सर्वदलीय बैठक में ऊर्जा आपूर्ति, आर्थिक असर और कूटनीतिक रणनीति को लेकर सरकार और विपक्ष के बीच विचार-विमर्श हुआ।
Delhi 25 March 2026ण
पश्चिम एशिया संकट पर भारत में सर्वदलीय बैठक हुई। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह इस सर्वदलीय बैठक की अध्यक्षता की। बैठक में पश्चिम एशिया के मौजूदा हालात और उसके भारत पर पड़ने वाले प्रभाव पर चर्चा हुई, विशेष तौर पर ऊर्जा आपूर्ति, आर्थिक असर और कूटनीतिक रणनीति को लेकर सरकार और विपक्ष के बीच विचार-विमर्श हुआ।
केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजिजू ने बताया कि, सरकार की तरफ से, जितने भी सवाल और जितनी भी उलझनें थीं, उन सभी को सरकार ने साफ तौर पर समझाया। मीटिंग के आखिर में विपक्षी पार्टियों ने एक बहुत ही अहम बात कही: उन्होंने इस सर्वदलीय बैठक बुलाने के लिए सरकार का शुक्रिया अदा किया। उन्होंने यह भी जोर देकर कहा कि ऐसी मुश्किल और चुनौतीपूर्ण स्थिति में, हम सभी को एक साथ खड़ा होना होगा। PM मोदी ने संसद के जरिए यह अपील की है कि किसी भी चुनौतीपूर्ण स्थिति में, भारतीय संसद को एक साथ मिलकर खड़ा होना चाहिए। मुझे लगता है कि मीटिंग के आखिर में अपनी बात कहकर विपक्षी पार्टी ने एक समझदारी दिखाई है; उन्होंने कहा कि किसी भी चुनौतीपूर्ण स्थिति में, वे सरकार द्वारा उठाए गए कदमों के साथ खड़े रहेंगे। कई सदस्य होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के रास्ते गैस और पेट्रोलियम की सप्लाई के बारे में विस्तार से जानना चाहते थे, और वे सभी इस बात से संतुष्ट थे कि भारत ने पहले ही चार जहाज सुरक्षित कर लिए हैं। इस तरह, विपक्षी सदस्य सरकार द्वारा किए गए प्रयासों से संतुष्ट थे।
तृणमूल कांग्रेस ने बैठक से दूरी बनाई है और राहुल गांधी भी इसमें शामिल नहीं हुए हैं। वहीं कांग्रेस की ओर से तारिक अहमद और मुकुल वासनिक शामिल हुए हैं, जबकि जेडीयू से ललन सिंह और संजय झा बैठक में पहुंचे। बैठक में मौजूदा हालात और भारत की रणनीति पर चर्चा हुई।
कांग्रेस के मल्लिकार्जुन खड़गे ने इस फैसले पर आपत्ति जताई और मांग की कि केवल जानकारी (ब्रीफिंग) देने के बजाय, इस मुद्दे पर सदन में बहस होनी चाहिए। वहीं इस बैठक में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण, विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर, पेट्रोलियम मंत्री हरदीप पुरी और विदेश सचिव विक्रम मिस्री मौजूद रहे ।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने राज्यसभा मे बयान दे चुके हैं कि, पश्चिम एशिया में छिड़े मौजूदा युद्ध के कारण उत्पन्न स्थिति से निपटने के लिए अधिकार संपन्न सात नये समूहों का गठन किया गया है जो एलपीजी, आवश्यक सेवाओं की आपूर्ति और विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े अन्य विषयों का नियमित आकलन कर सुझाव देंगे। हालांकि सरकार की ओर से कहा जा रहा है कि देश में तेल और गैस की कोई कमी नहीं है।
