भारत-अमेरिका अंतरिम व्यापार समझौते का संयुक्त किसान मोर्चा ने किया विरोध: 12 फरवरी को देशभर में प्रदर्शन का किया आह्वान,
Delhi 08 February 2026,
अमेरिका के साथ भारत की अंतरिम व्यापार समझौता से नाराज़ देश के सबसे बड़े किसान मंच संयुक्त किसान मोर्चा ने इस समझौते को किसानों के लिए “खतरनाक जाल” बताया है। इस समझौते के विरोध में संयुक्त किसान मोर्चा ने 12 फरवरी को देशभर में प्रदर्शन का आह्वान किया है।
संयुक्त किसान मोर्चा का कहना है कि भारत-अमेरिका अंतरिम व्यापार समझौता कृषि क्षेत्र की बहुराष्ट्रीय कंपनियों के सामने भारत की “पूर्ण आत्मसमर्पण नीति” है। किसान नेताओं ने कहा, इस समझौते के तहत भारत में बहुराष्ट्रीय कंपनियों के कृषि क्षेत्र में आनेदू से में भारतीय किसानों को भारी नुक्सान होगा। ड्राइड डिस्टिलर्स ग्रेन्स, रेड सोरघम (पशु आहार), ट्री नट्स, ताजे और प्रोसेस्ड फल, सोयाबीन ऑयल, वाइनक्ष और स्पिरिट्न आदि उत्पादों के आयात से भारतीय यबाजार पर अमेरिकी कंपनियों का एकाधिकार हो जाएगा। किसान नेताओं का तर्क है कि भारत पहले ही यूके, न्यूजीलैंड और यूरोपीय यूनियन के साथ हुए व्यापार समझौता में डेयरी उत्पादों को ज्ञशामिल कर चुका है। ऐसे में यह कहना कि डेयरी सुरक्षित है, किसानों के साथ धोखा है। सरकार जानबूझकर अधूरी जानकारी देकर किसानों और आम जनता को गुमराह कर रही है। किसान नेताओं टैरिफ के आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा, अमेरिका में भारतीय उत्पादों पर टैरिफ 2023-24 में जहां लगभग शून्य था, वह अब बढ़कर 18 प्रतिशत तक पहुंच गया है। वहीं भारत ने अमेरिकी कृषि उत्पादों पर लगने वाला 30 से 150 प्रतिशत तक का टैरिफ घटाकर शून्य कर दिया है।
जम्मू-कश्मीर और हिमाचल प्रदेश के सेब किसानों को डर है कि सस्ते अमेरिकी सेब और ड्राई फ्रूट्स से उनकी पहले से संकटग्रस्त खेती पूरी तरह तबाह हो जाएगी। एप्पल फार्मर्स फेडरेशन का कहना है कि कश्मीर जैसे राज्यों में सेब और ड्राई फ्रूट्स ही आय का मुख्य साधन हैं। यह डील वहां की अर्थव्यवस्था को झटका देगी। वहीं महाराष्ट्र और गुजरात के कपास किसान भी चिंतित हैं। भारतीय कपास की पैदावार पहले ही कम है और अगर अमेरिका से ड्यूटी-फ्री कपास आया, तो किसानों को लागत भी नहीं निकलेगी।
संयुक्त किसान मोर्चा ने 12 फरवरी को देशभर में प्रदर्शन का आह्वान किया है। किसानों से कहा गया है कि वे मजदूर संगठनों की आम हड़ताल का समर्थन करें और सड़कों पर उतरकर सरकार को जवाब दें। किसान नेताओं का कहना है कि यह आंदोलन केवल किसानों का नहीं, बल्कि आम जनता की रोजी-रोटी बचाने की लड़ाई है।
