February 3, 2026

हमारे संविधान में निहित न्याय, स्वतन्त्रता, समता और बंधुता के आदर्श हमारे गणतन्त्र को परिभाषित करते हैं: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु,

Delhi 25 January 2026,

भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने 77वेंगणतन्त्र दिवस की पूर्व संध्या पर राष्ट्र के नाम संबोधन में कहा, देश और विदेश में रहने वाले, हम भारत के लोग, उत्साह के साथ, गणतन्त्र दिवस का उत्सव मनाने जा रहे हैं। मैं, आप सभी को गणतन्त्र दिवस के राष्ट्रीय पर्व की हार्दिक बधाई देती हूं। उन्होंने कहा गणतन्त्र दिवस का पावन पर्व हमारे अतीत, वर्तमान और भविष्य में देश की दशा और दिशा का अवलोकन करने का अवसर होता है। स्वाधीनता संग्राम के बल पर, 15 अगस्त 1947 के दिन से, हमारे देश की दशा बदली। भारत स्वाधीन हुआ। हम अपनी राष्ट्रीय नियति के निर्माता बने।26 जनवरी 1950 के दिन से, हम अपने गणतन्त्र को, संवैधानिक आदर्शों की दिशा में आगे बढ़ा रहे हैं। उसी दिन, हमने अपने संविधान को पूरी तरह से लागू किया। लोकतन्त्र की जननी, भारतभूमि, उपनिवेश के विधि-विधान से मुक्त हुई और हमारा लोक-तंत्रात्मक गणराज्य अस्तित्व में आया। राष्ट्रपति ने स्मरण कराया कि, हमारा संविधान, विश्व इतिहास में आज तक के सबसे बड़े गणराज्य का आधार-ग्रंथ है। हमारे संविधान में निहित न्याय, स्वतन्त्रता, समता और बंधुता के आदर्श हमारे गणतन्त्र को परिभाषित करते हैं। संविधान निर्माताओं ने राष्ट्रीयता की भावना तथा देश की एकता को संवैधानिक प्रावधानों का सुदृढ़ आधार प्रदान किया है। लौहपुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल ने हमारे राष्ट्र का एकीकरण किया। पिछले वर्ष 31 अक्तूबर को, कृतज्ञ देशवासियों ने उत्साहपूर्वक उनकी 150वीं जयंती मनाई। पिछले वर्ष, 7 नवंबर से, हमारे राष्ट्रीय गीत ‘वन्दे मातरम्’ की रचना के 150 वर्ष सम्पन्न होने के उत्सव भी मनाए जा रहे हैं। भारत माता की वंदना का यह गीत, जन-मन में राष्ट्र-प्रेम का संचार करता है। 23 जनवरी को देशवासियों ने नेताजी सुभाष चन्द्र बोस की जयंती के दिन उन्हें सादर श्रद्धांजलि अर्पित की। वर्ष 2021 से नेताजी की जयंती को ‘पराक्रम दिवस’ के रूप में मनाया जाता है ताकि देशवासी, विशेषकर युवा, उनकी अदम्य देशभक्ति से प्रेरणा प्राप्त करें

