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August 16, 2026

कॉर्बेट का मशहूर बाघ ‘भोला’ घायल अवस्था में रेस्क्यू, इलाज के बाद जंगल में छोड़ा जाएगा

tiger

कॉर्बेट लैंडस्केप से वन्यजीव संरक्षण से जुड़ी एक अहम खबर सामने आई है। जंगल में घायल और बेहद कमजोर हालत में घूम रहे मशहूर नर बाघ ‘भोला’ का वन विभाग ने गुरुवार देर रात सफलतापूर्वक रेस्क्यू कर उसे ढेला रेस्क्यू सेंटर पहुंचा दिया। प्रारंभिक चिकित्सीय जांच में उसके पैर में गंभीर घाव मिले हैं। आशंका जताई जा रही है कि दूसरे नर बाघ के साथ क्षेत्रीय संघर्ष के दौरान वह घायल हुआ, जिसके कारण वह शिकार भी नहीं कर पा रहा था।

तराई पश्चिमी वन प्रभाग के प्रभागीय वनाधिकारी (डीएफओ) पी.सी. आर्या ने बताया कि फाटो जोन में गश्त के दौरान वनकर्मियों ने कुछ समय पहले भोला को लंगड़ाते हुए देखा था। सूचना मिलने के बाद उसकी लगातार निगरानी की गई। मॉनिटरिंग के दौरान स्पष्ट हुआ कि बाघ गंभीर रूप से घायल होने के साथ-साथ काफी कमजोर भी हो चुका है। इसके बाद उच्च अधिकारियों की अनुमति से उसके रेस्क्यू के लिए विशेषज्ञ टीम का गठन किया गया।

डीएफओ ने बताया कि गुरुवार रात करीब 10 बजे भोला फाटो जोन में दिखाई दिया। मौके का लाभ उठाते हुए विशेषज्ञ टीम ने उसे सुरक्षित तरीके से ट्रैंक्विलाइज किया और सफलतापूर्वक रेस्क्यू कर ढेला रेस्क्यू सेंटर पहुंचाया।

कॉर्बेट टाइगर रिजर्व के वरिष्ठ वन्यजीव पशु चिकित्साधिकारी डॉ. दुष्यंत शर्मा ने बताया कि भोला एक वयस्क नर बाघ है। घायल होने की सूचना मिलने के बाद से वन विभाग उसकी लगातार निगरानी कर रहा था, लेकिन वह बार-बार अपना क्षेत्र बदलकर ढेला के जंगलों की ओर चला जाता था, जिससे उसका रेस्क्यू चुनौतीपूर्ण बना हुआ था।

डॉ. शर्मा के अनुसार प्रारंभिक जांच में बाघ के एक पैर में गहरा घाव मिला है और कई स्थानों पर मांस भी उधड़ा हुआ है। संभावना है कि यह चोट किसी दूसरे नर बाघ के साथ क्षेत्रीय संघर्ष के दौरान लगी होगी। गंभीर चोट के कारण वह शिकार नहीं कर पा रहा था, जिससे उसकी शारीरिक स्थिति लगातार कमजोर होती चली गई।

फिलहाल भोला को ढेला रेस्क्यू सेंटर में विशेषज्ञ चिकित्सकों की निगरानी में रखा गया है। वन विभाग के अनुसार उसका उपचार जारी है और पूरी तरह स्वस्थ होने के बाद उसे दोबारा उसके प्राकृतिक आवास में छोड़ दिया जाएगा।

वन विभाग ने इस सफल रेस्क्यू को कॉर्बेट लैंडस्केप में वन्यजीव संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया है।

पर्यटकों का चहेता था ‘भोला’

भोला नाम इस बाघ को वन विभाग ने नहीं, बल्कि नेचर गाइड और वन्यजीव प्रेमियों ने दिया है। यह बाघ अक्सर सफारी के दौरान पर्यटकों की जिप्सियों के आसपास शांत स्वभाव से दिखाई देता था और कभी किसी को नुकसान नहीं पहुंचाता था। उसके इसी सहज और शांत व्यवहार के कारण वन्यजीव प्रेमियों ने उसे प्यार से ‘भोला’ नाम दिया, जिससे वह कॉर्बेट आने वाले पर्यटकों के बीच भी खासा लोकप्रिय हो गया।

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