अरावली पर्वत श्रंखला की नई परिभाषा पर सुप्रीम कोर्ट ने लिया स्वत: संज्ञान, 29 दिसंबर सोमवार को होगी सुनवाई
Delhi, 28 December 2025,
अरावली पर्वत श्रंखला की नई परिभाषा को लेकर उपजे विवाद का सुप्रीम कोर्ट ने स्वत: संज्ञान लिया है। 29 दिसंबर सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अगुवाई वाली तीन जजों की बेंच इस पूरे विवाद की सुनवाई करेगी। अरावली का मुद्दा का हालिया शीतकालीन सत्र के दौरान संसद और सड़क पर जोर-शोर से गूंजा है। कांग्रेस ने कहा कि, सरकार ने अरावली के ‘डेथ वारंट’ पर साइन किए हैं। उन्होंने फॉरेस्ट कंजर्वेशन एक्ट में संशोधनों को वापस लेने की मांग की। सांसद प्रियंका गांधी ने प्रदूषण को एक बड़ा सार्वजनिक मुद्दा बताया। उन्होंने कहा कि पर्यावरण के मुद्दे राजनीतिक नहीं होते. कांग्रेस ने संसद में इस पर बहस की मांग भी उठाई थी। इसके अलावा पर्यावरण से जुड़े संगठनों और अंधाधुंध खनन, पेड़ों कटान से प्रभावित स्थानीय लोगों ने भी प्रदर्शन किया है।
बेंच में सीजेआई के अलावा जस्टिस जे के माहेश्वरी और जस्टिस ए जी मसीह भी रहेंगे। अरावली दुनिया की सबसे पुरानी पर्वत श्रृंखलाओं में से एक है। जो करीब 700 किमी लंबी है। यह दिल्ली-एनसीआर को थार रेगिस्तान की धूल और मरुस्थल से बचाने के लिए सदियों से ढाल के रूप में खड़ी है। हाल ही में सरकार की ‘100 मीटर ऊंचाई’ वाली नई परिभाषा से अत्यधिक खनन होने की संभावना बढ़ गई है। विशेषज्ञों ने आंशका जताई है कि इस नियम से अरावली का 90% हिस्सा खत्म हो सकता है।
