां श्रद्धालु पूरे शीतकाल में दर्शन और पूजा-अर्चना कर सकते हैं।

उन्होंने बताया कि भगवान बदरी विशाल की पूजा जोशीमठ स्थित नृसिंह मंदिर और पांडुकेश्वर में परंपरानुसार होती है, जबकि भगवान केदारनाथ की चल-विग्रह उत्सव डोली ऊखीमठ स्थित ओंकारेश्वर मंदिर में विराजमान रहती है। इन शीतकालीन गद्दीस्थलों पर श्रद्धालुओं को नियमित दर्शन और पूजा का अवसर मिलता है।

हेमंत द्विवेदी ने कहा कि सरकार की पहल से शीतकालीन यात्रा को भी विशेष प्रोत्साहन मिल रहा है। इसका उद्देश्य प्रदेश में पर्यटन गतिविधियों को सालभर जारी रखना और स्थानीय लोगों की आर्थिकी को मजबूती देना है। शीतकालीन यात्रा के विस्तार से स्थानीय व्यापारियों, होटल व्यवसायियों, वाहन संचालकों और पर्यटन से जुड़े लोगों को भी रोजगार के नए अवसर मिल सकेंगे।

उन्होंने बताया कि बदरी-केदार मंदिर समिति और जिला प्रशासन ने शीतकालीन गद्दीस्थलों पर श्रद्धालुओं के स्वागत, दर्शन, पूजा-अर्चना और अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं की तैयारियां तेज कर दी हैं। शीतकाल में भी श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

बीकेटीसी अध्यक्ष ने श्रद्धालुओं से अपील की कि कपाट बंद होने के बाद भी वे शीतकालीन गद्दीस्थलों पर पहुंचकर भगवान के दर्शन कर सकते हैं और उत्तराखंड की धार्मिक एवं सांस्कृतिक परंपराओं से जुड़ सकते हैं।

हेमंत द्विवेदी, अध्यक्ष बीकेटीसी

Share
Copyright2017©Spot Witness Times. Designed by MTC, 9084358715. All rights reserved. | Newsphere by AF themes.