छात्रों को किसी क्षमा की आवश्यकता नहीं है:सरकार का कर्तव्य है कि वह उन्हें सत्य, न्याय और माफी दे: राहुल गांधी
Delhi 02 August 2026,
कांग्रेस नेता राहुल गांधी में शनिवार को प्रधानंमत्री नरेंद्र मोदी पर छात्रों की चिंताओं को दूर करने में नाकाम रहने का आरोप लगाया है। राहुल ने कहा, प्रधानमंत्री छात्रों को “क्षमा” करने की बात करते हैं। इन अभिभावकों की बातें सुनने के बाद मेरा विश्वास और भी मजबूत हो गया है। भारत के छात्रों को किसी क्षमा की आवश्यकता नहीं है। सरकार का कर्तव्य है कि वह उन्हें सत्य, न्याय और माफी दे।
राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री के उस बयान पर पर प्रतिक्रिया दी है जिसमें ‘ प्रधानमंत्री ने छात्रों द्वारा उनके खिलाफ की गई कथित टिप्पणियों के लिए उन्हें ‘माफ’ करने की बात कही थी। कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि, प्रधानमंत्री किसी भी ऐसे दुखी माता-पिता या छात्र से नहीं मिले जिनका भविष्य पेपर लीक की वजह से बर्बाद हो गया। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार छात्रों और उनके परिवारों के दुख को समझने में नाकाम रही है।
राहुल गांधी ने नीट पेपर लीक के कारण आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवार से मुलाकात की और उन्हें सांत्वना दी। यह मुलाकात चेन्नई के पास महाबलीपुरम में हुई। राहुल ने कहा कि माता-पिता को अपने बच्चों को खोने का दुख सहते हुए देखने से ज्यादा दर्दनाक कुछ भी नहीं है और हर युवा की मौत के बाद उसका परिवार जीवन भर का दर्द लेकर रह जाता है। उन्होंने कहा कि बार-बार पेपर लीक होने, परीक्षाएं रद होने और सालों की तैयारी के रातों-रात बर्बाद हो जाने से शिक्षा व्यवस्था की बदहाली सामने आ गई है। उन्होंने कहा कि छात्रों से ऐसे सिस्टम में ईमानदारी से काम करने को कहा जा रहा है जो खुद उनके प्रति ईमानदार नहीं है।
प्रणब डोले के खिलाफ एनएसए लगाकर असम सरकार ने कानून का किया दुरुपयोग:
वहीं कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने रविवार को आरोप लगाया कि असम सरकार ने भूमि अधिकार कार्यकर्ता प्रणब डोले के खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा कानून एनएसए का दुरुपयोग किया है। उन्होंने कहा कि जिला अदालत द्वारा डोले को जमानत दिए जाने के दूसरे दिन ही, उन पर एनएसए लगा दिया गया। रमेश ने एक्स पर एक पोस्ट में इस कदम को “निवारक निरोध कानूनों का खुला दुरुपयोग” बताया। कांग्रेस नेता ने कहा, “डोले के खिलाफ एनएसए का इस्तेमाल भाजपा सरकारों द्वारा असहमति को चुप कराने के लिए असाधारण कानूनों को हथियार बनाने के बढ़ते पैटर्न का हिस्सा है।”
बता दें कि, प्रणब डोले को 12 जुलाई को बोकाखाट पुलिस स्टेशन में दर्ज एक आपराधिक मामले में गिरफ्तार किया गया था। उन्होंने काजीरंगा में लक्जरी होटलों के प्रस्तावित निर्माण के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया था। डोले ने काजीरंगा के हाथीखुली में इंगल पाथर में कथित भूमि आवंटन पर चिंता जताई थी, और दावा किया था कि भूमि को फिर से वर्गीकृत कर एक हॉस्पिटैलिटी कंपनी को आवंटित कर दिया गया।
रमेश ने 29 जुलाई को डोले को जमानत देने वाले सत्र न्यायालय के आदेश का भी उल्लेख किया। उन्होंने अदालत की टिप्पणी को उद्धृत करते हुए कहा कि “जहां पारिस्थितिक संरक्षण और स्थानीय लोगों के अस्तित्व का सवाल जुड़ा हो, वहां वैध स्थानीय चिंताओं को दबाने के लिए आपराधिक कानून का इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। डोले के एनएसए हिरासत आदेश में अस्पष्ट और अनुमान पर आधारित आरोप लगाए गए हैं, जिसमें यह भी शामिल है कि डोले ‘संदिग्ध स्रोतों से संदिग्ध विदेशी लेनदेन’ में शामिल थे।
