October 31, 2026

विरासत महोत्सव में संगीत, साहित्य और कला का संगम, इंडियन ओशियन की प्रस्तुति ने बांधा समां

Virasat

रीच संस्था की ओर से आयोजित विरासत महोत्सव-2026 का आठवां दिन कला, साहित्य, संगीत और रचनात्मकता के नाम रहा। शुक्रवार को हिमालयन सांस्कृतिक केंद्र में आयोजित विभिन्न कार्यक्रमों में जहां स्कूली बच्चों ने अपनी चित्रकारी के जरिए शहर और प्रकृति के प्रति अपनी कल्पनाओं को रंगों में उकेरा, वहीं साहित्यिक चर्चाओं और शास्त्रीय संगीत की प्रस्तुतियों ने दर्शकों को आकर्षित किया। शाम को मशहूर भारतीय रॉक बैंड इंडियन ओशियन की प्रस्तुति ने महोत्सव की रौनक को चरम पर पहुंचा दिया।

महोत्सव के तहत स्कूली विद्यार्थियों के लिए ‘सिट एंड ड्रॉ’ प्रतियोगिता आयोजित की गई। इसमें 13 विद्यालयों के विद्यार्थियों सहित मौके पर पहुंचकर पंजीकरण कराने वाले प्रतिभागियों ने भी उत्साहपूर्वक हिस्सा लिया। प्रतियोगिता में कुल 275 प्रतिभागियों ने भागीदारी की। इस वर्ष प्रतियोगिता का विषय ‘माय सिटी एंड नेचर’ रखा गया था। इसके माध्यम से बच्चों को अपने शहर, प्राकृतिक सुंदरता, पर्यावरण और आसपास के परिवेश को चित्रों के माध्यम से अभिव्यक्त करने का अवसर मिला। विद्यार्थियों ने रंगों और कल्पनाशीलता के जरिए अपनी सोच को कागज पर उतारा।

प्रतियोगिता में स्मॉल बेल्स, दून प्रेसीडेंसी स्कूल, सेंट जूड्स स्कूल, ब्रुकलिन स्कूल, दून सरला अकादमी, पीएम श्री गवर्नमेंट गर्ल्स इंटर कॉलेज, फ्लाईफोट पब्लिक स्कूल, दून इंटरनेशनल स्कूल सिटी कैंपस, श्री गुरु राम राय पब्लिक स्कूल बालावाला, ज्ञानंदा स्कूल फॉर गर्ल्स, दिल्ली पब्लिक स्कूल विकासनगर, आर्मी पब्लिक स्कूल क्लेमेंट टाउन और वेलहम बॉयज स्कूल के विद्यार्थियों ने प्रतिभाग किया।

वहीं, विरासत महोत्सव में पहली बार वैली ऑफ वर्ड्स की ओर से ‘वॉव एट विरासत’ का विशेष आयोजन किया गया। 30 अक्टूबर को आयोजित इस कार्यक्रम में साहित्य, कविता, पुस्तक चर्चा और संगीत के जरिए उत्तराखंड एवं हिंदी साहित्य की समृद्ध परंपरा को मंच मिला। कार्यक्रम की शुरुआत सचिन चौहान के स्वागत संबोधन से हुई। इसके बाद राजकुमार पंवार की पुस्तक ‘अब हुआ सवेरा’ पर सोमेश्वर पांडे के साथ चर्चा हुई।

प्रख्यात हिंदी गीतकार बुद्धिनाथ मिश्र की काव्य रचनाओं पर विशेष सत्र आयोजित किया गया। इसके साथ ही उत्तराखंड राज्य के 25 वर्ष पूरे होने के अवसर पर प्रकाशित पुस्तक ‘उत्तराखंड के 25 वर्ष’ पर परिचर्चा हुई। इसमें पुस्तक के संपादक संजीव चोपड़ा और सह-संपादक गंधर्व गोपाल जोशी ने राजलक्ष्मी दत्ता के साथ संवाद किया। सत्र की अध्यक्षता मनोज बर्थवाल ने की। हिंदी कविता सत्र में श्रुति वत्स, सोमेश्वर पांडे और भारती मिश्र ने अपनी रचनाओं का पाठ किया। कार्यक्रम का समापन पंजाबी के महान कवि शिव कुमार बटालवी के गीतों की संगीतमय प्रस्तुति के साथ हुआ, जिसे अभिनव त्यागी ने प्रस्तुत किया। महोत्सव निदेशक डॉ. संजीव चोपड़ा ने कहा कि वैली ऑफ वर्ड्स और विरासत का एक साथ आना दो साहित्यिक एवं सांस्कृतिक धाराओं के संगम जैसा है।

