प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी “मन की बात” की 130वीं कड़ी में गणतंत्र दिवस, राष्ट्रीय मतदाता दिवस, पर्यावरण, स्टार्टअप इकोसिस्टम, ड्रग्स, औषधीय पौधों के संरक्षण पर बोले
Delhi 25 January 2026,
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज “मन की बात” की 130वीं कड़ी में अनेक प्रेरक प्रसंगों का स्मरण कराते हुए देशवासियों को संबोधित किया। मन की बात में उन्होंने गणतंत्र दिवस, राष्ट्रीय मतदाता दिवस, पर्यावरण, स्टार्टअप इकोसिस्टम, ड्रग्स, औषधीय पौधों के संरक्षण पर अपने विचार देशवासियों से साझा किए।
प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में कहा, साल 2026 का यह पहला ‘मन की बात’ है। कल 26 जनवरी को हम सभी ‘गणतंत्र दिवस’ का पर्व मनाएंगे। इसी दिन हमारा संविधान लागू हुआ था। 26 जनवरी का ये दिन हमें अपने संविधान निर्माताओं को नमन करने का अवसर देता है। आज 25 जनवरी का दिन भी बहुत अहम है। आज ‘राष्ट्रीय मतदाता दिवस’ है। मतदाता ही लोकतंत्र की आत्मा होता है।आमतौर पर जब कोई 18 साल का हो जाता है, मतदाता बन जाता है तो उसे जीवन का एक सामान्य पड़ाव समझा जाता है। लेकिन, दरअसल ये अवसर किसी भी भारतीय के जीवन का बहुत बड़ा माइलस्टोन होता है। इसलिए बहुत जरूरी है कि हम देश में वोटर बनने का, मतदाता बनने का, उत्सव मनाएं। जैसे हम जन्मदिन पर शुभकामनाएं देते हैं और उसे सेलिब्रेट करते हैं, ठीक वैसे ही, जब भी कोई युवा पहली बार मतदाता बने तो पूरा मोहल्ला, गाँव या फिर शहर एकजुट होकर उसका अभिनंदन करे और मिठाइयाँ बांटी जाएं। इससे लोगों में वोटिंग के प्रति जागरूकता बढ़ेगी।
प्रधानमंत्री ने कहा, भारत में आज दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्ट-अप्स इकोसिस्टम बन चुका है। ये स्टार्टअप लीक से हट के हैं। आज, वे, ऐसे सेक्टर में काम कर रहे हैं, जिनके बारे में 10 साल पहले तक कल्पना भी नहीं की जा सकती थी। ए-आई, स्पेस न्यूक्लियर एनर्जी, सेमी कंडक्टर मोबिलिटी, ग्रीन हाइड्रोजन, बायोटेक्नोलॉजी में कोई न कोई भारतीय स्टार्ट अप उस सेक्टर में काम करते हुए दिख जाएगा।
कुछ लोग समाज की सामूहिक शक्ति से रास्ता निकालने का प्रयास करते हैं। ऐसा ही एक प्रयास उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ में सामने आया है। यहाँ से होकर गुजरने वाली तमसा नदी को लोगों ने नया जीवन दिया है। तमसा केवल एक नदी नहीं, बल्कि हमारी सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत की सजीव धारा है। अयोध्या से निकलकर गंगा में समाहित होने वाली यह नदी कभी इस क्षेत्र के लोगों के जन-जीवन की धुरी हुआ करती थी, लेकिन प्रदूषण की वजह से इसकी अविरल धारा में रुकावट आने लगी थी। गाद, कूड़ा-कचरा और गंदगी ने इस नदी के प्रवाह को रोक दिया था। इसके बाद यहाँ के लोगों ने इसे एक नया जीवन देने का अभियान शुरू किया। नदी की सफाई की गई और उसके किनारों पर छायादार, फलदार पेड़ लगाए गए। स्थानीय लोग कर्तव्य भावना से इस काम में जुटे और सबके प्रयास से नदी का पुनरुद्धार हो गया।
