उत्तरकाशी में मत्स्य और पशुपालन योजनाओं की समीक्षा, बद्री गाय के संरक्षण पर कार्ययोजना बनाने के निर्देश
उत्तरकाशी। जिलाधिकारी प्रशांत आर्य ने मत्स्य एवं पशुपालन विभाग की समीक्षा बैठक लेते हुए केंद्र पोषित योजनाओं, राज्य सेक्टर और जिला योजना के तहत संचालित योजनाओं की प्रगति की समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को योजनाओं का लाभ अधिक से अधिक पात्र लोगों तक पहुंचाने और प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
मत्स्य पालन को बढ़ावा देने पर जोर
मत्स्य विभाग की योजनाओं की समीक्षा करते हुए जिलाधिकारी ने योजनाओं की पहुंच बढ़ाने और नए पात्र लोगों को लाभान्वित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि विभागीय योजनाओं का व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाए, ताकि पात्र लोगों तक योजनाओं की जानकारी पहुंच सके और अधिक से अधिक लोग इसका लाभ उठा सकें।
उन्होंने विभिन्न योजनाओं में लाभार्थियों की पुनरावृत्ति का नियमित परीक्षण करने के साथ ही योजनाओं का मूल्यांकन केवल लक्ष्यपूर्ति के आधार पर नहीं, बल्कि उनकी वास्तविक सफलता और प्रभाव के आधार पर करने को कहा।
जिलाधिकारी ने राज्य सेक्टर की योजनाओं को जिला योजना के माध्यम से भी आगे बढ़ाने तथा जनपद में कार्प और ट्राउट मछली के उत्पादन को प्रोत्साहित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि योजनाओं का उद्देश्य अधिकतम लोगों को लाभ पहुंचाने के साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार और आय के अवसर बढ़ाना होना चाहिए।
बद्री गाय के संरक्षण और संवर्धन पर फोकस
पशुपालन विभाग की समीक्षा के दौरान जिलाधिकारी ने संचालित योजनाओं की नियमित मॉनिटरिंग करने और निर्धारित लक्ष्यों को तय समय सीमा में पूरा करने के निर्देश दिए।
उन्होंने केंद्र सरकार की देशी गोवंश से संबंधित योजना के तहत जनपद में बद्री गाय को लेकर विशेष कार्ययोजना तैयार करने को कहा। जिलाधिकारी ने बद्री गाय के संरक्षण एवं संवर्धन के साथ पशुपालकों को इससे जोड़ने की संभावनाओं का अध्ययन करने के निर्देश भी अधिकारियों को दिए।
उन्होंने कहा कि स्थानीय पशु नस्लों के संरक्षण के साथ इन्हें पशुपालकों की आय का माध्यम बनाने की दिशा में भी प्रभावी प्रयास किए जाने चाहिए।
योजनाओं में नवाचार पर जोर
जिलाधिकारी प्रशांत आर्य ने कहा कि सभी विभाग अपनी योजनाओं के क्रियान्वयन में नवाचार और प्रभावी मॉनिटरिंग पर विशेष ध्यान दें। उन्होंने अधिकारियों को योजनाओं का लाभ वास्तविक पात्र लोगों तक पहुंचाने के साथ उनके धरातल पर प्रभाव का नियमित मूल्यांकन करने के निर्देश दिए।
