June 24, 2026

दिल्ली की मुख्यमंत्री आतिशी को सुप्रीम कोर्ट से मानहानि मामले में बड़ी राहत।

दिल्ली , मुख्यमंत्री आतिशी को भाजपा नेता प्रवीण शंकर कपूर द्वारा दायर मानहानि मामले में बड़ी राहत मिली है। राउज एवेन्यू कोर्ट सेशन कोर्ट ने मानहानि मामले में अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट द्वारा पारित समन के आदेश को रद्द कर दिया। हालांकि मानहानि का मुकदमा चलता रहेगा।

   मुख्यमंत्री आतिशी ने समन को चुनौती देते हुए राउज एवेन्य कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दाखिल की थी जिस पर फैसला सुरक्षित रख लिया गया था। 28 जनवरी राउज एवेन्यू कोर्ट सेशन कोर्ट ने मानहानि मामले में अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट द्वारा पारित समन के आदेश को रद्द कर दिया। 

  अदालत ने मानहानि मामले में जारी समन के खिलाफ दिल्ली की मुख्यमंत्री आतिशी द्वारा दायर अपील को स्वीकार कर लिया। अदालत ने कहा कि अगर प्रवीण शंकर कपूर की दलील को स्वीकार कर लिया जाता है तो भारत में लगभग हर राजनीतिक दल के नेताओं का हर सप्ताह मानहानि के लिए मुकदमा चलाने का आधार बन जाएगा।

    वहीं एक अन्य मामले सुप्रीम कोर्ट ने झारखंड सरकार की उस अपील को खारिज कर दिया, जिसमें उच्च न्यायालय के उस आदेश को चुनौती दी गई थी, जिसमें 2023 में राज्य सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन के सिलसिले में निशिकांत दुबे, अर्जुन मुंडा और बाबूलाल मरांडी सहित 28 भाजपा नेताओं के खिलाफ दंगा मामले को रद्द कर दिया गया था।

  जस्टिस अभय एस ओका और उज्जल भुइयां की पीठ ने सार्वजनिक प्रदर्शनों को रोकने के लिए धारा 144 सीआरपीसी के तहत प्रतिबंध लगाने के आदेश जारी करने की अधिकारियों की प्रवृत्ति पर सवाल उठाया।

   राज्य की ओर से पेश हुए अधिवक्ता ने कहा कि 144 सीआरपीसी का आदेश लागू था और इसके बावजूद, भीड़ का नेतृत्व उनके द्वारा किया गया और वे अव्यवस्थित हो गए। राज्य के अधिवक्ता ने तर्क दिया, “पत्रकार घायल हुए, पुलिसकर्मी घायल हुए, एसडीओ घायल हुए और उच्च न्यायालय ने कहा कि उन्हें प्रदर्शन करने का अधिकार है।” इस पर पीठ ने कहा, “यह चलन है कि चूंकि विरोध प्रदर्शन हो रहा है, इसलिए 144 (सीआरपीसी) का आदेश जारी किया जाता है। इससे गलत संकेत जाएगा। अगर कोई प्रदर्शन करना चाहता है तो 144 जारी करने की क्या जरूरत है? यह सब इसलिए हो रहा है क्योंकि 144 का दुरुपयोग किया जा रहा है।”

  सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया, “हस्तक्षेप करने का कोई मामला नहीं बनता। एसएलपी खारिज की जाती है।” शीर्ष अदालत झारखंड राज्य द्वारा झारखंड उच्च न्यायालय के उस आदेश के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें सांसद निशिकांत दुबे सहित भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेताओं के खिलाफ दंगा मामले को खारिज कर दिया गया था।

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