विरासत महोत्सव में शास्त्रीय संगीत की त्रिवेणी, महेश काले की गायकी ने बांधा समां
विरासत महोत्सव-2026 में मंगलवार को कला, शिल्प और भारतीय शास्त्रीय संगीत का अनूठा संगम देखने को मिला। दिनभर जहां स्कूली बच्चों ने पारंपरिक हस्तकलाओं से रूबरू होकर अपनी रचनात्मक प्रतिभा का प्रदर्शन किया, वहीं शाम को सजी सांस्कृतिक महफिल में देश के प्रतिष्ठित कलाकारों ने अपनी प्रस्तुतियों से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। मुजफ्फर रहमान की ताल वाद्य कचहरी, सितार वादक समन्वय सरकार की प्रस्तुति और शास्त्रीय गायक महेश काले की गायकी ने महोत्सव की शाम को यादगार बना दिया।
हस्तशिल्प कार्यशाला में बच्चों ने सीखी पारंपरिक कलाएं
महोत्सव के अंतर्गत लिटिल माइंड स्कूल के 22 विद्यार्थियों के लिए मास्टर शिल्पकारों के मार्गदर्शन में विशेष हस्तशिल्प कार्यशाला आयोजित की गई। इसमें बच्चों को टेराकोटा और टाई-एंड-डाई कला की बारीकियों से परिचित कराया गया। विद्यार्थियों ने इन पारंपरिक शिल्प विधाओं को समझने के साथ स्वयं कलाकृतियां तैयार करने की गतिविधियों में उत्साहपूर्वक भाग लिया।
कार्यशाला का उद्देश्य नई पीढ़ी को भारतीय पारंपरिक हस्तकलाओं से जोड़ना और उनकी रचनात्मक प्रतिभा को मंच प्रदान करना रहा। मास्टर शिल्पकारों के मार्गदर्शन में बच्चों ने अपनी कल्पनाशीलता को कलाकृतियों के माध्यम से अभिव्यक्त किया। विरासत की प्रतिदिन आयोजित होने वाली विरासत साधना में अब तक हजारों स्कूली बच्चे प्रतिभाग कर अपनी कला और हुनर का प्रदर्शन कर चुके हैं।
विरासत भारतीय कला और संस्कृति के संरक्षण का महत्वपूर्ण मंच : संजय जोशी
द ओरिएंटल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड के सीएमडी संजय जोशी ने मंगलवार को विरासत महोत्सव में पहुंचकर आयोजन की सराहना की। उन्होंने कहा कि विरासत महोत्सव भारतीय कला, शिल्प और सांस्कृतिक परंपराओं के संरक्षण एवं संवर्धन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। ऐसे आयोजन नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने और विरासत को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने का प्रभावी माध्यम हैं।
उन्होंने महोत्सव का हिस्सा बनने पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए इसके अंतरराष्ट्रीय स्तर पर और अधिक सफल होने की कामना की। साथ ही विरासत को हरसंभव सहयोग और आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने का आश्वासन भी दिया।
महोत्सव की बारहवीं सांस्कृतिक संध्या-ए-महफिल का शुभारंभ संजय जोशी और रीच संस्था के संस्थापक आरके सिंह ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया।
मुजफ्फर रहमान की ताल वाद्य कचहरी ने बांधा समां
सांस्कृतिक संध्या में अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त कलाकार मुजफ्फर रहमान और उनके आठ सदस्यीय समूह ने ताल वाद्य कचहरी की शानदार प्रस्तुति दी। विभिन्न वाद्ययंत्रों की लयबद्ध संगति ने श्रोताओं को भारतीय संगीत की समृद्ध परंपरा का विशेष अनुभव कराया।
प्रस्तुति में मुजफ्फर रहमान, अयान हुसैन और रमजान हुसैन ने तबले पर, ऐश्वर्या आर्य ने पखावज पर, सरफराज ने ढोलक पर, रमेश मीना ने हारमोनियम पर, इरफान ने सितार पर और जाकिर हुसैन ने सारंगी पर संगत की। कार्यक्रम की शुरुआत प्रसिद्ध राजस्थानी मांड ‘केसरिया बालम’ से हुई, जबकि ठुमरी के साथ प्रस्तुति का समापन हुआ। कलाकारों की बेहतरीन तालमेल और लयकारी ने दर्शकों की खूब वाहवाही बटोरी।
समन्वय सरकार के सितार वादन ने श्रोताओं को किया मंत्रमुग्ध
इसके बाद मशहूर सितार एवं सुरबहार वादक समन्वय सरकार ने अपने वादन से विरासत के मंच पर शास्त्रीय संगीत की खूबसूरती बिखेरी। उनकी प्रस्तुति में भारतीय शास्त्रीय संगीत की गहराई और रागों की सूक्ष्मता का अद्भुत संगम देखने को मिला।
उन्होंने अपनी प्रस्तुति की शुरुआत राग हेमंत से की और समापन राग मांझ खमाज के साथ किया। इस दौरान दिनेश तुलसी भट्ट ने तानपुरे और शुभ महाराज ने तबले पर शानदार संगत की। सितार, तानपुरे और तबले की मधुर जुगलबंदी ने श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।
समन्वय सरकार को शास्त्रीय संगीत के क्षेत्र में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली है। उन्हें मॉस्को में ब्रावो अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त करने वाले पहले भारतीय शास्त्रीय संगीतकार के रूप में भी ख्याति हासिल है। उन्हें राष्ट्रीय पुरस्कार और आकाशवाणी एवं दूरदर्शन की ओर से ग्रेड-ए सहित कई सम्मान प्राप्त हुए हैं। उन्होंने देश-विदेश के अनेक प्रतिष्ठित संगीत समारोहों में अपनी प्रस्तुतियां दी हैं।
महेश काले की गायकी ने लूटी महफिल
सांस्कृतिक संध्या का एक प्रमुख आकर्षण शास्त्रीय गायक महेश काले की प्रस्तुति रही। अपनी विशिष्ट गायकी, मधुर आवाज और रागों की प्रभावशाली प्रस्तुति से उन्होंने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। उनके सुरों और संगीत की गहराई ने महफिल में मौजूद श्रोताओं को देर तक बांधे रखा।
महेश काले की प्रस्तुति ने विरासत महोत्सव की सांस्कृतिक संध्या को विशेष ऊंचाई प्रदान की। भारतीय शास्त्रीय संगीत की समृद्ध परंपरा को समर्पित इस शाम में कलाकारों की प्रस्तुतियों को दर्शकों ने खूब सराहा।
