कर्तव्य पथ पर 77वें गणतंत्र दिवस परेड में बैटल एरे की दुर्लभ झलक देखने को मिली,
Delhi 26 January 2026,
कर्तव्य पथ पर भारतीय सेना ने 77वें गणतंत्र दिवस के मौके पर यहां आयोजित समारोह के दौरान जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में आतंकवादी हमले के गुनाहगारों के खिलाफ पाकिस्तान में बैठे आतंकवादियों के खिलाफ चलाए गये ऑपरेशन सिंदूर की सफलता का जश्न मनाया। इसके अंतर्गत सेना के जवान पहली बार बैटल एरे फार्मेशन में दिखाई दिये। इस दौरान आए हुए दर्शकों को आधुनिक युद्धक्षेत्र में एकीकृत,नेटवर्क-सक्षम और अत्याधुनिक प्रौद्योगिकी से लैस बल के रूप में सेना की तैनाती और युद्ध प्रणाली की दुर्लभ झलक देखने को मिली। जिसने सुदर्शन चक्र के सुरक्षा कवच के अंतर्गत संयुक्त योजना, सटीक लक्ष्य निर्धारण और वायु रक्षा को दर्शाया, तथा यह बताया कि आधुनिक युद्धों की योजना कैसे तैयार की जाती है और क्रियान्वयन वास्तविक समय में कैसे किया जाता है।
बैटल एरे’ में टी-90 भीष्म और अर्जुन मुख्य युद्धक टैंक, बीएमपी-ढ्ढढ्ढ सारथ और नामिस-ढ्ढढ्ढ मिसाइल सिस्टम, एएलएच ध्रुव, रुद्र, अपाचे एएच-64ई और एलसीएच प्रचंड सहित विमानन संसाधन, एटैग्स, धनुष, सूर्यास्त्र, ब्रह्मोस सहित लंबी दूरी का तोपखाना तथा मिसाइल प्रणालियां और आकाश तथा मध्यम दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल एम आर सैम वायु रक्षा प्रणालियां शामिल थीं। इसके अलावा इनमें भैरव बटालियन, शक्तिबाण रेजिमेंट और दिव्यास्त्र बैटरी, एडवांस्ड टोइड आर्टिलरी गन सिस्टम- 155 मिमी, लंबी दूरी की प्रहार क्षमता वाला यूनिवर्सल रॉकेट लॉन्चर सिस्टम, मानव रहित जमीनी वाहन, रोबोटिक डॉग, ड्रोन और लोइटरिंग म्यूनिशन से सुसज्जित युद्धक प्लेटफॉर्म और विशेष रूप से प्रशिक्षित बैक्ट्रियन ऊँट, जांस्कर टट्टू, शिकारी पक्षी और स्वान शामिल हुए।
गणतंत्र दिवस परेड में सेना की छह मार्चिंग टुकड़यिों ने हिस्सा लिया जिनमें संचालन भूमिका में मिश्रित स्काउट टुकड़ी, राजपूत रेजिमेंट, असम रेजिमेंट, जम्मू एवं कश्मीर लाइट इन्फैंट्री रेजिमेंट, रेजिमेंट ऑफ आर्टिलरी और भैरव बटालियन टुकड़ी शामिल थीं। इनके साथ नौसेना, वायुसेना, केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों और दिल्ली पुलिस की टुकड़यिां भी शामिल हुईं। इस साल परेड में कुल 6,065 सैनिक शामिल हुए और इसका नेतृत्व लेफ्टिनेंट जनरल भवनीश कुमार ने किया। परेड में 12 सैन्य बैंड और आठ पाइप बैंड भी शामिल हुए।
कर्तव्य पथ से 77वें गणतंत्र दिवस परेड में आयुष मंत्रालय की झांकी को प्रदर्शित किया गया, जिसमे भारत की एकीकृत पारंपरिक चिकित्सा प्रणाली को आधुनिक तकनीक के साथ जोड़कर व्यापक रूप से प्रस्तुत किया गया । आयुष मंत्रालय की राष्ट्रीय आयुष मिशन (एनएएम) योजना के नेतृत्व में झांकी की अवधारणा, “आयुष का तंत्र, स्वास्थ्य का मंत्र” विषय पर आधारित थी, जो आत्मनिर्भर भारत और जन-केंद्रित विकास के वृहद राष्ट्रीय दृष्टिकोण के साथ श्रेणीबद्ध थी।
सूचना एवं प्रकाशन मंत्रालय की झांकी, जिसका शीर्षक “भारत गाथा: श्रुति, कृति, दृष्टि” है, इसने भारत की समृद्ध कथा-कहानी परंपरा को प्रदर्शित किया। यह प्राचीन मौखिक परंपराओं से समकालीन मीडिया और सिनेमा तक की यात्रा को दर्शाती है, जो राष्ट्र की सांस्कृतिक विकास और वैश्विक सामग्री शक्ति के रूप में उभरने को प्रतिबिंबित करती है।झांकी ने वेव्स को वैश्विक मंच के रूप में भी रेखांकित किया, जो भारत के मीडिया और मनोरंजन नेतृत्व, नवाचार और सांस्कृतिक कूटनीति को बढ़ावा देता है।

पंचायती राज मंत्रालय की “स्वामित्व” योजना: आत्मनिर्भर पंचायत से समृद्ध एवं आत्मनिर्भर भारत” विषय पर आधारित झांकी भी शामिल थी। झांकी में इस बात पर बल दिया गया कि कैसे ग्रामीण आवासीय संपत्तियों का कानूनी स्वामित्व नागरिकों को सशक्त बनाता है और पंचायतों को मजबूत करता है। अब तक, स्वामित्व योजना ने 1 लाख 84 हज़ार से अधिक गांवों में लगभग तीन करोड़ प्रॉपर्टी कार्ड जारी करने में सहायता की है। इससे भूमि विवाद कम हुए हैं और नियोजित ग्रामीण विकास को समर्थन मिला है।
