September 17, 2026

मृत्यु के बाद भी रोशनी बांट रहे नेत्रदाता, एम्स ऋषिकेश में दाता परिवारों का सम्मान

Eye donors

अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) ऋषिकेश के नेत्र रोग विज्ञान विभाग एवं ऋषिकेश आई बैंक की ओर से 41वें नेत्रदान पखवाड़े के तहत नेत्रदाता परिवारों के सम्मान में समारोह आयोजित किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य नेत्रदान करने वाले दाता परिवारों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने के साथ ही समाज में नेत्रदान के प्रति जागरूकता और सकारात्मक सोच को बढ़ावा देना रहा।

इस वर्ष नेत्रदान पखवाड़े की थीम “Vision Beyond Life – The Ultimate Legacy” रखी गई है। समारोह के माध्यम से संदेश दिया गया कि मृत्यु के बाद किया गया नेत्रदान किसी जरूरतमंद के जीवन में दृष्टि और आशा की नई रोशनी ला सकता है।

संस्थान की कार्यकारी निदेशक एवं सीईओ प्रोफेसर (डॉ.) मीनू सिंह के मार्गदर्शन में मिनी ऑडिटोरियम में आयोजित कार्यक्रम का शुभारंभ संकायाध्यक्ष अकादमिक प्रोफेसर डॉ. सौरभ वार्ष्णेय, चिकित्सा अधीक्षक प्रोफेसर डॉ. पुनीत धमीजा, नेत्र रोग विज्ञान विभागाध्यक्ष प्रोफेसर डॉ. संजीव कुमार मित्तल, प्रो. अजय अग्रवाल, उपनिदेशक प्रशासन ले. कर्नल गोपाल मेहरा, ऋषिकेश आई बैंक की मेडिकल डायरेक्टर डॉ. नीति गुप्ता, गैस्ट्रोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. रोहित गुप्ता, प्रो. मीनाक्षी धर, डॉ. अनुपम सिंह, डॉ. रामानुज सामंता एवं डॉ. सास्वत शेखर ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलित कर किया।

समारोह में एम्स के विभिन्न विभागों के फैकल्टी सदस्य, चिकित्सक, वरिष्ठ अधिकारी, मुख्य नर्सिंग अधिकारी डॉ. अनिता रानी कंसल सहित सामाजिक एवं स्वयंसेवी संस्थाओं के प्रतिनिधि मौजूद रहे। नेत्र विज्ञान विभाग के कॉर्निया रेजीडेंट डॉ. अंकुर उपाध्याय के संचालन में आयोजित कार्यक्रम में लॉयंस क्लब ऋषिकेश, सुप्रयास कल्याण संस्थान हरिद्वार, देह दान समिति हरिद्वार और मुस्कान फाउंडेशन ट्रस्ट हरिद्वार के प्रतिनिधियों ने भी सहभागिता की।

दाता परिवारों के योगदान को सराहा

कार्यक्रम में नेत्रदान के माध्यम से मानवता की सेवा करने वाले दाता परिवारों को सम्मानित किया गया। विभागाध्यक्ष प्रो. संजीव मित्तल ने कहा कि नेत्रदाता परिवारों का योगदान समाज के लिए अमूल्य है। उन्होंने नेत्रदान से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां साझा करते हुए लोगों से मृत्यु के बाद नेत्रदान का संकल्प लेने और इस जनहितकारी पहल को आगे बढ़ाने का आह्वान किया।

उन्होंने बताया कि ऋषिकेश आई बैंक की ओर से नेत्रदान को लेकर लगातार जनजागरूकता एवं सेवा गतिविधियां संचालित की जा रही हैं। नेत्रदान से प्राप्त कॉर्निया का उपयोग कॉर्नियल अंधत्व से प्रभावित जरूरतमंद मरीजों की दृष्टि बहाल करने के लिए किया जाता है।

आई बैंक में अब तक मिले 1338 कॉर्निया

आई बैंक के प्रबंधक महिपाल चौहान ने बताया कि ऋषिकेश आई बैंक के नेत्र कोष में अब तक 1338 कॉर्निया प्राप्त हुए हैं। इनमें से 655 कॉर्निया एम्स ऋषिकेश में जरूरतमंद मरीजों को प्रत्यारोपित किए जा चुके हैं, जबकि 326 कॉर्निया अन्य चिकित्सा संस्थानों एवं नेत्र चिकित्सकों को ट्रांसप्लांट के लिए वितरित किए गए हैं।

कार्यक्रम के माध्यम से लोगों को संदेश दिया गया कि नेत्रदान केवल दृष्टि का दान नहीं, बल्कि मानवता, संवेदना और जीवन के प्रति एक महान योगदान है। एक व्यक्ति का नेत्रदान किसी दूसरे व्यक्ति के जीवन में रोशनी लौटाने के साथ उसके भविष्य को नई दिशा दे सकता है।

कार्यक्रम के आयोजन, नेत्रदान जनजागरूकता गतिविधियों और दाता परिवारों के सम्मान में आई बैंक टीम की बिन्दिया भाटिया, संदीप गुसाईं, आलोक सिंह, पवन सिंह सहित काउंसलर-कम-टेक्नीशियन एवं तकनीकी टीम ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

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