ईरान ने अपने न्यूक्लियर प्रोग्राम पर समझौते का रास्ता खोल: मिडिल ईस्ट में बने शांति के आसार,
Delhi 15 February 2026,
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को चेतावनी दी है कि अगर ईरान के न्यूक्लियर इरादों को रोकने के लिए कोई डील नहीं हो पाती है, तो अमेरिका इस इलाके में अपनी मिलिट्री मौजूदगी बढ़ा रहा है। जिससे हमले हो सकते हैं। ईरान ने अपने न्यूक्लियर प्रोग्राम पर समझौते का रास्ता खोल दिया है। यह कहते हुए कि वह अमेरिका के साथ डील की ओर बढ़ने के लिए तैयार है लेकिन तभी जब वॉशिंगटन बैन हटाने के लिए तैयार हो। यह एक हाई-स्टेक डिप्लोमैटिक पल है जिस पर मिलिट्री खतरे और इलाके का तनाव छाया हुआ है। ईरान की यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब अमेरिका के अधिकारी लगातार यह तर्क दे रहे हैं कि ईरान लंबे समय से चल रही बातचीत को बढ़ाने में देरी कर रहा है। शनिवार को अमेरिकी सेक्रेटरी ऑफ स्टेट मार्को रुबियो ने कहा कि प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप एक डील चाहते हैं लेकिन ईरान के साथ ऐसा करना बहुत मुश्किल है।

वहीं ईरान के उप विदेश मंत्री माजिद तख्त-रवांची ने कहा कि गेंद ‘यह साबित करने के लिए अमेरिका के पाले में है कि वे डील करना चाहते हैं’ उन्होंने कहा, ‘अगर वे ईमानदार हैं, तो मुझे यकीन है कि हम एक समझौते की राह पर होंगे और कहा कि अगर बैन में राहत की भी बात हो तो तेहरान अपने न्यूक्लियर प्रोग्राम की सीमाओं पर चर्चा करने को तैयार है।
अमेरिका और ईरान ने फरवरी की शुरुआत में ओमान में इनडायरेक्ट बातचीत की थी। तख्त-रवांची ने बताया कि, मंगलवार को जिनेवा में दूसरी बैठक होने वाली है।
ईरान ने क्या दिया संकेत?
तेहरान ने सबूत के तौर पर अपने 60 प्रतिशत समृद्ध यूरेनियम के स्टॉक को कम करने के अपने ऑफर की ओर इशारा किया है। उप विदेश मंत्री माजिद तख्त-रवांची तख्त-रवांची ने कहा, ‘अगर वे सैंक्शन पर बात करने को तैयार हैं, तो हम इस और हमारे प्रोग्राम से जुड़े दूसरे मुद्दों पर बात करने को तैयार हैं। उन्होंने यह बताने से मना कर दिया कि ईरान सभी सैंक्शन हटाने पर जोर देगा या थोड़ी राहत मानेगा।
ईरान चाहता है कि बातचीत सिर्फ न्यूक्लियर मुद्दों तक ही सीमित रहे। उसने जीरो एनरिचमेंट की अमेरिकी मांग को खारिज कर दिया है। ईरान ने अपने बैलिस्टिक मिसाइल प्रोग्राम पर भी बात करने से मना कर दिया है। उसने चेतावनी दी है कि युद्ध का असर पूरे इलाके पर पड़ेगा और अमेरिका बेस को भी निशाना बनाया जाएगा.श।
जर्मनी में वैश्विक नेताओं की एक अहम बैठक के बीच शनिवार को ईरान सरकार के खिलाफ अब तक के सबसे बड़े प्रदर्शनों में से एक देखने को मिला। पुलिस के अनुसार, म्यूनिख में करीब 2.5 लाख लोग सड़कों पर उतरे और ईरान में सत्ता परिवर्तन की मांग की।
निर्वासन में रह रहे ईरान के युवराज रेजा पहलवी ने तेहरान पर अंतरराष्ट्रीय दबाव बढ़ाने की अपील की। यह रैली पहलवी द्वारा घोषित ‘ग्लोबल डे ऑफ एक्शन’ का हिस्सा थी, जिसका उद्देश्य ईरान में चल रहे विरोध प्रदर्शनों के समर्थन में वैश्विक एकजुटता दिखाना था।