राष्ट्रपति ने कहा यह सब, हमारे जीवंत गणतन्त्र को शक्तिशाली बना रहे हैं। हमारी तीनों सेनाओं के बहादुर जवान, मातृभूमि की रक्षा के लिए सदैव सतर्क रहते हैं। हमारे कर्तव्यनिष्ठ पुलिसकर्मी तथा केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों के जवान, देशवासियों की आंतरिक सुरक्षा के लिए तत्पर रहते हैं। हमारे अन्नदाता किसान, देशवासियों के लिए पोषण सामग्री उत्पन्न करते हैं। हमारे देश की कर्मठ और प्रतिभाशाली महिलाएं अनेक क्षेत्रों में नए प्रतिमान स्थापित कर रही हैं। हमारे सेवाधर्मी डॉक्टर, नर्स और सभी स्वास्थ्य-कर्मी देशवासियों के स्वास्थ्य की देखभाल करते हैं। हमारे निष्ठावान सफाई मित्र, देश को स्वच्छ रखने में प्रमुख भूमिका निभाते हैं। हमारे प्रबुद्ध शिक्षक, भावी पीढ़ियों का निर्माण करते हैं। हमारे विश्व-स्तरीय वैज्ञानिक और इंजीनियर, देश के विकास को नई दिशाएं देते हैं। हमारे मेहनती श्रमिक भाई-बहन, राष्ट्र का नव-निर्माण करते हैं। हमारे होनहार युवा और बच्चे, अपनी प्रतिभा और योगदान से देश के स्वर्णिम भविष्य के प्रति हमारा विश्वास मजबूत करते हैं। हमारे प्रतिभाशाली कलाकार, शिल्पकार और साहित्यकार, हमारी समृद्ध परम्पराओं को आधुनिक अभिव्यक्ति दे रहे हैं। अनेक क्षेत्रों के विशेषज्ञ, देश के बहुआयामी विकास को दिशा दे रहे हैं। हमारे ऊर्जावान उद्यमी, देश को विकसित और आत्मनिर्भर बनाने में अपना योगदान दे रहे हैं। निस्वार्थ भाव से समाज की सेवा करने वाले व्यक्ति और संस्थान, अनगिनत लोगों के जीवन में प्रकाश का संचार कर रहे हैं। सरकारी तथा गैर-सरकारी कार्यालयों एवं संस्थानों में काम करने वाले सभी कर्तव्यपरायण लोग, राष्ट्र-निर्माण में अपनी सेवाएं समर्पित कर रहे हैं। जन-सेवा के लिए प्रतिबद्ध जनप्रतिनिधि देशवासियों की आकांक्षाओं के अनुरूप कल्याण एवं विकास के लक्ष्यों को प्राप्त कर रहे हैं। इस प्रकार, सभी जागरुक एवं संवेदनशील नागरिक, हमारे गणतन्त्र की प्रगति यात्रा को आगे बढ़ा रहे हैं। हमारे गणतंत्र को सशक्त बनाने के प्रयासों में कार्यरत सभी देशवासियों की मैं हृदय से सराहना करती हूं। प्रवासी भारतीय, हमारे गणतंत्र की छवि को विश्व-पटल पर गौरव प्रदान करते हैं। मैं उनकी विशेष सराहना करती हूं।

राष्ट्रपति ने उल्लेख किया, 25 जनवरी को हमारे देश में ‘राष्ट्रीय मतदाता दिवस’ मनाया जाता है। जनप्रतिनिधियों के निर्वाचन के लिए हमारे वयस्क नागरिक उत्साहपूर्वक मतदान करते हैं। बाबासाहब डॉक्टर भीमराव आंबेडकर मानते थे कि मताधिकार के प्रयोग से राजनैतिक शिक्षा सुनिश्चित होती है। हमारे मतदाता, बाबासाहब की सोच के अनुरूप, अपनी राजनैतिक जागरूकता का परिचय दे रहे हैं। मतदान में महिलाओं की बढ़ती हुई भागीदारी हमारे गणतन्त्र का एक शक्तिशाली आयाम है। महिलाओं का सक्रिय और समर्थ होना देश के विकास के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। उनके स्वास्थ्य, शिक्षा, सुरक्षा एवं आर्थिक सशक्तीकरण हेतु किए जा रहे राष्ट्रीय प्रयासों से अनेक क्षेत्रों में महिलाओं की भागीदारी बढ़ी है। ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ अभियान से बेटियों की शिक्षा को प्रोत्साहन मिला है। पिछले वर्ष, हमारे देश ने, ऑपरेशन सिंदूर के द्वारा, आतंकवाद के ठिकानों पर सटीक प्रहार किया। आतंक के अनेक ठिकानों को ध्वस्त किया गया तथा बहुत से आतंकवादियों को उनके अंजाम तक पहुंचाया गया। सुरक्षा के क्षेत्र में हमारी आत्मनिर्भरता से ऑपरेशन सिंदूर की ऐतिहासिक सफलता को शक्ति मिली।

समावेशी सोच के साथ, वंचित वर्गों के कल्याण और विकास के लिए, अनेक योजनाओं को कार्यरूप दिया जा रहा है। पिछले वर्ष 15 नवंबर को, देशवासियों ने, धरती आबा भगवान बिरसा मुंडा की जयंती के दिन पांचवां ‘जनजातीय गौरव दिवस’ मनाया तथा भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती के उपलक्ष में मनाए गए उत्सव सम्पन्न हुए। ‘आदि कर्मयोगी’ अभियान के माध्यम से, जनजातीय समुदाय के लोगों में नेतृत्व क्षमता को निखारा गया।

