अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया समेत सभी आरोपियों के खिलाफ तथाकथित एक्साइज पॉलिसी केस की दिल्ली हाईकोर्ट में हुई सुनवाई,
Delhi 19 March 2026
दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने 27 फरवरी को दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, उप-मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया समेत 23 आरोपियों को तथाकथित एक्साइज पॉलिसी केस में रिहा कर दिया था। कोर्ट के फैसला देने के तुरंत बाद सीबीआई ने दिल्ली हाईकोर्ट में इस फैसले को चुनौती दी। जिसपर आज गुरुवार को दिल्ली हाईकोर्ट में सुनवाई हुई।
हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान आम आदमी पार्टी नेताओं को अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और अन्य को प्रवर्तन निदेशालय ईडी की उस याचिका का जवाब देने के लिए समय दे दिया गया है। जिसमें दिल्ली की स्पेशल कोर्ट द्वारा एक्साइज पॉलिसी भ्रष्टाचार मामले में सभी को बरी करते समय की गई कुछ टिप्पणियों को हटाने की मांग की गई थी। जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने सभी आरोपियों के वकील के अनुरोध के बाद उन्हें समय दे दिया है। ईडी की ओर से एडिशनल सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू के साथ जोहेब हुसैन भी पैरवी की।
आरोपियों की ओर से पेश वकील ने याचिका का जवाब दाखिल करने के लिए कोर्ट से समय मांगा। जिसका ईडी के वकील जोहेब हुसैन ने विरोध किया। और कहा,जवाब मांगने की कोई जरूरत नहीं है और सभी आरोपियों को याचिका की कॉपी दे दी गई है। एएसजी राजू ने कहा कि आरोपी केवल कार्यवाही में देरी करना चाहते हैं और यदि एजेंसी के पक्ष में कोई आदेश पारित किया जाता है, तो उन्हें कोई नुकसान नहीं होगा।
जस्टिस स्वर्णकांता ने प्रश्न उठाया कि,अभियोजन एजेंसी कहती है कि ट्रायल कोर्ट के जज ने अपने अधिकार क्षेत्र का उल्लंघन किया है? मैं भी ऐसी टिप्पणियां करती हूं। यह तय करना होगा कि क्या जज ने अपने अधिकार क्षेत्र का उल्लंघन किया है?
लंच ब्रेक के बाद कोर्ट ने केजरीवाल और अन्य को ईडी की याचिका पर अपना जवाब दाखिल करने के लिए समय दिया। ईडी ने कहा है कि वह सीबीआई की कार्यवाही में किसी भी रूप में पक्षकार नहीं थी और टिप्पणियां दर्ज किए जाने से पहले उसे अपनी बात रखने का कोई अवसर नहीं दिया गया था। एजेंसी के अनुसार, यह स्थिति प्राकृतिक न्याय और न्यायिक मर्यादा के मूल सिद्धांतों का घोर उल्लंघन है। बिना किसी दिशा के और बेबुनियाद टिप्पणियों को बने रहने दिया गया जो प्रवर्तन निदेशालय की पीठ पीछे सिर्फ अंदाजों के आधार पर की गई हैं। जो ईडी द्वारा जुटाए गए किसी भी सबूत या सामग्री पर आधारित नहीं हैं। इससे आम जनता के साथ-साथ इस याचिकाकर्ता को भी गंभीर और कभी न पूरी होने वाली क्षति पहुंचेगी। अंत में कोर्ट ने इस मामले को 2 अप्रैल के लिए लिस्ट करने के आदेश दिए।
