प्रयागराज में बीते 7 दिनों से अपने शिविर के बाहर धरने पर बैठे स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का मामला राजनीतिक बना,
Prayagraj 25 January 2025,
प्रयागराज में चल रहे माघ मेले में बीते 7 दिनों से स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद अपने शिविर के बाहर धरने पर बैठे हुए हैं। बताया जा रहा है कि, शनिवार शाम को कुछ अराजक तत्वों ने हंगामा किया और मारपीट करते हुए शिविर में जबरन घुसने की कोशिश की। जिसके बाद अविमुक्तेश्वरानंद के सेवकों और जबरन घुसे लोगों के बीच हाथापाई हुई। अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने कहा है कि, अगर शरारती तत्वों पर कानूनी कार्रवाई नहीं हुई तो, उनकी जान को, श्रद्धालुओं और शिविर की संपत्ति को गंभीर खतरा उत्पन्न हो सकता है। अब ये लड़ाई संतों की बैठक नहीं, बल्कि एक राजनीतिक मुद्दा बन गया है।
माघ मेले में मौनी अमावस्या के दिन शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती पालकी में स्नान के लिए जा रहे थे, तभी पुलिस ने उन्हें रोकते हुए पैदल जाने को कहा। जिससे पुलिस और उनके शिष्यों के साथ धक्का-मुक्की हुई। घटना से नाराज शंकराचार्य माघ मेला क्षेत्र स्थित अपने शिविर के बाहर धरने पर बैठ गए थे। मेला प्रशासन ने ओर से अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को दो नोटिस जारी किए पहले नोटिस में शंकराचार्य की पदवी के प्रयोग को लेकर स्पष्टीकरण मांगा गया, दूसरे नोटिस में मौनी अमावस्या के दौरान उत्पन्न विवाद को लेकर जवाब तलब किया है।
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के समर्थन में पुरी गोवर्धन मठ के शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती ने कहा , शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद को स्नान के लिए अनुमति दी जानी चाहिए थी। साधु-संतों के साथ मारपीट और ब्रह्मचारियों की चोटियां पकड़कर उन्हें खींचना बिल्कुल गलत है. कहा कि शंकराचार्य हों या फिर कोई और, यह बात सभी पर लागू होती है। सभी को स्नान की मर्यादा का ध्यान रखना चाहिए। वहीं जगद्गुरु परमहंस आचार्य ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद शंकराचार्य पर तंज कसते हुए दावा किया कि जो देश में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व से खुश नहीं हैं, वे सनातन विरोधी हैं।
बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती, समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव और कांग्रेस पार्टी के नेताओं ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के समर्थन में बयान दिया है।
