प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की “मन की बात” का 131वां संस्करण:कृत्रिम बुद्धिमत्ता समिट, अंगदान, डिजिटल अरेस्ट, केवाईसी पर की चर्चा,
Delhi, 22 February 2026,
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज “मन की बात” के 131वें संस्करण के माध्यम से देशवासियो को संबोधित किया। प्रधानमंत्री ने “मन की बात” में, दिल्ली के भारत मंडपम में वैश्विक कृत्रिम बुद्धिमत्ता समिट, अंगदान, स्वतंत्र भारत के पहले भारतीय गवर्नर जनरल सी. राजगोपालाचारी, डिजिटल अरेस्ट, केवाईसी, मुस्लिम समुदाय के रमजान, दिल्ली की लक्ष्मी देवी की केदारनाथ की यात्रा, आदि अनेक प्रसंगों पर चर्चा की। उन्होंने ‘मन की बात’ को, देश और देशवासियों की उपलब्धियों को सामने लाने का एक मजबूत प्लेटफॉर्म बताया।
प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में दिल्ली में हुई ग्लोबल एआई इंपैक्ट समिट का जिक्र करते हुए कहा, आने वाले समय में एआई की शक्ति का उपयोग एक टर्निंग प्वाइंट साबित हुआ है। कैसे एआईई से एआई जानवरों का इलाज करने में हमारी मदद कर रही है और कैसे 24×7 एआई असिस्टेंट की मदद से किसान अपनी डेयरी और जानवर का हिसाब रखते हैं। सुश्रुत संहिता के बारे में जानकारी देते हुए प्रधानमंत्री ने बताया कि, टेक्नोलॉजी की मदद से हम पांडुलिपियों की इमेज क्वालिटी सुधारकर उन्हें पढ़ने लायक बना रहे हैं। इस इमेज को मशीन के पढ़ने लायक टेक्स्ट में बदला गया। मशीन रीडेबल टेक्स्ट को एक एआई अवतार ने पढ़ा। और कैसे टेक्नोलॉजी से ये अनमोल भारतीय ज्ञान और विदेशी भाषाओं में ट्रांसलेट किया जा सकता है। भारत के प्राचीन ज्ञान को आधुनिक अवतार के माध्यम से जानने में वर्ल्ड लीडर्स ने बहुत दिलचस्पी दिखाई।
भारतीय मूल के खिलाड़ी अपनी जगह बना रहे हैं। ऐसे कितने ही भारतीय मूल के खिलाड़ी हैं जो अपने देश का गौरव बढ़ा रहे हैं। वहाँ के युवाओं के लिये प्रेरणा बन रहे हैं। भारतीयता की यही तो विशेषता है। भारतीय जहां भी जाते हैं अपनी मातृभूमि की जड़ों से जुड़े रहते हैं। और अपनी कर्मभूमि यानि जिस देश में रहते हैं उसके विकास में भी सहयोग करते हैं।
प्रधानमंत्री ने केरला की एक नन्ही मासूम आलिन शेरिन के प्रसंग को उद्धरित करते हुए,आलिन के पिता अरुण अब्राहम और माँ शेरिन द्वारा आलिन के अंगदान किए जाने के फैसले को देशवासियों के समक्ष उजागर किया। इन दिनों भारत में अंगदान को लेकर जागरूकता लगातार बढ़ रही है। इससे उन लोगों की मदद हो रही है, जिन्हें इसकी जरूरत है। इसके साथ ही देश में मेडिकल रिसर्च को भी बल मिल रहा है। इस दिशा में कई संस्थाएँ और लोग असाधारण कार्य कर रहे हैं।
दिल्ली की लक्ष्मी देवी जी, जिन्होंने बीते वर्ष केदारनाथ की यात्रा की। इसके लिए उन्हें 14 किलोमीटर की ट्रैकिंग करनी पड़ी। आपको ये जानकर हैरानी होगी कि उन्होंने यह यात्रा हार्ट ट्रांसप्लांट के बाद की। उनका हार्ट केवल 15 प्रतिशत ही काम कर रहा था। ऐसे में उन्हें एक डोनर का हार्ट मिला, जिसकी मृत्यु हो गई थी।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, मैंने आज़ादी के अमृत महोत्सव के दौरान लाल किले से पंच प्राणों की बात कही थी। उनमें से एक है, गुलामी की मानसिकता से मुक्ति। आज देश गुलामी के प्रतीकों को पीछे छोड़कर भारत की संस्कृति से जुड़ी चीजों को महत्व देने लगा है। इस दिशा में हमारे राष्ट्रपति भवन ने भी एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। 23 फरवरी को राष्ट्रपति भवन में ‘राजाजी उत्सव’ मनाया जाएगा। इस अवसर पर राष्ट्रपति भवन के केन्द्रीय प्रांगण में सी. राजगोपालाचारी जी की प्रतिमा का अनावरण किया जाएगा। वे स्वतंत्र भारत के पहले भारतीय गवर्नर जनरल थे। वे उन लोगों में थे, जिन्होंने सत्ता को पद की तरह नहीं, सेवा की तरह देखा। सार्वजनिक जीवन में उनका आचरण, आत्मसंयम और स्वतंत्र चिंतन, आज भी हमें प्रेरित करता है।
