दीपावली पर उल्लुओं की तस्करी का खतरा, वन विभाग ने बढ़ाई निगरानी
दीपावली का त्योहार रोशनी, उमंग और खुशियों का प्रतीक है। इस दिन मां लक्ष्मी की पूजा-अर्चना कर सुख-समृद्धि की कामना की जाती है, लेकिन त्योहार के दौरान कुछ अंधविश्वासी मान्यताओं के चलते प्रकृति के एक महत्वपूर्ण जीव उल्लू की जान पर खतरा मंडराने लगता है। तंत्र-मंत्र और धन प्राप्ति के नाम पर उल्लू की बलि देने और उसकी तस्करी किए जाने की आशंका को देखते हुए वन विभाग भी सतर्क हो गया है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि उल्लू संरक्षित वन्यजीव है और उसका शिकार, अवैध व्यापार या उसे कैद करना कानूनन अपराध है।
दरअसल, दीपावली के आसपास हर साल उल्लुओं के शिकार और अवैध तस्करी की आशंका बढ़ जाती है। अंधविश्वास के चलते कुछ लोग यह मानते हैं कि तंत्र साधना और धन प्राप्ति के लिए उल्लू की बलि देना या उसका इस्तेमाल करना जरूरी है। हालांकि, जानकार ऐसी मान्यताओं को पूरी तरह निराधार बताते हैं। उनका कहना है कि इनका कोई वैज्ञानिक आधार नहीं है और इनके चलते एक बेजुबान वन्यजीव को नुकसान पहुंचाया जाता है।
वहीं, भारतीय धार्मिक और ज्योतिषीय परंपराओं में उल्लू को मां लक्ष्मी का वाहन माना गया है। स्थानीय ज्योतिषाचार्य कमलेश्वर तिवारी और सुनील पेन्युली के अनुसार, लोक मान्यताओं में दीपावली की रात उल्लू के दर्शन को शुभ और सुख-समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। उनका कहना है कि उल्लू को नुकसान पहुंचाना धार्मिक आस्था के भी विपरीत है। इस जीव की रक्षा करना ही प्रकृति और जीवों के प्रति हमारी जिम्मेदारी है।
कमलेश्वर तिवारी, ज्योतिषाचार्य
अंधविश्वास और वन्यजीवों की अवैध तस्करी पर रोक लगाने के लिए वन विभाग ने भी निगरानी बढ़ा दी है। कालसी की प्रभागीय वनाधिकारी संदीपा शर्मा ने बताया कि उल्लू वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 के तहत संरक्षित है। इसका शिकार करना, घर में कैद रखना या किसी भी प्रकार का अवैध व्यापार करना गंभीर अपराध है। ऐसा करने वालों के खिलाफ कानून के तहत सख्त कार्रवाई का प्रावधान है।
उन्होंने बताया कि दीपावली के मद्देनजर जंगलों और संवेदनशील क्षेत्रों में विशेष निगरानी दल तैनात किए गए हैं। ये दल लगातार गश्त कर रहे हैं, ताकि उल्लुओं के शिकार और तस्करी जैसी गतिविधियों पर प्रभावी रोक लगाई जा सके। वन विभाग ने आमजन से भी अपील की है कि यदि कहीं उल्लू के शिकार, अवैध बिक्री या तस्करी की जानकारी मिलती है तो तत्काल विभाग या प्रशासन को सूचित करें।
संदीपा शर्मा, प्रभागीय वनाधिकारी कालसी
प्रकृति में उल्लू की अहम भूमिका है। यह चूहों और अन्य छोटे जीवों की संख्या नियंत्रित कर पारिस्थितिकी संतुलन बनाए रखने में मदद करता है। ऐसे में अंधविश्वास के नाम पर इस जीव को नुकसान पहुंचाना न केवल कानून का उल्लंघन है, बल्कि पर्यावरण के लिए भी नुकसानदायक है। इस दीपावली लोगों से अपील है कि अंधविश्वास के अंधेरे को छोड़कर प्रकृति के इस अनमोल जीव की रक्षा का संकल्प लें।
