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February 8, 2026

विकसित सड़कें, बिजली का बुनियादी ढांचा और लॉजिस्टिक्स नेटवर्क, उद्योग का मुख्य आधार हैं, जो निर्बाध व्यापार और आर्थिक विकास को सुविधाजनक बनाते हैं: प्रधानमंत्री मोदी,

Delhi , 23 May 2025,

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आज नई दिल्ली के भारत मंडपम में “राइजिंग नॉर्थ ईस्ट इन्वेस्टर्स समिट 2025” का उद्घाटन किया। प्रधानमंत्री ने अष्टलक्ष्मी महोत्सव का स्मरण करते हुए कहा कि, आज का कार्यक्रम पूर्वोत्तर में निवेश का उत्सव है। प्रधानमंत्री ने शिखर सम्मेलन में उद्योग जगत प्रमुखों की महत्वपूर्ण उपस्थिति का उल्लेख करते हुए क्षेत्र में अवसरों को लेकर उनके उत्साह पर चर्चा की। प्रधानमंत्री ने सभी मंत्रालयों और राज्य सरकारों को बधाई देते हुए निवेश के अनुकूल माहौल बनाने में उनके प्रयासों की सराहना की। अपनी शुभकामनाएं देते हुए प्रधानमंत्री ने राइजिंग नॉर्थ ईस्ट इन्वेस्टर्स समिट की प्रशंसा करते हुए क्षेत्र के निरंतर विकास और समृद्धि की दिशा में अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।

श्री मोदी ने दुनिया के सबसे विविधतापूर्ण राष्ट्र के रूप में भारत की स्थिति का जिक्र करते हुए कहा कि पूर्वोत्तर हमारे विविधतापूर्ण राष्ट्र का सबसे विविध क्षेत्र है। उन्होंने व्यापार, परंपरा, वस्त्र और पर्यटन में व्याप्त संभावनाओं पर बल देते हुए कहा कि इस क्षेत्र की विविधता इसकी सबसे बड़ी शक्ति है। उन्होंने कहा कि पूर्वोत्तर एक संपन्न जैव-अर्थव्यवस्था, बांस उद्योग, चाय उत्पादन और पेट्रोलियम तथा खेल और कौशल के साथ-साथ इको-टूरिज्म के लिए एक उभरते हुए केंद्र का पर्याय है। प्रधानमंत्री ने कहा कि यह क्षेत्र न केवल जैविक उत्पादों का मार्ग प्रशस्त कर रहा है बल्कि ऊर्जा के एक पावरहाउस के रूप में अपनी उपस्थिति दर्ज करा रहा है। विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने में पूर्वी भारत की महत्वपूर्ण भूमिका पर बल देते हुए प्रधानमंत्री ने पूर्वोत्तर को इसका सबसे महत्वपूर्ण घटक बताया। उन्होंने कहा कि हमारे लिए, पूर्वी क्षेत्र सिर्फ एक दिशा नहीं है, बल्कि एक दृष्टि है और इसे सशक्त बनाना, इसके लिए कार्य करना, इसे मजबूत बनाना और इसमें बदलाव लाना, इस क्षेत्र के लिए नीतिगत रूपरेखा को परिभाषित करता है। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि इस दृष्टिकोण ने पूर्वी भारत, विशेष रूप से पूर्वोत्तर को भारत के विकास पथ के केंद्र में रखा है।

