January 14, 2026

ईरान में हालात बिगड़े:मानवाधिकार संगठन के मुताबिक करीब 2,000 लोगों की मौत,

Delhi 14 January 2026,

ज़बरदस्त विरोध प्रदर्शनों के बीच ईरान में हालात लगातार बिगड़ रहे हैं। मानवाधिकार संगठन के मुताबिक, अब तक 2,000 से ज़्यादा लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि कुछ रिपोर्टों में यह आंकड़ा 2,500 से ज़्यादा बताया गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरानी सरकार को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि प्रदर्शनकारियों की हत्या बर्दाश्त नहीं की जाएगी और मदद रास्ते में है। वहीं ईरान ने राष्ट्रपति ट्रंप पर राजनीतिक अस्थिरता फैलाने, हिंसा भड़काने और देश की संप्रभुता को खतरे में डालने का आरोप लगाया है। ईरानी सरकार ने कुछ पाबंदियों में आंशिक रूप से ढील दी, हालांकि, इंटरनेट और एसएमएस सेवाएं अभी भी बंद हैं।

अमेरिका स्थित ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट्स न्यूज़ एजेंसी के अनुसार, ईरान में चल रहे विरोध प्रदर्शनों में मरने वालों की संख्या बढ़कर 2,571 हो गई है। ईरान के शहीद फाउंडेशन के प्रमुख अहमद मौसवी के हवाले से कहा गया है कि सशस्त्र और आतंकवादी समूहों के कारण देश को भारी नुकसान हुआ है। हालांकि, अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों का आरोप है कि ज़्यादातर मौतें सुरक्षा बलों की कार्रवाई के कारण हुई हैं।

इस बीच, 26 वर्षीय प्रदर्शनकारी एरफान सोल्तानी को लेकर गंभीर चिंता जताई जा रही है। रिपोर्टों के मुताबिक, उन्हें तेज़ी से मुकदमा चलाकर मौत की सज़ा सुनाई गई है और उनकी फांसी किसी भी समय हो सकती है। एरफान को तेहरान के उत्तर-पश्चिमी इलाके कराज से गिरफ्तार के अनुसार, इंटरनेट बंदी के दौरान 8 जनवरी से एरफान का परिवार से संपर्क टूट गया था और 11 जनवरी को परिवार को उनकी सज़ा की जानकारी दी गई।

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि प्रदर्शनकारियों को फांसी दी गई तो अमेरिका “बहुत कड़ी कार्रवाई” करेगा। उन्होंने ईरानी जनता से विरोध जारी रखने की अपील की है। डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर एक कड़ा संदेश जारी किया, जिसमें ईरानियों से विरोध प्रदर्शन तेज़ करने का आग्रह किया गया। उन्होंने लिखा, “ईरानी लोगों को विरोध प्रदर्शन जारी रखना चाहिए, अपने संस्थानों पर नियंत्रण करना चाहिए। हत्यारों और तानाशाहों के नाम सुरक्षित रखें। उन्हें इसकी भारी कीमत चुकानी पड़ेगी। जब तक हत्याएं बंद नहीं हो जातीं, मैंने ईरानी अधिकारियों के साथ सभी बैठकें रद्द कर दी हैं। मदद रास्ते में है।”

ईरान का पलटवार

ईरान ने ट्रंप पर राजनीतिक अस्थिरता फैलाने, हिंसा भड़काने और देश की संप्रभुता को खतरे में डालने का आरोप लगाया है। संयुक्त राष्ट्र में ईरान के राजदूत अमीर सईद इरावानी ने सुरक्षा परिषद को पत्र लिखकर कहा कि निर्दोष नागरिकों, खासकर युवाओं की मौत के लिए संयुक्त राज्य अमेरिका और इज़राइल ज़िम्मेदार हैं।

कई यूरोपीय देशों ने ईरान में हिंसा और इंटरनेट बंद होने पर ईरानी राजदूतों को बुलाया। फिनलैंड ने इंटरनेट बंद करने को चुप्पी के ज़रिए दमन का एक रूप बताया। नीदरलैंड्स, फ्रांस और जर्मनी ने हिंसा को अमानवीय और अस्वीकार्य बताया। ब्रिटेन और यूरोपीय संघ ने ईरान के खिलाफ नए प्रतिबंधों की घोषणा की। यूरोपीय संघ प्रमुख उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने कहा कि ईरान में बढ़ती मौतें चौंकाने वाली हैं। संयुक्त राष्ट्र संघ मानवाधिकार प्रमुख वोल्कर तुर्क ने ईरान से शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के खिलाफ हिंसा रोकने और उन्हें आतंकवादी बताना बंद करने की अपील की। उन्होंने कहा कि ईरानी नागरिकों को शांतिपूर्ण विरोध का अधिकार है और उनकी शिकायतों को सुना जाना चाहिए, न कि दबाया जाना चाहिए।

 

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