February 5, 2026

इजराइल और हमास के बीच मानवीय संघर्ष विराम का प्रस्ताव संयुक्त राष्ट्र महासभा में पारित।

पिछले 22 दिनों से इजराइल और फिलिस्तीन हमास युद्ध में दोनों पक्षों के हजारों निर्दोष नागरिकों महिलाओं और बच्चों के मारे जाने पर संयुक्त राष्ट्र संघ ने मानवीय आधार पर अन्य देशों से युद्ध विराम कराने के प्रयास शुरू कर दिए हैं। संयुक्त राष्ट्र महासभा के विशेष सत्र में इजराइल और हमास के बीच तत्काल मानवीय संघर्ष विराम का आह्वान किया गया। साथ ही गाजा पट्टी तक सहायता पहुंचाने और नागरिकों की सुरक्षा की मांग भी की गई। यह प्रस्ताव संयुक्त राष्ट्र महासभा के सदन में पेश किया गया, जोकि बहुमत से पारित हुआ। यह जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स में दी गई।संयुक्त राष्ट्र के इस प्रस्ताव के पक्ष में 120 और विरोध में मात्र 14 वोट पड़े।भारत, कनाडा, जर्मनी और ब्रिटेन समेत 45 देश इस मामले में तठस्थ रहे।

प्रस्ताव को सदन में यह कह कर पारित किया गया कि अरब देशों के प्रस्ताव बाध्यकारी नहीं है, लेकिन यह राजनीतिक महत्व रखता है, क्योंकि इजराइल ने 75 साल पुराने इतिहास में अपने नागरिकों पर सबसे बर्बर हमास के हमले के जवाब में युद्ध की घोषणा कर गाजा में हवाई आक्रमण और जमीनी कार्यवाही की है। प्रस्ताव का उद्देश्य इस युद्ध तथा लोगों के खिलाफ नरसंहार को रोकना एवं गाजा पट्टी में मानवीय सहायता पहुंचाना है। फिलिस्तीनी संयुक्त राष्ट्रदूत रियाद मंसूर ने इस प्रस्ताव के पारित होने पर खुशी जताई है। लेकिन, इजराइल के संयुक्त राष्ट्र राजदूत गिलाद एर्दान ने संयुक्त राष्ट्र के इस प्रस्ताव पर असहमति जताते हुए कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि,इजराइल को अपनी रक्षा करने का अधिकार है। वह हमास के हमलों को कब तक सहता रहेगा। ऐसा नहीं हो सकता। उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र अब कोई वैधता या प्रासंगिकता नहीं रखता।

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