February 5, 2026

मसूरी में स्कूल के स्वीमिंग पुल में डूबकर छात्र की मौत से उठे सवाल, बाल आयोग ने दिए जांच के आदेश

मसूरी के वाइनबर्ग एलन स्कूल के स्वीमिंग पुल में छात्र की डूबने से मौत मामले पर उत्तराखंड बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने गंभीर सवाल उठाए हैं। आयोग ने घटना पर संज्ञान लेकर देहरादून के जिला अधिकारी, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक, मुख्य चिकित्सा व शिक्षा अधिकारी को गहन जांच के आदेश दिए हैं।

आयोग की अध्यक्ष डॉ. गीता खन्ना ने देहरादून के मुख्य चिकित्सा अधिकारी को एक विशेष मेडिकल टीम गठित करने का भी निर्देश दिया है। ये टीम स्कूल के अंदर बच्चे के डूबने का कारण, सुरक्षा कर्मी, लाइफ गार्ड्स की तैनाती व हादसे के बाद प्राथमिक उपचार के इंतजामों की जांच करेगी। साथ ही बच्चे को जिस अस्पताल में ले जाया गया, वहां ऑक्सीजन की उपलब्धता, लाइफ सपोर्ट और सीपीआर देने की क्षमता का भी आकलन किया जाएगा। आयोग ने सभी प्रमुख अधिकारियों से विस्तृत जांच रिपोर्ट मांगी है।

15 मार्च को छुट्टी के बावजूद क्यों खुला स्कूल
आयोग ने कहा कि जांच में यह तथ्य भी शामिल किया जाए कि 15 तारीख को पर्वतीय होली पर सार्वजनिक अवकाश के बावजूद स्कूल क्यों खुला था। तब स्कूल बंद कराने के लिए सरकारी अधिकारियों को हस्तक्षेप क्यों करना पड़ा था।

सवाल उठे
– स्कूल में सुरक्षा मानकों का पालन क्यों नहीं किया गया।
– क्या स्कूल में पर्याप्त प्रशिक्षित लाइफ गार्ड्स और सुरक्षा कर्मी मौजूद थे।
– क्या स्कूल में बच्चे को समय पर प्रशिक्षित कर्मचारियों की ओर से सीपीआर दिया गया।
– मुख्यमंत्री के आदेश के बावजूद 15 मार्च को स्कूल क्यों खुला।
– अस्पताल में बच्चे को समय पर उचित उपचार मिल पाया।
पूर्व की घटनाओं से सबक नहीं लिया : डॉ. खन्ना
पहले भी पाया गया है कि स्कूलों में बच्चों के प्राथमिक उपचार के जो उपकरण और साधन होने चाहिए, उनका समुचित इंतजाम नहीं होता। यह घटना पिछले साल हल्द्वानी के एक स्कूल के छात्र की बरेली के एक पार्क में डूबने से हुई मौत की याद दिलाती है। उस घटना के बाद आयोग ने शिक्षा और पर्यटन विभागों को यह सुनिश्चित करने के लिए कहा था कि सभी एडवेंचर स्पोर्ट्स पार्क और स्कूलों में कम से कम 30% कर्मचारियों को सीपीआर का प्रशिक्षण दिया जाए, ताकि दुर्घटना की स्थिति में वे तत्काल उपचार प्रदान कर सकें। जिस स्कूल में बच्चे की मौत हुई, उसमें निर्देशों का पालन किया गया या नहीं, यह जांच का विषय है।
-डॉ. गीता खन्ना, अध्यक्ष, उत्तराखंड बाल अधिकार संरक्षण आयोग

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