प्रदूषण में वास्तविक कमी लाने के लिए तात्कालिक नहीं, बल्कि व्यापक और लॉन्ग टर्म प्लानिंग की जरूरत है: सुप्रीम कोर्ट,
Delhi 17 December 2025
सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली-एनसीआर में लगातार बढ़ते वायु प्रदूषण के मामले में सख्त मौखिक टिप्पणी की है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा, अब तक प्रदूषण पर काबू पाने के लिए जो भी कदम उठाए गए हैं, वे पूरी तरह नाकाम साबित हुए हैं। प्रदूषण में वास्तविक कमी लाने के लिए तात्कालिक नहीं, बल्कि व्यापक और लॉन्ग टर्म प्लानिंग की जरूरत है।
सुनवाई के दौरान वकीलों पर तंज कहते हुए मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि ऐसे मामलों में एक्सपर्ट से सलाह कम मिलती है और वकील ही एक्सपर्ट बन जाते हैं? बच्चों की सेहत को लेकर दाखिल याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान कोर्ट ने दिल्ली सरकार के स्कूल बंद करने और हाइब्रिड मॉडल की व्यवस्था को अस्थायी नीति बताया। कोर्ट ने इस मामले में दखल देने से इनकार करते हुए कहा कि शॉर्ट टर्म उपाय बच्चों और बुजुर्गों को अस्थायी सुरक्षा देने के लिए हैं। इन्हें सर्दियों की छुट्टियों का ही विस्तार माना जा सकता है। इस मामले में अगली सुनवाई 6 जनवरी 2026 को नियत की गई है।
मुख्य न्यायाधीश ने एमसीडी को कड़ी नसीहत दी है. उन्होंने कहा कि 31 दिसंबर तक टोल प्लाजा पर कोई शुल्क नहीं लेना चाहिए. इससे गाड़ियों से होने वाला प्रदूषण कम होगा. कोर्ट ने सख्त सवाल पूछा कि क्या आप पैसों के लिए कल से सीपी के अंदर भी टोल प्लाजा बनाना शुरू कर देंगे. अधिकारी यह घोषणा क्यों नहीं कर सकते कि जनवरी तक कोई टोल प्लाजा नहीं होगा। कोर्ट ने वकील पिंकी आनंद से भी कहा कि नेशनल हाइवे पर टोल प्लाजा 50 किलोमीटर की दूरी पर होने चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट ने संकेत दिया कि प्रदूषण जैसी स्थितियों में बच्चों की सेहत और प्रशासनिक आकलन को प्राथमिकता दी जानी चाहिए और ऐसे मामलों में अंतिम फैसला सरकार और विशेषज्ञों पर छोड़ा जाना चाहिए। मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि पूरी समस्या को खत्म करने और सही माहौल बनाने के लिए हमें लॉन्ग टर्म सॉल्यूशन के बारे में सोचना होगा। स्कूल जाने वाले छोटे बच्चे, पार्क में जाने वाले सीनियर सिटीजन, सबकी यही समस्या है।
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा, हमारे सामने दो बिल्कुल विपरीत तरह की याचिकाएं हैं. एक ओर समृद्ध वर्ग के लोग स्कूलों और स्कूलों में खेल गतिविधियों को पूरी तरह बंद करने की मांग कर रहे हैं, जबकि दूसरी ओर कुछ लोग स्कूल खोलने की मांग कर रहे हैं.यह पूरी तरह नीति का विषय है, अदालत इसमें क्यों हस्तक्षेप करे?
केंद्र सरकार की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने अदालत को बताया कि दिल्ली सरकार ने हाइब्रिड मॉडल अपनाया है. उन्होंने कहा कि केंद्र यह सुझाव दे सकता है कि नर्सरी से कक्षा 5 तक समेत सभी कक्षाओं के लिए हाइब्रिड मॉडल की सुविधा उपलब्ध कराई जाए।अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ने यह भी स्पष्ट किया कि बच्चों के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए स्कूल बंद किए गए हैं.जिस तरह की गंभीर प्रदूषण की स्थिति फिलहाल देखने को मिल रही है. उसको देखते हुए नर्सरी से कक्षा 5 तक के बच्चों के लिए स्कूल बंद रखने का निर्णय लिया गया।
