मदरसन विवाद में थानाध्यक्ष पर बढ़ा कानूनी शिकंजा
चोरगलिया में मदरसन फैक्ट्री विवाद और कथित पुलिस बर्बरता के मामले में थानाध्यक्ष हरपाल सिंह की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। मामले में नैनीताल पुलिस द्वारा गठित उच्च स्तरीय जांच के तहत शिकायतकर्ता एवं आरटीआई कार्यकर्ता पीयूष जोशी ने पुलिस अधीक्षक (अपराध/यातायात) के समक्ष अपना विस्तृत बयान दर्ज कराया है।
पीयूष जोशी ने जांच अधिकारी को वीडियो फुटेज, कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR), मेडिकल रिपोर्ट और अस्पताल की डिस्चार्ज समरी सहित कई तकनीकी साक्ष्य सौंपे हैं। इन साक्ष्यों में कथित रूप से थानाध्यक्ष द्वारा दी गई धमकियां और मारपीट की घटनाएं दर्ज होने का दावा किया गया है।
शिकायतकर्ता के अनुसार 20 अप्रैल 2026 को मदरसन कंपनी के बाहर वह शांतिपूर्ण मध्यस्थता कर रहे थे, तभी कथित तौर पर उन पर हमला किया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि थानाध्यक्ष हरपाल सिंह ने उनका गला दबाकर जानलेवा हमला किया। जोशी ने यह भी दावा किया कि वीडियो फुटेज में आरोपी अधिकारी उन्हें धमकी देते हुए दिखाई दे रहे हैं।
अपने बयान में पीयूष जोशी ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज करने की मांग की है। उन्होंने सर्वोच्च न्यायालय के फैसलों का हवाला देते हुए मामले को “हत्या के प्रयास” और “आपराधिक षड्यंत्र” की श्रेणी में बताया।
मामले में हिरासत के दौरान कथित यातना और अवैध हिरासत के आरोप भी लगाए गए हैं। शिकायतकर्ता का कहना है कि पुलिस ने घटना के बाद उन पर फर्जी मुकदमा दर्ज किया और हिरासत में अमानवीय व्यवहार किया गया। साथ ही उन्होंने लालकुआं और मल्लीताल कोतवाली के सीसीटीवी डीवीआर सुरक्षित रखने की मांग भी उठाई है।
इस बीच मामले की जांच को लेकर क्षेत्र में चर्चा तेज हो गई है। सामाजिक संगठनों और स्थानीय लोगों की नजर अब उत्तराखंड पुलिस और एसएसपी नैनीताल की आगामी कार्रवाई पर टिकी हुई है। शिकायतकर्ता ने साक्ष्यों से छेड़छाड़ की आशंका जताते हुए आरोपी थानाध्यक्ष के तत्काल निलंबन की मांग की है।
हालांकि मामले में पुलिस प्रशासन की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। जांच रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।
