पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा ने वर्तमान राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की कार्यशैली और राजनीतिक माहौल पर कड़ी टिप्पणी करते हुए इसे “क्लाउन शो” करार दिया,
Delhi, 16 February 2026,
अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा ने वर्तमान राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन की कार्यशैली और राजनीतिक माहौल पर कड़ी टिप्पणी करते हुए इसे “क्लाउन शो” यानी “जोकरों का शो” करार दिया है। ओबामा ने यह टिप्पणी एक पॉडकास्ट पर बातचीत के दौरान की है। उन्होंने न केवल ट्रंप प्रशासन की भाषा और राजनीतिक शैली पर सवाल उठाए, बल्कि लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा को लेकर भी गंभीर चिंता जताई।
ओबामा ने उस विवादित वीडियो का भी उल्लेख किया, जिसमें उन्हें और पूर्व प्रथम महिला मिशेल ओबामा को आपत्तिजनक तरीके से चित्रित किया गया था। ट्रंप प्रशासन की ओर से इसे एक कर्मचारी की गलती बताया गया था और औपचारिक माफी नहीं मांगी गई। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए ओबामा ने कहा, “यह समझना जरूरी है कि अधिकांश अमेरिकी इस तरह के व्यवहार को बेहद परेशान करने वाला मानते हैं।” उन्होंने कहा , सार्वजनिक जीवन में शालीनता और जिम्मेदारी की अपेक्षा की जाती है, विशेषकर जब मामला सर्वोच्च पद से जुड़ा हो। पूर्व राष्ट्रपति के अनुसार, लोकतंत्र में असहमति स्वाभाविक है, लेकिन संवाद का स्तर गिरना और व्यक्तिगत हमले बढ़ना चिंताजनक प्रवृत्ति है।
“रणनीतिक विचलन”
संवाद के स्तर में गिरावट और आव्रजन अभियानों के दौरान मारे गए नागरिकों को ट्रंप प्रशासन द्वारा”घरेलू आतंकवादी” कहे जाने पर ओबामा ने इसे एक रणनीतिक विचलन बताया। उनका कहना था कि इस प्रकार की बयानबाजी अक्सर मुख्य मुद्दों से जनता का ध्यान हटाने के लिए इस्तेमाल की जाती है। ओबामा ने जोर देकर कहा कि अधिकांश अमेरिकी आज भी शालीनता, सहिष्णुता और दयालुता में विश्वास रखते हैं। उन्होंने कहा कि देश की मूल भावना अभी भी सकारात्मक है, भले ही राजनीतिक मंच पर तीखी बयानबाजी हावी दिखे।
“डेमोक्रेट्स के लिए चेतावनी”
ओबामा ने डेमोक्रेटिक पार्टी को भी सावधान किया। उन्होंने कहा कि विपक्ष का मुकाबला करने के लिए “जलाओ और नष्ट करो” जैसी रणनीति अपनाना सही रास्ता नहीं होगा। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा, “मैं नहीं चाहता कि हम सच्चाई की परवाह न करें जैसा कि दूसरा पक्ष कर रहा है। अगर हम उसी तरह से लड़ते हैं, तो हम वह खो देंगे जिसके लिए हम लड़ रहे हैं।” ओबामा का तर्क था कि लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा केवल विरोध के माध्यम से नहीं, बल्कि नैतिक मानकों को बनाए रखते हुए की जानी चाहिए।
पूर्व राष्ट्रपति ने अपने कार्यकाल का जिक्र करते हुए कहा कि, उनके पास भी राजनीतिक रूप से प्रतिकूल राज्यों के खिलाफ सैन्य या वित्तीय शक्ति के इस्तेमाल के अवसर थे, लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया। उन्होंने कहा कि ऐसी कार्रवाई लोकतंत्र की भावना और संवैधानिक मर्यादाओं के खिलाफ होती। ओबामा ने स्पष्ट किया कि सत्ता में होने का अर्थ यह नहीं है कि उसका मनमाना उपयोग किया जाए। लोकतंत्र में शक्ति का प्रयोग जिम्मेदारी और संतुलन के साथ होना चाहिए।
