सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली में विरोध प्रदर्शन के मामले में सरकार को शो कॉज नोटिस जारी किया:मंगलवार तक जवाब दाखिल करने को कहा,
Delhi 11 October 2036,
जंतर मंतर स्थल सहित दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी एवं विरोधी पार्टियों क शान्ति पूर्ण विरोध प्रदर्शन के मामले में कोर्ट की अवमानना मामले में सुप्रीम कोर्ट में आज रविवार को सुनवाई हुई। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले से सम्बंधित सभी याचिकाओं को सम्बद्ध किया। कोर्ट ने कहा, हम संबंधित प्राधिकारों को अपना 9 अक्टूबर का आदेश याद दिलाते हैं। जिसमें संविधान के अनुच्छेद 19(2) के तहत मेट्रो का नियमित संचालन जारी रखने, दिल्ली से बैरिकेड्स हटाए जाने के निर्देश दिए थे। साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने यह छ सेवाएं बहाल करने के भी निर्देश दिए। किया संबंधित प्राधिकारी इस पर जवाब दें कि उनके खिलाफ अवमानना का मामला क्यों नहीं चलाया जाना चाहिए? अदालत के आदेश का खुलेआम अवहेलना के मद्देनजर हम सरकार से जवाब तलब में कर रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट ने शो कॉज नोटिस जारी किया और मंगलवार तक जवाब दाखिल करने को कहा है।
सुनवाई के दौरान 163 लागू करने की सूचना ना दिये जाने पर जस्टिस बागची ने कहा कि यह सूचना व्यक्तिगत तौर पर नहीं दी जाती। जस्टिस बागची ने कहा कि पहले हम एसजी तुषार मेहता को सुना। पूर्व अटॉर्नी जनरल वेणुगोपाल भी एक याचिकाकर्ता की ओर से ऑनलाइन जुड़े। सुनवाई के दौरान पूर्व अटॉर्नी जनरल वेणुगोपाल भी एक याचिकाकर्ता की ओर से ऑनलाइन जुड़े। जस्टिस बागची ने कहा कि इस संबंध में जो नई याचिकाएं दायर हुई हैं। उनको हम सोमवार को यानी कल सुनेंगे। वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने सुप्रीम कोर्ट का विशेष सुनवाई के लिए आभार जताया।
जस्टिस बागची ने वरिष्ठ वकील केके वेणुगोपाल से पूछा, क्या आप अवमानना का नोटिस जारी करवाना चाहते हैं? हमारे पास ऐसी ही राहत के लिए पहले से एक याचिका है। हम आपके मामले को सोमवार को लिस्ट करने का प्रस्ताव रखते हैं। वेणुगोपाल ने कहा कि कृपया नोटिस जारी करें।
जस्टिस बागची ने कहा कि सॉलिसिटर जनरल की बात सुनने के बाद हम उस पर विचार करेंगे। आप चाहते हैं कि जवाब आए और मामला लिस्ट हो। कपिल सिब्बल ने कहा कि अवमानना से कहीं बड़े मुद्दे हैं। इस सुनवाई के लिए हम आपका धन्यवाद करते हैं. जस्टिस बागची ने कहा कि धन्यवाद की कोई बात नहीं है। हम हमेशा देश की सेवा में हाजिर हैं।
वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल शंकरनारायणन ने कहा कि मैंने जो इसमें वीडियो पेश की है। जिसमें वकीलों के खिलाफ कार्रवाई की गई। शादान समेत कई लोगों को हिरासत में लिया गया। ये सब जंतर-मंतर के दायरे से काफी बाहर हुआ. अभी भी सुप्रीम कोर्ट के बाहर धारा 163 लागू है।
अधिवक्ता मेनका गुरुस्वामी ने कहा कि हम कुछ लॉयर्स कल सीतलवाड चेंबर से रेड लाइट की तरफ पहुंचे वहां पुलिस ने हमें घेर लिया और मुझे एक महिला पुलिस ने तेजी से खींचा। हम पूरी तरह से शांत थे। एक वकील ने कहा कि यह मामला मूल अधिकार अभिव्यक्ति की आजादी से जुड़ा है। वकील ने कहा कि लोगों को दिल्ली के बॉर्डर या फिर गुड़गांव समेत अन्य स्थानों से हिरासत में लिया गया। करीब 6-7 हजार लोग हिरासत में लिए गए. जस्टिस बागची ने कहा कि हम जानते हैं और इसकी गंभीरता को भी समझते हैं. जस्टिस बागची ने कहा कि पुलिस अधिकारियों को व्यक्तिगत तौर पर कानून व्यवस्था कायम करने का अधिकार नहीं होता जबतक कि राज्य प्रशासन की ओर से निर्णय ना लिया जाए। जस्टिस बागची ने कहा कि आप सभी चिंता ना करें लोगों के जीवन और स्वतंत्रता के मुद्दे पर हम इस मामले की तह तक जाएंगे और पूरा मामला सुनकर आदेश देंगे.
सरकार का पक्ष रखते हुए एसजी तुषार मेहता ने कहा कि मैंने कोई स्पीच नहीं तैयार की है। दो याचिकाएं यहां पर हैं। जिन लोगों को हिरासत में लिया गया वो तय कानून के तहत लिया गया। एसजी ने कहा कि दो बजे तक जिन वकीलों के हिरासत में लिया गया था , उन्हें छोड़ दिया गया। एसजी ने कहा कि मुझे निर्देश मिले हैं वो मैं बताता हूं। इसे मैं हलफनामे में भी दाखिल करूंगा। यहां पर प्रतिपक्ष के वकीलों ने राजनीतिक स्पीच दी हैं। एसजी ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने अनुपातिक सिद्धांत के आधार पर व्यवस्था करने को कहा था और हमने उसी तरीके से किया। जस्टिस बागची ने एसजी कहा कि आप अपने हलफनामे में स्पष्ट करियेगा कि क्या 45 स्टेशन में प्रवेश और बाहर जाना बंद नहीं था?
इसपर एसजी ने कहा कि कल रात दस बजे से सारे मेट्रो स्टेशन खुले हुए हैं. जिन्हें बंद किया गया वो अदालत के आदेश के मुताबिक कुछ समय के लिये था। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सरकार अनुपालन हलफनामा इस मुद्दे पर दाखिल करे। कोर्ट ने एसजी को हिदायत दी कि, नागरिक अधिकारों का हनन नहीं होना चाहिए? इंटरनेट को भी बहाल किया जाना चाहिए।
