February 2, 2026

7 साल बाद मिला न्याय, महिला को 15 दिन में फ्लैट और ₹15.12 लाख ब्याज

देहरादून रेरा ने ‘श्री आरना एसोसिएट्स’ बिल्डर को सात साल से फ्लैट का कब्जा न देने पर कड़ी फटकार लगाई है। नैनीताल की अनविता त्रिपाठी को 52.50 लाख रुपये देने के बावजूद फ्लैट नहीं मिला था। रेरा ने बिल्डर को 15 दिन में कब्जा देने, 15.12 लाख रुपये ब्याज और 5 लाख रुपये जुर्माना भरने का आदेश दिया है।

देहरादून। साढ़े 52 लाख रुपये देने के बावजूद नैनीताल निवासी अनविता त्रिपाठी को थ्री बीएचके फ्लैट पर कब्जा न देना देहरादून के ‘श्री आरना एसोसिएट्स’ परियोजना से जुड़े प्रमोटरों को भारी पड़ गया। सात साल से अनविता अपने फ्लैट पर कब्जा लेने के लिए भटक रही हैं, लेकिन बिल्डर उन्हें टहलाते रहे।

अब उत्तराखंड रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथारिटी (रेरा) ने घर खरीदार के हित में बड़ा और सख्त फैसला सुनाते हुए ‘श्री आरना एसोसिएट्स’ परियोजना से जुड़े प्रमोटरों को न केवल कड़ी फटकार लगाई बल्कि आदेश दिया है कि शिकायतकर्ता अनविता त्रिपाठी को अगले 15 दिन के भीतर फ्लैट संख्या-601 का विधिवत कब्जा दिया जाए।

रेरा के सदस्य नरेश सी. मठपाल की ओर से आरी आदेश में स्पष्ट कहा है कि फ्लैट बुकिंग के सात वर्ष बाद भी कब्जा न देना कानून का घोर उल्लंघन है। इसे किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

रेरा के समक्ष वर्ष 2017 में बालावाला स्थित ‘अर्नव अपार्टमेंट’ परियोजना से जुड़ा मामला सामने आया था, जहां शिकायतकर्ता को लगभग 52.50 लाख रुपये का भुगतान करने के बावजूद न तो फ्लैट मिला और न ही रजिस्ट्री कराई गई।

रेरा ने अपने फैसले में माना कि प्रमोटर परियोजना को समय पर पूरा करने में पूरी तरह विफल रहे। न तो पूर्णता प्रमाण पत्र प्राप्त किया गया, न ही वैधानिक कब्जा सौंपा गया। प्राधिकरण द्वारा यह भी स्पष्ट किया गया कि प्रमोटर फर्म के सभी साझेदार संयुक्त व व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार हैं।

किसी एक साझेदार पर जिम्मेदारी डालकर अन्य भागीदार अपनी जवाबदेही से बच नहीं सकते। रेरा ने सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के सिद्धांतों का हवाला देते हुए यह कहा कि फ्लैट खरीदार को यह जानने की आवश्यकता नहीं कि प्रमोटरों के बीच आंतरिक समझौते क्या हैं।

पांच लाख का जुर्माना, वसूली भू-राजस्व की तरह

रेरा ने आदेश की अवहेलना करने और कार्यवाही में जानबूझकर गैरहाजिर रहने पर प्रमोटर विनोद रावत और उनके सहयोगियों संजय पांडे, विवेक उपाध्याय और देवाशीष रावत पर पांच लाख रुपये का अर्थदंड भी लगाया है।

चेतावनी दी गई है कि समय पर जुर्माना जमा न होने पर राशि की वसूली भू-राजस्व की तरह की जाएगी। रेरा के इस आदेश को राज्य में रियल एस्टेट क्षेत्र के लिए एक कड़ा संदेश माना जा रहा है।

रेरा की कड़ी टिप्पणी

रेरा ने अपने आदेश में तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि रियल एस्टेट अधिनियम का उद्देश्य केवल परियोजना का पंजीकरण नहीं, बल्कि उपभोक्ताओं को समयबद्ध और सुरक्षित आवास उपलब्ध कराना है।

वर्षों तक पैसा लेकर फ्लैट न देना न केवल अनुचित व्यापार व्यवहार है, बल्कि यह कानून की मंशा पर सीधा हमला है। रेरा के सदस्य नरेश सी. मठपाल ने साफ शब्दों में कहा कि नकद लेन-देन, टालमटोल और खरीदार को भ्रमित करने की प्रवृत्ति को किसी भी स्थिति में वैध नहीं माना जा सकता।

समझौता राशि से 7.50 लाख रुपये अधिक लिए

शिकायतकर्ता अवनिता त्रिपाठी द्वारा वर्ष 2017 में विभिन्न तिथियों पर कुल 52.50 लाख रुपये की धनराशि का भुगतान किया गया। इसमें 45 लाख रुपये प्रमोटर आरना एसोसिएट्स तथा 7.50 लाख रुपये साझेदार विनोद रावत को दिए गए थे। अनविता ने बताया कि फ्लैट की समझौता राशि 44.54 लाख रुपये थे, लेकिन प्रमोटर्स ने 7.96 लाख रुपये अतिरिक्त लिए। इस तरह कुल 52.50 लाख रुपये का भुगतान किया गया।

पति की मृत्यु से मानसिक पीड़ा में रही महिला

मामले की सुनवाई के दौरान यह भी सामने आया कि इसी अवधि में शिकायतकर्ता के पति का 15 नवंबर 2020 को आकस्मिक निधन हो गया, जिससे वह मानसिक रूप से अत्यंत व्यथित रहीं और लंबे समय तक मामले की प्रभावी पैरवी नहीं कर सकीं।

इस बीच प्रमोटर द्वारा कथित रूप से एक कब्जा पत्र देने की औपचारिकता निभाई गई, लेकिन वास्तविक रूप से न तो फ्लैट तैयार था और न रजिस्ट्री कराई गई। शिकायतकर्ता ने मानसिक पीड़ा के लिए न्यूनतम पांच लाख रुपये क्षतिपूर्ति तथा 7.96 लाख रुपये अतिरिक्त भुगतान की वापसी की मांग की थी। जिस पर रेरा ने प्रमोटर्स को 15,12,825 रुपये विलंब ब्याज सहित भुगतान का आदेश दिया।

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