Supreme Court bans removal of encroachment from railway land in Haldwani. The next hearing of this case is now on September 11.
दिल्ली , उत्तराखंड के हल्द्वानी में रेलवे की भूमि से अतिक्रमण हटाने के मामले में दायर याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई की। कोर्ट ने कहा कि, जो वहां रह रहे हैं, वो इंसान हैं, और वे दशकों से रह रहे हैं। इन मामलों में अदालतें निर्दयी नहीं हो सकतीं। अदालतों को भी संतुलन बनाए रखने की जरूरत है। कोर्ट ने रेलवे एवं राज्य सरकार से कहा, अगर आप लोगों को बेदखल करना चाहते हैं तो नोटिस जारी करें, जनहित याचिका के सहारे क्यों? इसका इस्तेमाल नहीं किया जा सकता है। वहीं रेलवे की तरफ से कहा गया कि यहां वंदे भारत ट्रेन का प्रोजेक्ट चलाया जा रहा है। इसके लिए प्लेटफॉर्म को विस्तारित करने की जरूरत है।
पिछले साल जनवरी में हल्द्वानी में रेलवे की भूमि पर दशकों से काबिज लोगों की बेदखली अभियान शुरू किया गया था। इन काबिज लोगों ने बेदखली अभियान के विरोध में सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी । जिसपर सुप्रीम कोर्ट ने अतिक्रमण हटाने पर रोक लगा दी थी। इस मामले की अगली सुनवाई अब 11 सितंबर को होगी।
सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में फॉरेस्ट एरिया को छोड़कर किसी दूसरे लैंड में पुनर्वास को लेकर विकल्प को तलाशने की जरूरत है बताई। सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा इस मामले में जल्द करवाई की जाए। 4365 घर हैं, वहां पर 50 हजार लोग रह रहे हैं। सुनवाई के दौरान हमें कुछ वीडियो और फोटो दिए गए। कई परिवार वहां पर कई सालों से रह रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में केंद्र सरकार को एक पॉलिसी डिसीजन लेने के आदेश दिए। उत्तराखण्ड के चीफ सेक्रेटरी और केंद्र सरकार के उच्च अधिकारी पुनर्वास योजना को लेकर आपस में बैठक करें। ये पुनर्वास योजना ऐसी हो जिसमें सब सहमत हो।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि , बेदखली अभियान के प्रभावितों की तुरंत पहचान हो। चार हफ्तों के भीतर इस योजना पर काम हो जाना चाहिए। हम पांचवे हफ्ते 11 सितंबर को सुनवाई करेंगे। सुप्रीम कोर्ट ने हल्द्वानी में रेलवे ट्रैक के किनारे पर रह रहे लोगो को हटाने के मामले में रोक लगाने के फैसले को बरकरार रखा है।
- Supreme Court bans removal of encroachment from railway land in Haldwani. The next hearing of this case is now on September 11.
