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August 16, 2026

येटीवीके विधायक को फ्लोर टेस्ट में मतदान नहीं करने के मद्रास हाई कोर्ट के फैसले पर सुप्रीम कोर्ट ने लगाई रोक 

Tamilnadu , 1 May 2026,

तमिलनाडु विधानसभा में फ्लोर टेस्ट के दौरान मद्रास हाईकोर्ट द्वारा टीवीके विधायक श्रीनिवास सेतुपति के मतदान पर रोक लगाने के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट में बुधवार को तीखी बहस देखने को मिली है। सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने मद्रास हाईकोर्ट के आदेश पर गंभीर टिप्पणी की है। सुप्रीम कोर्ट ने मद्रास हाई कोर्ट के उसे फैसले पर रोक लगा दी है जिसमें विधायक श्रीनिवास पति को रोड टेस्ट के दौरान मतदान करने से रोका गया था।

 

सुनवाई के दौरान जस्टिस विक्रम नाथ, संदीप मेहता और विजय बिश्नोई की पीठ ने हाई कोर्ट के आदेश को “अत्याचारपूर्ण” करार दिया। यह आदेश सेतुपति के विरोधी उम्मीदवार द्वारा दायर अनुच्छेद 226 की याचिका पर पारित किया गया था, न कि कानून के तहत अनिवार्य रूप से चुनाव याचिका पर। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यह कहना गलत नहीं होगा कि यह अत्यंद निंदनीय है।

याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने मद्रास हाई कोर्ट के आदेश पर कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि यह आदेश स्पष्ट रूप से न्यायिक मर्यादा की अवहेलना है और इस तरह किसी विधायक को फ्लोर टेस्ट में वोट डालने से रोकना लोकतांत्रिक प्रक्रिया के खिलाफ है। सिंघवी ने अदालत में कहा कि अगर किसी आदेश की कड़ी आलोचना होनी चाहिए, तो वह यही आदेश है। इस दौरान उन्होंने यह भी कहा कि विपक्ष यह तर्क देगा कि फ्लोर टेस्ट शुरू हो चुका है, लेकिन इससे मूल संवैधानिक प्रश्न खत्म नहीं हो जाता है।

इस पर जस्टिस विक्रम नाथ जस्टिस मेहता ने हाईकोर्ट के आदेश पर गंभीर टिप्पणी करते हुए सरकार की पैरवी कर रहे मुकुल रोहतगी से कहा कि,- आप स्थगन आदेश पर भी कारण बताने वाला आदेश चाहते हैं? यह तो बेहद ही गलत है। पूरा विवाद उस चुनावी सीट से जुड़ा है, जहां डीएमके उम्मीदवार पेरियाकरुप्पन केवल एक वोट से चुनाव हार गए थे। डीएमके की ओर से दायर याचिका में दावा किया गया कि उनके समर्थन में पड़ा डाक गलती से दूसरे निर्वाचन क्षेत्र में भेज दिया गया था, जिससे चुनाव परिणाम प्रभावित हुआ

प्रतिवादी पक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतोगी ने कहा कि मैं एक वोट से हार गया हूं। इस पर बेंच ने सवाल किया कि तो आप रिट याचिका दायर करेंगे? अदालत ने यह भी संकेत दिया कि जब हाईकोर्ट स्वयं कह चुका है कि उचित उपाय चुनाव याचिका है, तब अनुच्छेद 226 के तहत रिट याचिका पर विचार करना असामान्य प्रतीत होता है. सुप्रीम कोर्ट की इन टिप्पणियों को मामले में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

बता दें कि, तमिलनाडु विधानसभा में आज बुधवार को मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय थलापति द्वारा पेश किया गया विश्वासमत प्रस्ताव बहुमत से पारित हो गया। टीवीके चीफ ने बड़े आराम से फ्लोर टेस्ट पास कर लिया। उन्हें कुल 144 विधायकों ने समर्थन दिया, जो 234 सदस्यीय विधानसभा के बहुमत के आंकड़े 118 से अधिक है। फ्लोर टेस्ट के दौरान डीएमके ने सदन से वॉक आउट कर दिया।

 

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