कॉर्बेट से राजाजी शिफ्ट होंगे पांच और बाघ, दूसरे चरण की तैयारी शुरू
कॉर्बेट नेशनल पार्क से राजाजी टाइगर रिजर्व में बाघों की शिफ्टिंग का दूसरा चरण जल्द शुरू होने जा रहा है। नेशनल टाइगर कंजर्वेशन अथॉरिटी (NTCA) और भारत सरकार से अनुमति मिलने के बाद कॉर्बेट प्रशासन ने इसकी तैयारियां शुरू कर दी हैं। दूसरे चरण में एक मेल और चार फीमेल समेत कुल पांच बाघों को कॉर्बेट से राजाजी टाइगर रिजर्व के वेस्टर्न जोन में स्थानांतरित किया जाएगा।
बाघों के स्थानांतरण की इस योजना का उद्देश्य राजाजी टाइगर रिजर्व में बाघों की संख्या और उनके भौगोलिक वितरण को बेहतर करना है। इसके साथ ही कॉर्बेट के उन क्षेत्रों में मानव-वन्यजीव संघर्ष की संभावित परिस्थितियों को कम करने की कोशिश की जा रही है, जहां आबादी के आसपास बाघों की मौजूदगी भविष्य में चुनौती बन सकती है।
पहले चरण में पांच बाघ भेजे गए थे
इससे पहले स्थानांतरण के पहले चरण में कॉर्बेट नेशनल पार्क से दो मेल और तीन फीमेल समेत पांच बाघों को राजाजी टाइगर रिजर्व के ईस्टर्न जोन में भेजा गया था। अब दूसरे चरण में पांच और बाघों को राजाजी के वेस्टर्न जोन में शिफ्ट करने की तैयारी है।
कॉर्बेट नेशनल पार्क के निदेशक डॉ. साकेत बडोला ने बताया कि दूसरे चरण के लिए NTCA और भारत सरकार से अनुमति मिल चुकी है। इसके बाद कॉर्बेट प्रशासन ऐसे क्षेत्रों का आकलन कर रहा है, जहां आबादी के आसपास बाघों की मौजूदगी के कारण भविष्य में मानव-वन्यजीव संघर्ष का खतरा पैदा हो सकता है।
वैज्ञानिक मानकों पर होगा बाघों का चयन
डॉ. बडोला के मुताबिक बाघों का चयन केवल स्थानांतरण के उद्देश्य से नहीं किया जाएगा, बल्कि बाघों की पहचान करते समय संबंधित क्षेत्रों में मानव-वन्यजीव संघर्ष की संभावनाओं को भी ध्यान में रखा जाएगा। प्रशासन अलग-अलग क्षेत्रों का आकलन कर ऐसे बाघों को चिन्हित करेगा, जिनका स्थानांतरण वैज्ञानिक और प्रबंधन संबंधी मानकों के अनुरूप हो।
इस प्रक्रिया से जहां राजाजी टाइगर रिजर्व में बाघों की संख्या और वितरण को बेहतर करने में मदद मिलेगी, वहीं कॉर्बेट के संवेदनशील क्षेत्रों में संभावित मानव-वन्यजीव संघर्ष की गंभीरता को कम करने में भी सहायता मिल सकती है।
ट्रैंकुलाइज कर लगाए जाएंगे रेडियो कॉलर
संभावित बाघों की पहचान के बाद विशेषज्ञ टीम उन्हें ट्रैंकुलाइज करेगी। इसके बाद बाघों की आवश्यक स्वास्थ्य जांच और अन्य प्रक्रियाएं पूरी की जाएंगी। प्रत्येक चयनित बाघ को रेडियो कॉलर लगाया जाएगा, जिसके बाद उन्हें सुरक्षित तरीके से राजाजी टाइगर रिजर्व पहुंचाया जाएगा।
राजाजी पहुंचने के बाद बाघों को तत्काल जंगल में नहीं छोड़ा जाएगा। उन्हें करीब तीन से चार दिन तक बाड़े में रखा जाएगा, ताकि वे नए वातावरण और परिवेश के अनुकूल हो सकें। इसके बाद सॉफ्ट रिलीज के तहत उन्हें जंगल में छोड़ा जाएगा।
तीन महीने तक होगी निगरानी
बाघों को जंगल में छोड़ने के बाद भी उनकी निगरानी जारी रहेगी। रेडियो कॉलर के माध्यम से करीब तीन महीने तक उनकी मॉनिटरिंग की जाएगी। इस दौरान बाघों की गतिविधियों, मूवमेंट और नए क्षेत्र में उनके अनुकूलन पर लगातार नजर रखी जाएगी।
कॉर्बेट प्रशासन के सामने फिलहाल सबसे बड़ी चुनौती ऐसे बाघों की पहचान करना है, जिनका चयन वैज्ञानिक, वन्यजीव संरक्षण और प्रबंधन संबंधी मानकों के आधार पर किया जा सके। इसके लिए अलग-अलग क्षेत्रों का आकलन किया जा रहा है।
डॉ. साकेत बडोला के अनुसार, कॉर्बेट से राजाजी बाघों का दूसरा चरण केवल बाघों के संरक्षण और उनके बेहतर वितरण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम नहीं है, बल्कि भविष्य में मानव-वन्यजीव संघर्ष की संभावित परिस्थितियों को नियंत्रित करने की रणनीति का भी हिस्सा है।
डॉ साकेत बडोला
निदेशक
कॉर्बेट नेशनल पार्क