हमारे अन्नदाता किसान, हमारे समाज के तथा अर्थ-व्यवस्था के मेरुदंड हैं। किसानों की परिश्रमी पीढ़ियों ने हमारे देश को खाद्यान्न में आत्मनिर्भर बनाया है। किसानों के परिश्रम के बल पर ही हम कृषि आधारित उत्पादों का निर्यात कर पा रहे हैं। करोड़ों देशवासियों को, गरीबी की सीमा-रेखा से ऊपर लाया गया है। साथ ही, ऐसे प्रयास किए जा रहे हैं कि वे पुनः गरीबी से पीड़ित न होने पाएं। अंत्योदय की संवेदना को कार्यरूप देने वाली, विश्व की सबसे बड़ी योजना, ‘पीएम गरीब कल्याण अन्न योजना’ इस सोच पर आधारित है कि 140 करोड़ से अधिक आबादी वाले हमारे देश में कोई भी भूखा न रहे। इस योजना से लगभग 81 करोड़ लाभार्थियों को सहायता मिल रही है। गरीब परिवारों के लिए बिजली-पानी तथा शौचालय की सुविधा से युक्त 4 करोड़ से अधिक पक्के घरों का निर्माण करके, उन्हें गरिमापूर्ण जीवन जीने तथा आगे बढ़ने का आधार प्रदान किया गया है। गरीबों के कल्याण के हित में किए गए ऐसे प्रयास महात्मा गांधी के सर्वोदय के आदर्श को कार्यरूप देते हैं।

राष्ट्रपति ने कहा, हमारे युवाओं में असीम प्रतिभा है। हमारे युवा उद्यमी, खिलाड़ी, वैज्ञानिक और प्रोफेशनल्स, देश में नई ऊर्जा का संचार कर रहे हैं तथा विश्व-स्तर पर अपनी पहचान बना रहे हैं। आज बड़ी संख्या में हमारे युवा, स्व-रोजगार की सफलता के प्रभावशाली उदाहरण प्रस्तुत कर रहे हैं। हमारे युवा ही, हमारे राष्ट्र की विकास यात्रा के ध्वज-वाहक हैं। ‘मेरा युवा भारत’ या ‘MY भारत’, टेक्नोलॉजी की सहायता से संचालित एक अनुभव-आधारित शिक्षा व्यवस्था है। यह युवाओं को नेतृत्व और कौशल-विकास सहित, कई क्षेत्रों में उपलब्ध अवसरों के साथ जोड़ती है। हमारे देश में स्टार्ट-अपस् की प्रभावशाली सफलता का प्रमुख श्रेय हमारे युवा उद्यमियों को जाता है। युवा पीढ़ी की आकांक्षाओं पर केन्द्रित नीतियों और कार्यक्रमों के बल पर देश के विकास को गति मिलेगी। मुझे विश्वास है कि वर्ष 2047 तक, विकसित भारत के निर्माण में युवा-शक्ति की प्रमुख भूमिका रहेगी।

भारत का संविधान अब आठवीं अनुसूची में शामिल सभी भारतीय भाषाओं में उपलब्ध है। संविधान को भारतीय भाषाओं में पढ़ने और समझने से, देशवासियों में संवैधानिक राष्ट्रीयता का प्रसार होगा तथा आत्म-गौरव की भावना मजबूत होगी। सरकार और जन-सामान्य के बीच की दूरी को निरंतर कम किया जा रहा है। आपसी विश्वास पर आधारित सुशासन पर बल दिया जा रहा है। अनेक अनावश्यक नियमों को निरस्त किया गया है, कई कंप्लायंस को समाप्त किया गया है तथा जनता के हित में व्यवस्थाओं को सरल बनाया गया है। टेक्नॉलॉजी के माध्यम से लाभार्थियों को सुविधाओं के साथ सीधे जोड़ा जा रहा है। रोजमर्रा के जीवन को बेहतर बनाने के लक्ष्य के साथ ऐज ऑफ़ लिविंग को प्राथमिकता दी जा रही है।

पिछले वर्ष, हमारे देश ने, ऑपरेशन सिंदूर के द्वारा, आतंकवाद के ठिकानों पर सटीक प्रहार किया। आतंक के अनेक ठिकानों को ध्वस्त किया गया तथा बहुत से आतंकवादियों को उनके अंजाम तक पहुंचाया गया। सुरक्षा के क्षेत्र में हमारी आत्मनिर्भरता से ऑपरेशन सिंदूर की ऐतिहासिक सफलता को शक्ति मिली।

यह हमारा सौभाग्य है कि हम भारत-भूमि के निवासी हैं। हमारी जननी जन्मभूमि के लिए कवि गुरु रवींद्र नाथ ठाकुर ने कहा था:ओ आमार देशेर माटी, तोमार पोरे ठेकाइ माथा।अर्थात, हे मेरे देश की माटी! मैं तुम्हारे चरणों में अपना शीश झुकाता हूं। राष्ट्रपति ने कहा, मैं मानती हूं कि गणतंत्र दिवस, देशभक्ति की इस प्रबल भावना को और भी सुदृढ़ करने के संकल्प का अवसर है। आइए, हम सब मिलकर ‘राष्ट्र प्रथम’ की भावना से कार्य करते हुए अपने गणतन्त्र को और भी गौरवशाली बनाएं।

 

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