June 23, 2026

कैंसर अस्पताल बने हो गए 12 महीने, संचालक तलाशने में छूटे रहे पसीने

कैंसर मरीजों को बेहतर इलाज की सुविधा देने के लिए देहरादून के हर्रावाला में सुपर स्पेशियलिटी कैंसर अस्पताल बन कर तैयार है। लेकिन पब्लिक प्राइवेट पाटर्नरशिप (पीपीपी) मोड पर अस्पताल को चलाने के लिए संचालक तलाशने में पसीने छूट रहे हैं। प्रदेश सरकार ने 2024 में अस्पताल को पीपीपी मोड पर संचालित करने का निर्णय लिया है। एक साल बाद भी कैंसर का इलाज शुरू नहीं हो पाया।

2020 में सुपर स्पेशियलिटी कैंसर अस्पताल का शिलान्यास किया गया था। इस अस्पताल का निर्माण राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन(एनएचएम) के तहत केंद्र व प्रदेश सरकार के वित्तीय सहयोग से किया गया। 106 करोड़ की लागत से बने 300 बेड के इस अस्पताल को मार्च 2024 में सरकार ने पीपीपी मोड पर चलाने का निर्णय लिया।

दिसंबर 2023 में हुए वैश्विक निवेशक सम्मेलन में प्रदेश सरकार ने स्वास्थ्य क्षेत्र में काम करने वाली कंपनियों को अस्पताल संचालित करने के लिए आमंत्रित किया। इसमें दो कंपनियों ने अस्पताल को चलाने में रुचि दिखाई थी। इसके बावजूद संचालक तय नहीं हुआ है। जिससे कैंसर बीमार से पीड़ित मरीजों को निजी अस्पतालों में इलाज कराना पड़ रहा है।

उच्च स्तरीय सर्जरी की सुविधा मिलेगी
सरकार का दावा था कि कैंसर अस्पताल को पीपीपी मोड पर देने से उपकरण क्रय, मानव संसाधन व संचालन पर होने वाले व्यय की बचत होगी। साथ ही मरीजों को गुणवत्तापरक विशेषज्ञ चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध होगी। अस्पताल भवन 20403.49 वर्ग मीटर क्षेत्रफल में बना है। अस्पताल में कैंसर से संबंधित सभी जांच, परामर्श, रेडियोथेरेपी, कीमोथेरेपी व अन्य उच्च स्तरीय सर्जरी की सुविधा मिलेगी।

प्रदेश सरकार ने कैंसर अस्पताल हर्रावाला के साथ ही मातृ एवं शिशु अस्पताल हरिद्वार को पीपीपी मोड पर संचालित करने का निर्णय लिया है। मातृ एवं शिशु अस्पताल को जल्द ही शुरू किया जाएगा। जबकि कैंसर अस्पताल के लिए अन्य औपचारिकताओं की प्रक्रिया चल रही है। -डॉ. आर. राजेश कुमार, सचिव स्वास्थ्य

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