October 24, 2026

पिछले 12 वर्षों में विदेशों से धरोहरों को देश वापस लाने के लिए महत्वपूर्ण प्रयास किए गए हैं: 650 से अधिक प्राचीन मूर्तियां भारत वापस लाई गई: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी

  1. Delhi 23 October 2026,

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आज नई दिल्ली स्थित भारत मंडपम में चिन्मय अमृत महोत्सव वैश्विक सम्मेलन का उद्घाटन किया। इस अवसर पर अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने संतों के स्नेह और आशीर्वाद से प्राप्त गहरी आध्यात्मिक अनुभूति का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि चिन्मय मिशन केवल एक संस्था नहीं, बल्कि एक अमर चेतना है, जिसकी स्थापना एक ऋषि ने की और जो दशकों के पवित्र संकल्पों से प्रेरित है। चिन्मय मिशन ने दशकों से समुदायों की सेवा की है और भारत के आध्यात्मिक ज्ञान को दुनिया के साथ साझा किया है। इसकी दशकों लंबी यात्रा ‘चिन्मय’ संकल्पों से भरी रही है और जो ‘चिन्मय’ है, वह प्राकृतिक रूप से अमर और शाश्वत अमृत से परिपूर्ण है, हमारा राष्ट्र ही हमारी संस्कृति की जन्मभूमि है, यही राष्ट्र हमारे अस्तित्व की नींव है। चिन्मय मिशन के प्रयासों से प्रेरित होकर, आज लाखों युवा भारत के सांस्कृतिक ब्रांड एंबेसडर के रूप में सेवा कर रहे हैं और भारतीय मूल्यों को नई पीढ़ी तक पहुंचा रहे हैं।

श्री मोदी ने कहा कि आधुनिक ने होलोबोट के माध्यम से श्रद्धेय गुरुदेव स्वामी चिन्मयानंद के साथ संवाद को संभव बनाकर इस कार्यक्रम को और भी भावनात्मक बना दिया। इस अनुभव का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि यह उन्हें 33 साल पहले, 1993 में वडोदरा में गुरुदेव से हुई मुलाकात की यादों में ले गया। गुरुदेव की आत्मीयता, संवाद और आशीर्वाद को स्मरण करते हुए उन्हें ऐसा लगा, मानो वे एक बार फिर उनकी साक्षात उपस्थिति में खड़े हों। उन्होंने इस भावपूर्ण श्रद्धांजलि के लिए मिशन के सदस्यों का हार्दिक आभार व्यक्त किया और कहा कि यह उनके लिए बेहद भावनात्मक अनुभव है।

उत्तर से दक्षिण और पूर्व से पश्चिम तक देश में हो रहे व्यापक सांस्कृतिक पुनर्जागरण का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने सांस्कृतिक स्थलों को यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल किए जाने के साथ-साथ काशी विश्वनाथ धाम, अयोध्या में श्री राम मंदिर, उज्जैन के महाकाल महालोक तथा केदारनाथ और बद्रीनाथ के भव्य पुनरोद्धार की ओर ध्यान दिलाया। उन्होंने कहा कि पहले चोरी की गई भारतीय पुरावशेषों को बिना किसी रोक-टोक के विदेशों में बेच दिया जाता था, जबकि पिछले 12 वर्षों में ऐसी धरोहरों को देश वापस लाने के लिए महत्वपूर्ण प्रयास किए गए हैं। इस अवधि में साढ़े छह सौ से अधिक प्राचीन मूर्तियां वापस लाई गई हैं।

प्रधानमंत्री ने 2047 में भारत की स्वतंत्रता के सौ वर्ष और चिन्मय मिशन की शताब्दी यात्रा के ऐतिहासिक संगम का उल्लेख करते हुए कहा कि दोनों यात्राओं के लक्ष्य समान हैं और उन्हें साथ-साथ आगे बढ़ना चाहिए। उन्होंने पूर्ण विश्वास जताया कि मिशन के आचार्यों, साधकों और स्वयंसेवकों का वैश्विक परिवार गुरुदेव की विरासत और दशकों के अनुभव का उपयोग विकसित भारत के निर्माण में योगदान देने के लिए करेगा। उन्होंने सभी को विभिन्न पर्वों की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि चिन्मय मिशन की शताब्दी यात्रा और विकसित भारत की यात्रा साथ-साथ आगे बढ़ेंगी।

 

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