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September 21, 2026

पशुचिकित्सा सेवाओं की गुणवत्ता को सुदृढ़ करने और पशुचिकित्साधिकारियों के कौशल विकास हेतु तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारम्भ

Uttrakhand 17 February 2026

पशुचिकित्सा विज्ञान के बदलते परिदृश्य के दृष्टिगत पशुपालन विभाग के पशुचिकित्साधिकारियों के कौशल विकास हेतु उत्तराखण्ड राज्य पशुचिकित्सा परिषद द्वारा आज मंगलवार, को पशुपालन विभाग में कार्यरत बीस पशुचिकित्साधिकारियों के लिए तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम “फ्रैक्चर मैनेजमेंट एंड ऑर्थोपेडिक टेक्निक इन एनिमल का फील्ड वेटरिनेरियन” का आयोजन किया गया।

कार्यक्रम का शुभारम्भ डाॅ. उदय शंकर निदेशक पशुपालन, एवं डा. कैलाश उनियाल अध्यक्ष उत्तराखण्ड राज्य पशुचिकित्सा परिषद, द्वारा दीप प्रज्वलन के साथ किया गया। डॉ. उदय शंकर निदेशक ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्रतिभागी पशुचिकित्साधिकारियों से कहा कि, वे प्रशिक्षण से प्राप्त ज्ञान का उपयोग कर पशुपालकों को बेहतर एवं प्रभावी पशुचिकित्सा सेवाएं उपलब्ध कराएं तथा अपने-अपने जनपदों के अन्य पशुचिकित्साधिकारियों के साथ भी इस ज्ञान को साझा करें। उन्होंने कहा, यह प्रशिक्षण कार्यक्रम राज्य में पशुचिकित्सा सेवाओं की गुणवत्ता को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम सिद्ध होगा।

अध्यक्ष डाॅ. कैलाश उनियाल ने पशुचिकित्साधिकारियों के कौशल उन्नयन पर विशेष बल देते हुए प्रत्येक जनपद में मॉडल पशुचिकित्सालय की स्थापना हेतु निरंतर प्रयास किए जाने की आवश्यकता पर बल दिया।

क प्रशिक्षण कार्यक्रम में विषय विशेषज्ञ के रूप में डाॅ. रोहित कुमार, सहायक प्रोफेसर, भारतीय पशुचिकित्सा अनुसंधान संस्थान, बरेली द्वारा पशुओं में फ्रैक्चर प्रबंधन एवं आर्थाेपेडिक तकनीकों के संबंध में विस्तृत एवं व्यावहारिक जानकारी प्रदान की गई।

इस अवसर पर डाॅ. प्रलयंकर नाथ, रजिस्ट्रार, उत्तराखण्ड राज्य पशुचिकित्सा परिषद ने अवगत कराया कि परिषद के उद्देश्यों के अनुरूप “सतत कौशल विकास कार्यक्रम” के अंतर्गत पशुचिकित्सकों के व्यावसायिक कौशल संवर्द्धन हेतु विशेष प्रयास किए जाएंगे।

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