‘मन की बात’ में, प्रधानमंत्री ने डिजिटल अरेस्ट पर विस्तार से चर्चा की। देश में डिजिटल अरेस्ट और डिजिटल फ्रॉड लेकर हमारे समाज में काफी जागरूकता आई, लेकिन अभी भी हमारे आसपास ऐसी घटनाएं हो रही हैं, जो अक्षम्य हैं। निर्दोष लोगों को डिजिटल अरेस्ट और फाइनेंशियल फ्रॉड का निशाना बनाया जा रहा है। कई बार पता चलता है कि किसी सीनियर सिटीजन की जीवनभर की कमाई ठग ली गई। कभी किसी उन पैसों की ठगी हो जाती है, जो उसने बच्चों की फीस जमा करने के लिए बचाए थे। कारोबारियों से धोखाधड़ी की खबरें भी हमें देखने को मिलती हैं। इसीलिए, आपका सतर्क रहना, जागरूक रहना बेहद जरूरी है। बैंक समय-समय पर केवाईसी और रि- केवाईसी करते हैं, ताकि आपका बैंक अकाउंट सुरक्षित रहे। हां, इसमें भी आपको एक बात याद रखनी है। जो अपराधी हैं, वो फर्जी कॉल करते हैं, एसएमएस कॉल लिंक भेजते हैं। इसीलिए हमें सतर्क रहना है और ऐसे धोखेबाजों के झांसे में नहीं आना है। केवाईसी और रि-केवाईसी केवल अपने बैंक की शाखा या आधिकारिक अप और ऑथराइज्ड मीडियम से ही कराएं। हाल ही में भारतीय रिजर्व बैंक ने इन्हीं विषयों पर वित्तीय साक्षरता सप्ताह का आयोजन किया था। वित्तीय साक्षरता का ये अभियान अब पूरे वर्ष जारी रहेगा। इसलिए भारतीय रिजर्व बैंक के मैसेज का ध्यान रखें और अपनी केवाईसी अपडेट रखें।
प्रधानमंत्री परीक्षा पर चर्चा का हवाला देते हुए परीक्षार्थियों से कहा, आप तो एग्जाम वॉरियर्स हैं। मुझे विश्वास है, आप सभी पूरे मन से इम्तिहान की तैयारियों में लगे होंगे। हाँ, ऐसे समय में मन में थोड़ी शंका आना भी स्वाभाविक है। कभी लगता है, सब याद रहेगा या नहीं रहेगा। कभी लगता है, समय कम तो नहीं पड़ जाएगा ना ! ये भाव हर पीढ़ी के बच्चों ने महसूस किए हैं, आप अकेले नहीं हैं। आप याद रखिए, आपका मूल्य आपकी मार्कशीट से तय नहीं होता। इसलिए खुद पर भरोसा रखिए। मुझे पूरा भरोसा है कि आप परीक्षा में भी सफल होंगे और अपने जीवन में भी सफलता की नई ऊंचाई प्राप्त करेंगे।
इन दिनों रमजान चल रहा है। मैं इस पवित्र महीने के लिए सभी को शुभकामनाएं देता हूँ। कुछ ही दिनों बाद होली का पर्व भी आ रहा है। यानि रंग, गुलाल और हंसी-खुशी से भरा समय दस्तक देने वाला है। आप सभी अपने परिवार और अपनों के साथ खुशी के साथ सारे त्योहार मनाएं। और हाँ, कुछ मंत्र हमेशा याद रखें, जैसे वोकल फाॅर लोकल। हमारे होली के त्योहारों में या अन्य कोई भी त्योहार में अनेक ऐसे साजो-सामान घुस गए हैं, जो विदेशी हैं। इन्हें त्योहारों से दूर रखिए, होली से भी दूर रखिए, स्वदेशी अपनाइये। जब आप स्वदेशी खरीदते हैं तो देश को आत्मनिर्भर बनाने के अभियान में भी मदद करते हैं।
प्रधानमंत्री ने अपने संदेश में कहा, आपके भेजे गए संदेशों से हमें देश के कोने-कोने में छिपी अद्भुत प्रतिभाओं के बारे में पता चलता है। निजी स्वार्थ से उठकर समाज के लिए कुछ करने की अनेक प्रेरणादायी गाथाएं आपके माध्यम से देशभर के लोगों तक पहुंची हैं। आप ऐसे ही अपने प्रयास जारी रखें। मुझे आपके संदेशों का इंतजार रहेगा।