पर्यटन क्षेत्र को आकर्षक बनाने और निवेशकों के बीच विश्वास पैदा करने में मजबूत बुनियादी ढांचे की अहम भूमिका का उल्लेख करते हुए श्री मोदी ने कहा कि अच्छी तरह से विकसित सड़कें, बिजली का बुनियादी ढांचा और लॉजिस्टिक्स नेटवर्क किसी भी उद्योग का आधार बनते हैं, जो निर्बाध व्यापार और आर्थिक विकास को सुविधाजनक बनाते हैं। उन्होंने कहा कि बुनियादी ढांचा विकास की नींव है और सरकार ने पूर्वोत्तर में बुनियादी ढांचे की क्रांति का शुभारंभ किया है। उन्होंने क्षेत्र की पिछली चुनौतियों को स्वीकार करते हुए कहा कि यह अब अवसरों की भूमि के रूप में उभर रहा है। उन्होंने कहा कि अरुणाचल प्रदेश में सेला सुरंग और असम में भूपेन हजारिका पुल जैसी परियोजनाओं का उदाहरण देते हुए कनेक्टिविटी बढ़ाने में हजारों करोड़ रुपये का निवेश किया गया है। श्री मोदी ने पिछले दशक में 11,000 किलोमीटर राजमार्गों के निर्माण, व्यापक नई रेलवे लाइनों, हवाई अड्डों की संख्या में दोगुनी वृद्धि, ब्रह्मपुत्र और बराक नदियों पर जलमार्गों के विकास और सैकड़ों मोबाइल टावरों की स्थापना सहित प्रमुख प्रगति का भी उल्लेख किया। उन्होंने उद्योगों के लिए एक विश्वसनीय ऊर्जा आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए 1,600 किलोमीटर लंबे पूर्वोत्तर गैस ग्रिड की स्थापना का भी उल्लेख किया। श्री मोदी ने कहा कि राजमार्ग, रेलवे, जलमार्ग और डिजिटल कनेक्टिविटी पूर्वोत्तर के बुनियादी ढांचे को मजबूत कर रहे हैं, जिससे उद्योगों के लिए फ़र्स्ट मूवर एडवांटेज को हासिल करने के लिए लाभकारी आधार तैयार हो रहा है। उन्होंने पुष्टि की कि अगले दशक में, इस क्षेत्र की व्यापार क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। प्रधानमंत्री ने बताया कि आसियान के साथ भारत का व्यापार वर्तमान में लगभग 125 बिलियन डॉलर है और आने वाले वर्षों में इसके 200 बिलियन डॉलर से अधिक होने की उम्मीद है, जिससे पूर्वोत्तर एक रणनीतिक व्यापार सेतु और आसियान बाजारों के लिए प्रवेश द्वार बन जाएगा। उन्होंने क्षेत्रीय संपर्क बढ़ाने के लिए बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में तेज़ी लाने के लिए सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई। थाईलैंड, वियतनाम और लाओस के साथ भारत की कनेक्टिविटी मजबूत बनाने से जुड़ी म्यांमार से थाईलैंड तक सीधी पहुंच प्रदान करने वाली महत्वपूर्ण मार्ग परियोजना, भारत-म्यांमार-थाईलैंड त्रिपक्षीय राजमार्ग के महत्व पर बल देते हुए श्री मोदी ने कलादान मल्टीमॉडल ट्रांजिट परियोजना में तेज़ी लाने के लिए सरकार के प्रयासों का उल्लेख किया। यह कोलकाता बंदरगाह को म्यांमार के सित्तवे बंदरगाह से जोड़ेगा और मिज़ोरम के माध्यम से एक महत्वपूर्ण व्यापार मार्ग प्रदान करेगा। उन्होंने कहा कि इस परियोजना से पश्चिम बंगाल और मिजोरम के बीच यात्रा की दूरी काफी कम हो जाएगी तथा व्यापार और औद्योगिक विकास को बढ़ावा मिलेगा।

प्रधानमंत्री ने कहा हमारी सरकार की, उग्रवाद के प्रति शून्य-सहिष्णुता की नीति है। उन्होंने कहा कि पूर्वोत्तर एक समय नाकाबंदी और संघर्ष से जूझ रहा था, जिसने यहां के युवाओं के अवसरों को गंभीर रूप से प्रभावित किया। उन्होंने शांति समझौतों के लिए सरकार के निरंतर प्रयासों का उल्लेख करते हुए कहा कि पिछले 10-11 वर्षों में 10,000 से अधिक युवाओं ने शांति को अपनाने के लिए हथियार छोड़ दिए हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि इस बदलाव ने क्षेत्र के भीतर नए रोजगार और उद्यमशीलता के अवसरों को खोल दिया है। श्री मोदी ने मुद्रा योजना के प्रभाव की भी जानकारी दी। जिसने पूर्वोत्तर के लाखों युवाओं को हजारों करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता प्रदान की है। उन्होंने शिक्षा संस्थानों के उदय का भी उल्लेख किया, जो युवाओं को भविष्य के लिए कौशल विकसित करने में सहायता प्रदान कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि पूर्वोत्तर के युवा केवल इंटरनेट उपयोगकर्ता नहीं हैं, बल्कि उभरते डिजिटल इनोवेटर भी हैं। उन्होंने 13,000 किलोमीटर से अधिक ऑप्टिकल फाइबर विस्तार, 4 जी और 5 जी कवरेज और प्रौद्योगिकी क्षेत्र में बढ़ते अवसरों जैसी प्रगति पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि युवा उद्यमी अब क्षेत्र के भीतर प्रमुख स्टार्टअप शुरू कर रहे हैं, जो भारत के डिजिटल गेटवे के रूप में पूर्वोत्तर की भूमिका को मजबूत कर रहे हैं।

