राम नाम से सत्ता पाई, चंदा चोरी पर चुप्पी छाई: कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश,
Delhi 19 October 2026,
कांग्रेस ने सोमवार को आरोप लगाया कि अयोध्या स्थित श्रीराम मंदिर में “चढ़ावा चोरी” का मामला सार्वजनिक हुए साढ़े चार महीने से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ इस पर अब तक मौन हैं।
पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, “राम नाम से सत्ता पाई, चंदा चोरी पर चुप्पी छाई। राम जी का नाम लेकर सत्ता में आई भाजपा, चंदा चोरी के पाप से खत्म हो जाएगी। उन्होंने दावा किया कि चार जून को अयोध्या के राम मंदिर में कथित चोरी का मामला सार्वजनिक हुआ था, लेकिन उत्तर प्रदेश सरकार ने राम मंदिर ट्रस्ट के अनुरोध पर नौ दिन बाद 13 जून को विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया। 17 अगस्त को एसआईटी की अंतिम रिपोर्ट ट्रस्ट को सौंप दी और इसमें ट्रस्ट से जुड़े चंपत राय और अनिल मिश्रा को ‘क्लीन चिट’ दे दी गई। महासचिव जयराम रमेश ने सवाल उठाया कि, जिस संस्था से जुड़े लोग इस मामले में संलिप्त हैं, उसी संस्था के अनुरोध और सहूलियत के मुताबिक जांच क्यों की गई?
पार्टी महासचिव ने कहा कि खजाने की जिम्मेदारी कोषाध्यक्ष की थी और अयोध्या के कुछ संतों ने भी सवाल उठाया था कि कोषाध्यक्ष गोविंद गिरि को यह जानकारी होनी चाहिए थी कि पैसा कहां से आ रहा है और कहां जा रहा है। रमेश ने दावा किया कि इसके बावजूद सात जुलाई को गिरि ने इस “घोटाले” में चंपत राय की किसी भूमिका से इनकार किया। ऐसी स्थिति में जिम्मेदारी और अन्य लोगों की संभावित भूमिका की विस्तृत जांच किए बिना जांच कैसे बंद की जा सकती है? कांग्रेस नेता के अनुसार, 25 जून को प्राथमिकी दर्ज की गई और अगले दिन गिनती से जुड़े आठ लोगों को गिरफ्तार किया गया, लेकिन प्राथमिकी में ट्रस्ट के किसी पूर्व पदाधिकारी का नाम नहीं था। इस मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) अथवा केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) से पूछताछ या जांच क्यों नहीं कराई गई?
कांग्रेस महासचिव ने मांग की कि राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी के पूरे मामले की जांच उच्चतम न्यायालय की निगरानी में स्वतंत्र, निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से कराई जाए। उन्होंने कहा कि मंदिर को मिले चढ़ावे का पूरा हिसाब सार्वजनिक किया जाना चाहिए, सभी जिम्मेदार लोगों की भूमिका की जांच होनी चाहिए और किसी भी पदाधिकारी को जवाबदेही से नहीं बचाया जाना चाहिए।
