द्वारका शारदा पीठ के जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी सदानंद सरस्वती महाराज ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का समर्थन कियाद्वारका शारदा पीठ के जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी सदानंद सरस्वती महाराज ने स्वामी
- Prayagraj 27 January 2026,
प्रयागराज माघ मेले में 18 जनवरी को मौनी अमावस्या के मौके पर ज्योतिष्पीठ के जगद्गुुुरू शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को पालकी में स्नान के लिए जाते हुए पुलिस ने उन्हें रोकते हुए पैदल जाने को कहा। जिससे पुलिस और उनके शिष्यों के बीच धक्का-मुक्की हुई। बताया गया है कि पुलिस ने इन सिस्टम के साथ मारपीट की है। इस घटना से नाराज़ होकर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने विरोध स्वरूप अपने शिविर के बाहर धरने पर बैठ गए। वहीं प्रशासन ने अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती से शंकराचार्य की पदवी के प्रयोग को लेकर तथा मौनी अमावस्या के दौरान उत्पन्न विवाद को लेकर जवाब तलब किया है। जिससे अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और मेला प्रशासन के बीच विवाद गहराया गया। इसके साथ ही अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती पक्ष और विपक्ष में बयान बाजी शुरू हो गई।
मेला प्रशासन के बीच विवाद में द्वारका शारदा पीठ के जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी सदानंद सरस्वती महाराज ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का समर्थन किया
है। स्वामी सदानंद सरस्वती ने कहा, शंकराचार्य की नियुक्ति शास्त्रोक्त उत्तराधिकार परंपरा से होती है। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद उनके गुरु भाई हैं और शृंगेरी पीठ के शंकराचार्य द्वारा उनका अभिषेक किया गया है, जो उनकी वैधता को पुख्ता करता है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासन असली शंकराचार्यों के महत्व को कम करने के लिए नकली संतों को बढ़ावा दे रहा है, जो सनातन परंपरा के लिए घातक है।
भाजपा नेता नेता उमा भारती ने अविमुक्तेश्वरानंद की शंकराचार्य की उपाधि को लेकर हो रहे विवाद पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि शंकराचार्य होने का सबूत मांगकर प्रशासन ने अपनी मर्यादाओं और अधिकारों का उल्लंघन किया है।मुझे विश्वास है कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद जी महाराज एवं उत्तर प्रदेश सरकार के बीच कोई सकारात्मक समाधान निकल आएगा किंतु प्रशासनिक अधिकारियों के द्वारा शंकराचार्य होने का सबूत मांगना, यह प्रशासन ने अपनी मर्यादाओं एवं अधिकारों का उल्लंघन किया है, यह अधिकार तो सिर्फ शंकराचार्यों का एवं विद्वत परिषद का है।
बरेली में सिटी मजिस्ट्रेट के पद पर तैनात अलंकार अग्निहोत्री ने अपने पद से त्यागपत्र देकर सबको चौंका दिया था। अलंकार अग्निहोत्री ने आरोप लगाया है कि माघ मेले में शंकराचार्य और उनके ब्राह्मण बटुकों के साथ अन्याय हुआ है। इसके साथ ही उन्होंने यूजीसी के नए एक्ट और यूपी सरकार की नीतियों पर ‘ब्राह्मण विरोधी’ होने का गंभीर आरोप लगाया है। हालांकि, शासन ने इस कदम के बाद देर रात उन्हें निलंबित करते हुए जांच के आदेश भी जारी कर दिए हैं। शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने फोन पर अलंकार से बात की। शंकराचार्य ने मिश्रित प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि अलंकार अग्निहोत्री के इस्तीफे की खबर सुनकर मन में दो तरह के भाव आ रहे हैं। एक ओर यह जानकर दुख है कि वर्षों की मेहनत और लगन से जो पद हासिल किया था, वह एक झटके में चला गया। लेकिन दूसरी तरफ, सनातन धर्म और इसके प्रतीकों के प्रति आपकी अटूट निष्ठा को देखकर पूरा सनातनी समाज गौरवान्वित महसूस कर रहा है।
अविमुक्तेश्वरानंद के साथ हुए दुर्व्यवहार पर जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने कहा कि यह मामला शंकराचार्य और सरकार के बीच का है। हालांकि उन्होंने यह भी जोड़ा कि शास्त्रों के विरुद्ध रथ में बैठकर स्नान करने जाना उचित नहीं था। उनके अनुसार, शास्त्र-विधि के विपरीत आचरण करने से सुख, शांति और गति नहीं मिलती।
प्रशासन का तर्क: मेला प्रशासन का कहना है कि भारी भीड़ और सुरक्षा कारणों से संगम नोज तक वाहनों या पालकी ले जाने की अनुमति नहीं थी। उन्होंने शंकराचार्य से पैदल जाने का अनुरोध किया था।
शंकराचार्य का आरोप: स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का आरोप है कि पुलिस ने उनके ‘बाल बटुकों’ (शिष्यों) के साथ मारपीट की, उनकी शिखा (चोटी) खींची और उन्हें अपमानित किया। उन्होंने इसे सनातन परंपरा और ब्राह्मण अस्मिता पर हमला करार दिया है।