विकास को गति देने और बेहतर भविष्य सुनिश्चित करने में कौशल विकास की महत्वपूर्ण भूमिका पर बल देते हुए, प्रधानमंत्री ने कहा कि पूर्वोत्तर इस उन्नति के लिए अनुकूल वातावरण प्रदान करता है, जिसमें केंद्र सरकार शिक्षा और कौशल निर्माण पहलों में पर्याप्त निवेश कर रही है। प्रधानमंत्री ने कहा कि पिछले एक दशक में पूर्वोत्तर के शिक्षा क्षेत्र में 21,000 करोड़ रुपये का निवेश किया गया है। उन्होंने 800 से अधिक नए स्कूलों, क्षेत्र के पहले एम्स, नौ नए मेडिकल कॉलेजों और दो नए आईआईआईटी की स्थापना सहित प्रमुख विकासों का उल्लेख किया। इसके अतिरिक्त, उन्होंने मिजोरम में भारतीय जनसंचार संस्थान परिसर और पूरे क्षेत्र में लगभग 200 नए कौशल विकास संस्थानों के निर्माण का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि खेलो इंडिया कार्यक्रम के तहत महत्वपूर्ण निवेश के साथ पूर्वोत्तर में भारत का पहला खेल विश्वविद्यालय विकसित किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि पूरे क्षेत्र में खेल प्रतिभाओं को बढ़ावा देने के लिए आठ खेलो इंडिया उत्कृष्टता केंद्र और 250 से अधिक खेलो इंडिया केंद्र स्थापित किए गए हैं। प्रधानमंत्री ने आश्वासन दिया कि पूर्वोत्तर क्षेत्र अब विभिन्न क्षेत्रों में शीर्ष स्तर की प्रतिभा प्रदान करता है, जिससे उद्योगों और निवेशकों को क्षेत्र की अपार संभावनाओं का लाभ उठाने के लिए प्रोत्साहन मिलेगा।

श्री मोदी ने भारत के सेमीकंडक्टर इको-सिस्टम को मजबूत करने में असम की बढ़ती भूमिका की भी चर्चा की। उन्होंने घोषणा की कि पूर्वोत्तर स्थित सेमीकंडक्टर प्लांट से पहली मेड इन इंडिया चिप जल्द ही पेश की जाएगी, जो इस क्षेत्र के लिए एक प्रमुख उपलब्धि है। उन्होंने पुष्टि की कि यह विकास अत्याधुनिक तकनीक के अवसरों को खोल रहा है और भारत के उच्च तकनीक औद्योगिक विकास में पूर्वोत्तर की स्थिति को मजबूत कर रहा है।

इस अवसर पर अन्य गणमान्य व्यक्तियों के अलावा पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्री ज्योतिरादित्य एम. सिंधिया, मणिपुर के राज्यपाल अजय कुमार भल्ला, असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा, अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू, मेघालय के मुख्यमंत्री कॉनराड के संगमा, मिजोरम के मुख्यमंत्री लालदुहोमा, नागालैंड के मुख्यमंत्री नेफ्यू रियो, सिक्किम के मुख्यमंत्री प्रेम सिंह तमांग, त्रिपुरा मुख्यमंत्री श्री माणिक साहा, पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास राज्य मंत्री डॉ. सुकांत मजूमदार भी उपस्थित थे।

 

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