संगीत संध्या में विश्व प्रसिद्ध सितार वादक ध्रुव बेदी ने अपनी शानदार प्रस्तुति से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। उन्होंने राग शुद्ध कल्याण से प्रस्तुति की शुरुआत करते हुए आलाप, जोड़ और झाला के माध्यम से राग की मधुरता और गहराई को प्रस्तुत किया। इसके बाद तीनताल में विलंबित और द्रुत लय की बंदिशें बजाईं। उन्होंने राग शंकरा को मध्यलय और द्रुत लय में प्रस्तुत करने के बाद लोकप्रिय सूफी रचना ‘छाप तिलक’ की सितार पर मनमोहक धुन सुनाकर कार्यक्रम का समापन किया। तबले पर पंडित अभिषेक मिश्रा ने शानदार संगत की। दोनों कलाकारों की जुगलबंदी ने शास्त्रीय संगीत प्रेमियों को विशेष रूप से प्रभावित किया।

सितार वादक ध्रुव बेदी संगीतकार परिवार से आते हैं। उन्होंने अपने पिता जगदीप सिंह बेदी से सितार की शिक्षा शुरू की और वर्तमान में पद्म भूषण पंडित बुद्धादित्य मुखर्जी से प्रशिक्षण ले रहे हैं। वह ऑल इंडिया रेडियो और दूरदर्शन के टॉप ग्रेड कलाकार हैं। उन्हें संगीत नाटक अकादमी के प्रतिष्ठित उस्ताद बिस्मिल्लाह खान युवा पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है। भारत के अलावा अमेरिका, ब्रिटेन, स्पेन, स्विट्जरलैंड, स्वीडन, न्यूजीलैंड, रूस और दक्षिण कोरिया सहित कई देशों में अपनी प्रस्तुतियां दे चुके ध्रुव बेदी ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारतीय शास्त्रीय संगीत को पहचान दिलाई है।

महोत्सव के आठवें दिन का सबसे बड़ा आकर्षण भारतीय रॉक बैंड इंडियन ओशियन की प्रस्तुति रही। बैंड ने भारतीय लोक संगीत, शास्त्रीय सुरों और आधुनिक रॉक संगीत के अनूठे संगम से दर्शकों को झूमने पर मजबूर कर दिया। गायन, गिटार, बास, ड्रम और तबले के शानदार तालमेल ने पूरे माहौल को संगीतमय बना दिया। बैंड की प्रस्तुति में हिमांशु जोशी ने गायन, निखिल राव ने गिटार, राहुल राम ने बास, अमित किलम ने ड्रम और तुहीन चक्रवर्ती ने तबले एवं पर्क्यूशन पर संगत की।

कार्यक्रम के दौरान बैंड ने अपनी खास फ्यूजन रॉक शैली से श्रोताओं का भरपूर मनोरंजन किया। भारतीय रागों, लोक धुनों और आधुनिक संगीत के मेल ने प्रस्तुति को खास बनाया। कार्यक्रम का समापन बैंड के लोकप्रिय गीत ‘कंडीसा’ के साथ हुआ। इस गीत पर दर्शकों में खासा उत्साह देखने को मिला और पूरा परिसर तालियों से गूंज उठा।

गौरतलब है कि इंडियन ओशियन को भारतीय फ्यूजन रॉक का अग्रदूत माना जाता है। बैंड ने ‘ब्लैक फ्राइडे’ फिल्म का साउंडट्रैक तैयार करने के साथ ‘पीपली लाइव’ और ‘मसान’ जैसी फिल्मों में भी संगीत योगदान दिया है। उसका संगीत भारतीय लोक परंपराओं, सूफी संगीत, शास्त्रीय रागों और आधुनिक रॉक का अनूठा मिश्रण है। विरासत महोत्सव में बैंड की प्रस्तुति ने एक बार फिर भारतीय संगीत की विविधता और आधुनिकता के खूबसूरत संगम को जीवंत कर दिया।

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