मन की बात’ के माध्यम से प्रधानमंत्री मोदी का देशवासियों को संदेश, हमें एकजुट होकर उर्जा संकट की चुनौती से बाहर निकलना है
Delhi 29 March 2026,
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज देशवासियों को संबोधित अपने ‘मन की बात’ कार्यक्रम के 132वीं कड़ी में प्रेरणादायक संस्मरणों को साझा किया। इस बार उन्होंने वैश्विक अर्थव्यवस्था, मिडिल ईस्ट, खाड़ी देशों में जारी युद्ध से पैदा उर्जा संकट, स्किल डेवलपमेंट और ईज ऑफ डूइंग बिजनेस , टी-20 वर्ल्ड कप की ऐतिहासिक जीत , न्यूयॉर्क सिटी हाफ मैराथन पर विचार साझा किए।
प्रधानमंत्री ने ‘मन की बात’ में कोरोना काल का जिक्र करते हुए कहा, भीषण कोरोना संकट से निकलने के बाद दुनिया नए सिरे से प्रगति की राह पर आगे बढ़ेगी। लेकिन, दुनिया के अलग-अलग क्षेत्रों में लगातार युद्ध और संघर्ष की परिस्थितियाँ बनती चली गईं। वर्तमान में हमारे पड़ोस में एक माह से भीषण युद्ध चल रहा है। हमारे लाखों परिवारों के सगे-संबंधी इन देशों में रहते हैं, खासतौर पर खाड़ी देशों में काम करते हैं। जिस क्षेत्र में अभी युद्ध चल रहा है, वह क्षेत्र हमारी ऊर्जा आवश्यकताओं का बड़ा केंद्र है। इसकी वजह से दुनिया भर में पेट्रोल और डीजल को लेकर संकट की स्थिति बनती जा रही है।
निश्चित तौर पर यह चुनौतीपूर्ण समय है। मैं आज ‘मन की बात’ के माध्यम से सभी देशवासियों से फिर यह आग्रह करूंगा कि हमें एकजुट होकर इस चुनौती से बाहर निकलना है। जो लोग इस विषय पर भी राजनीति कर रहे हैं, उन्हें राजनीति नहीं करनी चाहिए। यह देश के 140 करोड़ देशवासियों के हित से जुड़ा विषय है, इसमें स्वार्थ भरी राजनीति का कोई स्थान नहीं है। ऐसे में जो भी लोग अफवाह फैला रहे हैं, वे देश का बहुत बड़ा नुकसान कर रहे हैं। मैं सभी देशवासियों से अपील भी करूंगा कि वो जागरूक रहें, अफवाहों के बहकावे में ना आएं। सरकार की तरफ से जो आपको निरंतर जानकारी दी जा रही है, उस पर भरोसा करें और उसी पर विश्वास करके कोई कदम उठाएं। मुझे हर बार की तरह इस बार भी विश्वास है कि जैसे हमने देश के 140 करोड़ देशवासियों के सामर्थ्य से पुराने संकटों को हराया था, इस बार भी हम सब मिलकर के इस कठिन हालत से बहुत ही अच्छी तरह बाहर निकल जाएंगे।
आज ‘मन की बात’ में ‘ज्ञान भारतम सर्वे’ जिसका संबंध हमारी महान संस्कृति और समृद्ध विरासत से है। इसका उद्देश्य देशभर में मौजूद पांडुलिपियों (मेनू स्क्रिप्ट) के बारे में जानकारी जमा करना है। इस सर्वे से जुड़ने का एक माध्यम, ज्ञान भारतम ऐप है। आपके पास अगर कोई पांडुलिपि है, या उसके बारे में जानकारी है, तो उसकी फोटो ‘ज्ञान भारतम ऐप’ पर जरूर साझा करें। उदाहरण के तौर पर अरुणाचल प्रदेश के नामसाई के चाओ नंतिसिन्ध लोकांग जी ने ताई लिपि में पांडुलिपियाँ साझा की हैं। अमृतसर के भाई अमित सिंह राणा ने गुरुमुखी लिपि में पांडुलिपि शेयर की हैं। यह हमारी महान सिख परंपरा और पंजाबी भाषा से जुड़ी लिपि है। कुछ संस्थाओं ने ताड़ के पत्तों पर लिखी पांडुलिपियाँ दी हैं। राजस्थान के अभय जैन ग्रंथालय ने कॉपर प्लेट्स पर लिखी बहुत पुरानी पांडुलिपियाँ साझा की हैं। वहीं, लद्दाख की हमेशा मॉनेस्ट्री ने तिब्बती में बहुमूल्य पांडुलिपियों के बारे में जानकारी दी है।
