चिप्स टू स्टार्ट-अप कार्यक्रम उद्यमियों को स्वदेशी चिप डिज़ाइन और नवाचार में योगदान देने में सक्षम बनाएगा
Delhi, 18 January 2026
भारत अपने सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम को आर्थिक विकास, तकनीकी क्षमता और राष्ट्रीय लचीलेपन के रणनीतिक स्तंभ के रूप में मजबूत कर रहा है। उन्नत इलेक्ट्रॉनिक्स और एआई-संचालित अनुप्रयोगों की वैश्विक मांग में लगातार वृद्धि होने के कारण 2030 तक सेमीकंडक्टर उद्योग के लगभग 1 ट्रिलियन डॉलर तक पहुँचने की संभावना है। वर्तमान में, वैश्विक सेमीकंडक्टर कार्यबल में सेमीकंडक्टर प्रतिभा का अभाव है, जिसके परिणामस्वरूप 2032 तक 1 मिलियन अतिरिक्त कुशल पेशेवरों की आवश्यकता होगी। विशेष रूप से लक्षित पहलों के माध्यम से यह भारत को वैश्विक सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम में महत्वपूर्ण योगदानकर्ता के रूप में स्थापित करता है।
चिप डिज़ाइन को महत्वपूर्ण राष्ट्रीय प्राथमिकता स्वीकार करते हुए, इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (एमईआईटीवाई) ने भारत के सेमीकंडक्टर डिज़ाइन परिदृश्य को बदलने की दिशा में सक्रिय कदम उठाए हैं। ये पहल लगभग 400 संगठनों तक फैली हैं, जिनमें चिप्स टू स्टार्ट-अप (सी2एस) कार्यक्रम के अंतर्गत 305 शैक्षणिक संस्थान और डिज़ाइन लिंक्ड इंसेंटिव (डीएलआई) योजना के अंतर्गत 95 स्टार्टअप्स शामिल हैं।
1 लाख से अधिक व्यक्तियों ने चिप डिज़ाइन प्रशिक्षण के लिए नामांकन किया है, जिनमें से अब तक लगभग 67,000 प्रशिक्षित हो चुके हैं।
चिपइन सेंटर ने उद्योग भागीदारों के सहयोग से 6 साझा वेफर रन और 265+ प्रशिक्षण सत्र आयोजित किए हैं। सेमी-कंडक्टर लेबोरेटरी (एससीएल) ने बड़े पैमाने पर व्यावहारिक चिप डिज़ाइन को सक्षम बनाया है,जिनमें 46 संस्थानों से 122 प्रस्तुतियां प्राप्त हुईं। इनमें विद्यार्थियों द्वारा डिज़ाइन 56 चिप्स शामिल थे, जिन्हें सफलतापूर्वक निर्मित, पैक और डिलिवर किया गया। प्रतिभागी संस्थानों ने 75+ पेटेंट दाखिल किए और उनके द्वारा 500+ आईपी कोर, एएसआईसी और एसओसी डिज़ाइन विकसित किए जा रहे हैं।
सेमीकंडक्टर्स नवाचार, आर्थिक विकास और राष्ट्रीय सुरक्षा के रणनीतिक आधार के रूप में उभरे हैं। सेमीकंडक्टर डिज़ाइन और प्रतिभा विकास में नेतृत्व वैश्विक तकनीकी प्रतिस्पर्धात्मकता में दिन-प्रतिदिन बेहद महत्वपूर्ण होता जा रहा है।इसे स्वीकार करते हुए, भारत अपने शैक्षणिक और नवाचार इकोसिस्टम को भविष्य की सेमीकंडक्टर तकनीकों के निर्माण में निर्णायक भूमिका निभाने के लिए तैयार कर रहा है ।
चिप्स टू स्टार्ट-अप (सी2एस) कार्यक्रम मजबूत और आत्मनिर्भर सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम बनाने की भारत की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। बड़े पैमाने पर कौशल विकास, व्यवहारिक डिज़ाइन अनुभव, और राष्ट्रीय अवसंरचना तक पहुँच सक्षम करके, यह कार्यक्रम विद्यार्थियों, शोधकर्ताओं, स्टार्टअप्स और उद्यमियों को स्वदेशी चिप डिज़ाइन और नवाचार में योगदान देने में सक्षम बना रहा है। ये प्रयास भारत के प्रतिभा आधार को मजबूत कर रहे हैं, तकनीकी आत्मनिर्भरता में सहायता दे रहे हैं, और वैश्विक रूप से प्रतिस्पर्धी सेमीकंडक्टर डिज़ाइन और विकास केंद्र बनने की दिशा में देश की यात्रा को आगे बढ़ा रहे हैं।
