आरक्षित वर्ग का उम्मीदवार, सामान्य श्रेणी की कट-ऑफ से अधिक अंक प्राप्त करता है, तो उसे प्रथम शॉर्टलिस्टिंग से ही ओपन कैटेगरी में माना जाएगा: सुप्रीम कोर्ट,
Delhi 05 January 20
सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान हाई कोर्ट के उस फैसले को सही ठहराया है। जिसमें भर्ती प्रक्रिया के दौरान ओपन कैटेगरी में चयन को केवल योग्यता से जोड़ने पर जोर दिया गया था। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि कोई आरक्षित वर्ग का उम्मीदवार बिना किसी छूट लिए सामान्य श्रेणी की कट-ऑफ से अधिक अंक प्राप्त करता है, तो उसे प्रारंभिक शॉर्टलिस्टिंग से ही ओपन कैटेगरी में माना जाना चाहिए।
जस्टिस दीपांकर दत्ता और ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की बेंच ने राजस्थान हाई कोर्ट प्रशासन और उसके रजिस्ट्रार द्वारा दायर अपीलें खारिज कर दीं, और 18 सितंबर, 2023 के डिवीजन बेंच के फैसले की पुष्टि की है।राजस्थान हाई कोर्ट द्वारा जूनियर ज्यूडिशियल असिस्टेंट और क्लर्क ग्रेड-II पदों पर की गई भर्ती से जुड़ा था। चयन प्रक्रिया में लिखित परीक्षा के बाद टाइपिंग टेस्ट रखा गया था और हर श्रेणी से सीमित संख्या में उम्मीदवारों को अगले चरण के लिए बुलाया जाना था। परिणाम आने के बाद यह सामने आया कि कुछ आरक्षित श्रेणियों की कट-ऑफ सामान्य श्रेणी से अधिक थी, जिससे ऐसे उम्मीदवार बाहर हो गए जिन्होंने जनरल कट-ऑफ से बेहतर प्रदर्शन किया था।
सुप्रीम कोर्ट ने इस स्थिति को अनुचित मानते हुए कहा कि ओपन कैटेगरी कोई आरक्षित कोटा नहीं है, बल्कि यह सभी अभ्यर्थियों के लिए केवल मेरिट के आधार पर खुली होती है। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि आवेदन पत्र में आरक्षित श्रेणी का उल्लेख कर देने मात्र से कोई उम्मीदवार ओपन कैटेगरी में प्रतिस्पर्धा करने का अधिकार नहीं खो देता। सुप्रीम ने यह तर्क अस्वीकार कर दिया कि ऐसे उम्मीदवारों को ओपन कैटेगरी में शामिल करने से उन्हें दोहरा लाभ मिलेगा। न्यायालय के अनुसार, जब चयन प्रक्रिया में स्पष्ट असमानता हो, तब एस्टॉपल जैसे सिद्धांत लागू नहीं किए जा सकते।
इंद्रा साहनी और आर.के. सभरवाल जैसे पूर्व निर्णयों का हवाला देते हुए सुप्रीम कोर्ट ने दोहराया कि उच्च मेरिट प्राप्त करने वाले आरक्षित वर्ग के उम्मीदवारों को समान अवसर से वंचित नहीं किया जा सकता। यह फैसला भर्ती प्रक्रियाओं में पारदर्शिता, योग्यता और संवैधानिक समानता को मजबूत करता है।
