सिविल सर्विसेज इंस्टीट्यूट में आयोजित चिन्तन शिविर में विकसित उत्तराखण्ड विजन- 2047 को धरातल पर उतारने के लिए ठोस, सहभागी और दीर्घकालिक रणनीतियों पर हुआ व्यापक मंथन,
Uttrakhand 25 January 2026,
सिविल सर्विसेज इंस्टीट्यूट में आयोजित चिन्तन शिविर एवं डायलॉग ऑन विजन 2047 में राज्यचिंतन शिविर के द्वितीय दिवस पर विकसित उत्तराखण्ड विजन- 2047 को धरातल पर उतारने के लिए ठोस, सहभागी और दीर्घकालिक रणनीतियों पर व्यापक मंथन किया गया। शिविर की अध्यक्षता मुख्य सचिव आनंद बर्धन द्वारा की गई।
चिन्तन शिविर के प्रथम सत्र में वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन से जुड़ी चुनौतियों के दृष्टिगत उत्तराखण्ड विज़न–2047 को केंद्र में रखते हुए विभागीय कार्ययोजनाओं पर प्रस्तुतीकरण किए गए। इस सत्र की अध्यक्षता प्रमुख सचिव श्री आर. के. सुधांशु द्वारा की गई। सत्र में इस बात पर विशेष बल दिया गया कि प्राकृतिक संसाधनों, जल स्रोतों, वनों और जैव विविधता का संरक्षण केवल पर्यावरणीय आवश्यकता नहीं, बल्कि राज्य की आर्थिक समृद्धि का आधार है। दैवीय आपदाओं के जोखिम को देखते हुए योजनाओं को इस प्रकार क्रियान्वित करने पर सहमति बनी कि आपदा प्रबंधन, जलवायु सहनशीलता और संसाधन संरक्षण के माध्यम से इकोनॉमी और इकोलॉजी के बीच संतुलन स्थापित किया जा सके।
शिविर के द्वितीय सत्र में स्थानीय निकायों, स्वशासन संस्थाओं एवं पंचायतों की सक्रिय सहभागिता से विकास के रोडमैप पर विस्तृत चर्चा की गई। इस सत्र की अध्यक्षता सचिव श्री नितेश झा द्वारा की गई। सत्र में ग्रामीण विकास, विशेष नियोजन, ग्राम्य एवं शहरी नियोजन की रूपरेखा पर विचार करते हुए यह रेखांकित किया गया कि नीचे से ऊपर नियोजन, स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप योजनाओं का निर्माण तथा संस्थागत सशक्तिकरण, संतुलित एवं समावेशी विकास की कुंजी है। स्थानीय निकायों की भूमिका को सुदृढ़ कर उन्हें विकास के वास्तविक वाहक के रूप में स्थापित करने पर जोर दिया गया।
तीसरे एवं अंतिम सत्र में वित्तीय संसाधनों की सुरक्षा, सुशासन और संस्थागत सुधारों के रोडमैप पर व्यापक विमर्श हुआ। इस सत्र की अध्यक्षता श्री शैलेश बगौली तथा सह-अध्यक्षता श्री दिलीप जावलकर द्वारा की गई। सत्र में राज्य के राजस्व स्रोतों में वृद्धि, वित्तीय प्रबंधन में पारदर्शिता, नागरिक पुलिस, साइबर सुरक्षा, युवा कल्याण एवं प्रशासनिक दक्षता से जुड़े विषयों पर विस्तृत चर्चा की गई। तकनीक-सक्षम शासन, प्रभावी सुरक्षा व्यवस्था और समयबद्ध निर्णय प्रक्रिया को जनविश्वास एवं विकास के लिए अनिवार्य बताया गया।
चिंतन शिविर के समापन पर मुख्य सचिव ने इस विस्तृत कार्ययोजना एवं अभ्यास के लिए सभी के समन्वय और सक्रियता को धन्यवाद दिया। उन्होंने विभागों और जनपदों को निर्देश दिए, जिस प्रकार विकसितउत्तराखण्ड–2047 की कार्ययोजना तैयार की जा रही है, उसी प्रकार प्रत्येक जनपद के लिए भी विकसित जिला कार्ययोजना बनाई जाए। साथ ही, विज़न–2047 के लक्ष्यों के आधार पर विभागों की निरंतर समीक्षा, अनुश्रवण एवं समय-समय पर मूल्यांकन सुनिश्चित करने पर विशेष बल दिया गया, ताकि योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक प्रभावी रूप से पहुँच सके।
चिन्तन शिविर के प्रथम दिवस में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अपने संबोधन कहा कि प्रधानमंत्री द्वारा प्रस्तुत “विकसित भारत” का संकल्प किसी एक सरकार, किसी एक कार्यकाल या किसी एक योजना तक सीमित नहीं है, बल्कि ये एक ऐसा व्यापक और दीर्घकालिक राष्ट्रीय दृष्टिकोण है, जिसमें भारत को आर्थिक, सामाजिक, तकनीकी, सामरिक तथा सांस्कृतिक रूप से सशक्त, आत्मनिर्भर और वैश्विक नेतृत्वकर्ता राष्ट्र के रूप में स्थापित करने का संकल्प निहित है। इस विजन की सबसे बड़ी विशेषता है कि इसमें विकास को केवल आंकड़ों तक सीमित नहीं रखा गया है, बल्कि इसे मानव केंद्रित, समावेशी और सतत बनाया गया है। विकसित भारत का अर्थ एक ऐसे भारत का निर्माण है जहाँ प्रत्येक नागरिक को समान अवसर प्राप्त हों, जहाँ शासन व्यवस्था पारदर्शी, संवेदनशील और जन-केंद्रित हो।