ऐसा ही प्रयास आंध्र-प्रदेश के अनंतपुर में भी देखने को मिला है। यह वह क्षेत्र है जो सूखे की गम्भीर समस्या से जूझता रहा है। यहाँ की मिट्टी, लाल और बलुई है। यही वजह है कि लोगों को पानी की कमी का सामना करना पड़ता है। यहां के कई क्षेत्रों में लंबे समय तक बारिश नहीं होती है। कई बार तो लोग अनंतपुर की तुलना रेगिस्तान में सूखे की स्थिति से भी कर देते हैं। इस समस्या के समाधान के लिये स्थानीय लोगों ने जलाशयों को साफ करने का संकल्प लिया। फिर प्रशासन के सहयोग से यहाँ ‘अनंत नीरू संरक्षणम प्रोजेक्ट’ इसकी शुरुआत हुई। इस प्रयास के तहत 10 से अधिक जलाशयों को जीवन दान मिला है। उन जलाशयों में अब पानी भरने लगा है। इसके साथ ही 7 हजार से अधिक पेड़ भी लगाए गए हैं। यानि अनंतपुर में जल संरक्षण के साथ-साथ ग्रीन कवर भी बढ़ा है। यहाँ बच्चे अब तैराकी का आनंद भी ले सकते हैं।
प्रधानमंत्री ने अनंतनाग के शेखगुन्ड गाँव का जिक्र करते हुए कहा, यहां ड्रग्स, तंबाकू, सिगरेट और शराब से जुड़ी चुनौतियाँ काफी बढ़ गई थी। इन सबको देखकर यहां के मीर जाफ़र जी इतना परेशान हुए कि उन्होंने इस समस्या को दूर करने की ठान ली। उन्होंने गाँव के युवाओं से लेकर बुजुर्गों तक सभी को एकजुट किया। उनकी इस पहल का असर कुछ ऐसा रहा कि वहाँ की दुकानों ने तंबाकू उत्पादों को बेचना ही बंद कर दिया। इस प्रयास से ड्रग्स के खतरों को लेकर भी लोगों में जागरूकता बढ़ी है।
हमारे देश में ऐसी अनेक संस्थाएं भी हैं, जो वर्षों से निस्वार्थ भाव से समाज सेवा में जुटी हैं। जैसे एक संस्था है पश्चिम बंगाल के पूर्व मेदिनीपुर के फरीदपुर में। इसका नाम है ‘विवेकानंद लोक शिक्षा निकेतन’। ये संस्था पिछले चार दशक से बच्चों और बुजुर्गों की देखभाल में जुटी है। गुरुकुल पद्धति की शिक्षा और टीचर्स की ट्रेनिंग के साथ ही यह संस्था समाज कल्याण के कई नेक कार्यों में जुटी है। मेरी कामना है कि निस्वार्थ सेवा का यह भाव देशवासियों के बीच निरंतर और अधिक सशक्त होता रहे।
विलुप्त हो रहे औषधि पौधों के संरक्षण की ओर ध्यान दिलाते हुए प्रधानमंत्री ने मध्यप्रदेश में पन्ना जिले के जगदीश प्रसाद अहिरवार के प्रयास को सराहनीय बताया है। वो जंगल में बीट- गार्ड के रूप में अपनी सेवाएं देते हैं । एक बार गश्त के दौरान उन्होंने महसूस किया कि जंगल में मौजूद कई औषधीय पौधों की जानकारी कहीं भी व्यवस्थित रूप से दर्ज नहीं है । जगदीश जी, ये जानकारी अगली पीढ़ी तक पँहुचाना चाहते थे, इसलिए उन्होंने, औषधीय पौधों की पहचान करना और उनका रिकॉर्ड बनाना शुरू किया । उन्होंने सवा-सौ से ज्यादा औषधीय पौधों की पहचान की । हर पौधे की तस्वीर, नाम, उपयोग और मिलने के स्थान की जानकारी जुटाई । उनकी जुटाई गई जानकारी को वन विभाग ने संकलित किया और किताब के रूप में प्रकाशित भी किया। इस किताब में दी गई जानकारी अब शोधकर्ता, छात्रों और वन अधिकारियों के बहुत काम आ रही है।पर्यावरण संरक्षण की यही भावना आज बड़े स्तर पर भी दिखाई दे रही है। इसी सोच के साथ देशभर में ‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान चलाया जा रहा है। इस अभियान से आज करोड़ों लोग जुड़ चुके हैं। अब तक देश में 200 करोड़ से ज्यादा पेड़ लगाए भी जा चुके हैं। ये बताता है कि पर्यावरण संरक्षण को लेकर अब लोग ज्यादा जागरूक हैं, और किसी-ना-किसी रूप में अपना योगदान देना चाहते हैं।
प्रधानमंत्री श्री मोदी ने कहा, मुझे ये देखकर खुशी है कि मिलेट्स अर्थात श्रीअन्न के प्रति देश के लोगों का लगाव निरंतर बढ़ रहा है। वैसे तो हमने 2023 को मिलेट्स ईयर घोषित किया था। लेकिन आज तीन साल बाद भी इसको लेकर देश और दुनिया में जो पैशन और कमिटमेंट है, वो बहुत उत्साहित करने वाला है।