प्रधानमंत्री ने जल संरक्षण के अपने संकल्प को फिर से दोहराते हुए बताया कि, पिछले 11 वर्षों में ‘जल संचय अभियान’ ने लोगों को बहुत जागरूक बनाया है। इस अभियान के तहत देश-भर में करीब 50 लाख आर्टिफिशियल वाटर हार्वेस्टिंग स्ट्रक्चर बनाए गए हैं। मुझे ये देखकर अच्छा लगता है कि अब जल संकट से निपटने के लिए गाँव-गाँव में सामुदायिक स्तर पर प्रयास होने लगे हैं। कहीं पुराने तालाबों की सफाई हो रही है, कहीं बरसात के जल को सहेजने के लिए प्रयास किया जा रहा हैं। अमृत सरोवर अभियान के तहत भी देशभर में करीब 70 हजार अमृत सरोवर बनाए गए हैं। बारिश का मौसम आने से पहले इन सरोवरों की साफ-सफाई भी शुरू हो गई है। आज मैं आपसे कुछ प्रेरक उदाहरण भी साझा करना चाहता हूँ। ये उदाहरण बताते हैं कि जनभागीदारी से जल संरक्षण का काम कितना व्यापक हो जाता है। त्रिपुरा की जंपुई पहाड़ियों में बसा वांगमुन गाँव 3 हजार फीट की ऊंचाई पर बसा है। ये गाँव पानी के गंभीर संकट का सामना कर रहा था। गर्मियों के दिनों में गाँव के लोग पानी के लिए लंबी दूरी तय करते थे। आखिरकार गाँव के लोगों ने बारिश की हर बूंद को सहेजने का निर्णय किया। आज वांगमुन गाँव के लगभग हर घर में रूफटॉप रेनवाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम स्थापित हो गया है। जो गाँव कभी पानी की कमी से जूझ रहा था, वो जल संरक्षण की एक प्रेरक मिसाल बन गया है।
प्रधानमंत्री ने कहा, आज जब दुनिया जलवायु परिवर्तन जैसी चुनौतियों का सामना त रही है, तब ऐसे प्रयास हमें यह बताते हैं कि समाधान हमेशा कहीं दूर नहीं होता। कई बार हमारे अपने पारंपरिक ज्ञान और सामुदायिक प्रयास ही हमें सबसे मजबूत रास्ता दिखाते हैं। आपको बड़ी संख्या में घरों की छत पर सोलर पैनल लगे हुए दिखाई देंगे। कुछ साल पहले तक ये इक्का-दुक्का घरों पर ही दिखता था। लेकिन आज ‘पीएम सूर्य घर मुफ़्त बिजली योजना’ का प्रभाव देश के कोने-कोने में दिखने लगा है। इस योजना की वजह से, गुजरात के सुरेंद्रनगर जिले की पायल मुंजपारा के जीवन में बहुत बड़ा बदलाव आया है। उन्होंने सूर्य पहल के माध्यम से सोलर पावर टैक्नोलॉजी की ट्रेनिंग ली। वो आस-पास के जिलों में सोलर रूफटॉप इंस्टालेशन का काम करती हैं और इससे उन्हें हर महीने हजारों रुपए की आय होती है।
‘पीएम सूर्य घर मुफ़्त बिजली योजना’ का फायदा नार्थ ईस्ट के इलाकों में भी मिल रहा है। त्रिपुरा में रियांग जनजाति के कई गाँव ऐसे थे, जहाँ बिजली की समस्या थी। अब सोलर मिनी ग्रिड के माध्यम से वहाँ के घरों में रोशनी रहती है। वहाँ बच्चे अब शाम के बाद भी पढ़ पा रहे हैं। लोग मोबाइल चार्ज कर पा रहे हैं और गाँव का सामाजिक जीवन भी बदल गया है।इसके अलावा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मन की बात के 132वीं कड़ी में स्किल डेवलपमेंट और ईज ऑफ डूइंग बिजनेस , टी-20 वर्ल्ड कप की ऐतिहासिक जीत , न्यूयॉर्क सिटी हाफ मैराथन पर विचार साझा किए।
‘मन की बात’ के लिए मुझे हर महीने देश के अलग–अलग हिस्सों से ढ़ेरों संदेश मिलते हैं। इन संदेशों से ये भी पता चलता है कि दूर–दराज के क्षेत्रों में बैठे लोग कितने चाव से इस कार्यक्रम को सुनते हैं। जब मैं आपके सुझाव पढ़ता हूँ, तो मुझे लगता है कि ये सिर्फ एक कार्यक्रम नहीं है, ये हम सबका एक साझा संवाद बन गया है। आपके विचार, आपके अनुभव, इस कार्यक्रम को लगातार बेहतर बनाने की प्रेरणा देते हैं। आप अपने आसपास की प्रेरक गाथाएं यूं ही साझा करते रहिए। हो सकता है, आपकी एक छोटी सी कोशिश, किसी और के जीवन में बड़ा बदलाव ले आए, किसी को आगे बढ़ने का नया हौसला दे दे।
