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September 20, 2026

केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने नॉर्थ ब्लॉक और साउथ ब्लॉक से ‘सेवा तीर्थ’ तथा ‘कर्तव्य भवनों’ में स्थानांतरण के प्रस्ताव को दी मंजूरी 

Delhi 14 February 2026

केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने नॉर्थ ब्लॉक और साउथ ब्लॉक से ‘सेवा तीर्थ’ तथा ‘कर्तव्य भवनों’ में स्थानांतरण के प्रस्ताव को मंजूर कर लिया है। इसके साथ ही नॉर्थ ब्लॉक और साउथ ब्लॉक अब ‘युगे युगेन भारत’ राष्ट्रीय संग्रहालय में बदल जाएंगे। बीते 13 फरवरी को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा नया प्रधानमंत्री कार्यालय जिसे अब ‘सेवातीर्थ’ के नाम से जाना जाएगा, राष्ट्र को समर्पित किया गया है।

केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैश्य ने मीडिया को ब्रीफिंग करते हुए बताया कि, साउथ और नॉर्थ ब्लॉक का निर्माण अंग्रेजों द्वारा भारत को गुलामी की बेड़ियों में जकड़े रहने के लिए हुआ था। 1947 में भारत को गुलामी से तो मुक्ति मिली लेकिन इन भवनों को तत्कालीन सरकार द्वारा अपने कार्यों के निष्पादन हेतु बनाए रखा गया। स्वतंत्रता के बाद से ही प्रधानमंत्री कार्यालय साउथ ब्लॉक के इस भवन से कार्य करता रहा है।

केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैश्य कहा, आज हमें हर्ष है कि साउथ ब्लॉक के इस कक्ष में अंतिम बार केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक हो रही है। ये केवल स्थान परिवर्तन का क्षण नहीं है, यह इतिहास और भविष्य के संगम के भी पल हैं। इस परिसर ने गुलामी से आज़ादी और फिर स्वतंत्र भारत की अनेक ऐतिहासिक घटनाओं को देखा है, गढ़ा है। इस परिसर ने देश के 16 प्रधानमंत्रियों के नेतृत्व में बनी कैबिनेट के महत्वपूर्ण फैसले होते देखे हैं। इसकी सीढ़ियों पर पंडित जवाहरलाल नेहरू से लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तक के पदचिन्ह हैं। इस भवन की सीढ़ियों पर चढ़ते कदमों ने देश को नई ऊंचाई पर पहुंचाने में अहम योगदान दिया है। बीते दशकों में यहां कैबिनेट की बैठकों में, संविधान के आदर्शों, जनता से मिले जनादेश और राष्ट्र की आकांक्षाओं से प्रेरित होकर अनेक महत्वपूर्ण निर्णय लिए हैं। यहां भारत की सफलताओं का उत्सव भी मनाया गया, असफलताओं का आंकलन भी हुआ और साथ ही संकटों और चुनौतियों से निपटने के लिए कड़े और बड़े फैसले भी लिए गए।

केंद्रीय मंत्री ने देश के आजादी के समय भारत-पाक विभाजन की त्रासदी से लेकर डिजिटल गवर्नेंस तक हुई प्रगति का जिक्र करते हुए कहा कि, साउथ ब्लॉक के इन कमरों ने विभाजन की विभीषिका भी देखी, युद्ध और आपातकाल की चुनौतियों को भी देखा और शांतिकाल की नीतियों पर भी चिंतन और मनन किया। इन्होंने टाइपराइटर से लेकर डिजिटल गवर्नेंस तक, तकनीक की लंबी छलांग को महसूस किया है। यहाँ बैठकर अधिकारियों की कई पीढ़ियों ने ऐसे फैसले लिए, जिन्होंने भारत को आज़ादी के तुरंत बाद की अनिश्चितता से निकालकर स्थिरता की राह पर आगे बढ़ाया। सबके प्रयासों का परिणाम है कि आर्थिक चुनौतियों और संकटों से निकलकर, आज भारत एक आत्मविश्वासी राष्ट्र बनकर खड़ा हुआ है। आज का भारत दुनिया की अग्रणी अर्थव्यवस्थाओं में से एक है। भारत आज एक सुरक्षित और सक्षम राष्ट्र के रूप में उभरकर सामने आया है और वैश्विक मंचों पर अपनी स्पष्ट और प्रभावशाली आवाज़ रख रहा है।

बीते एक दशक में, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में साउथ ब्लॉक राष्ट्र के अनेक ऐतिहासिक निर्णयों का केंद्र रहा। ये स्थान मिनिमम गवर्नमेंट, मैक्सिमम गवर्नेंस की प्रेरणा स्थली बना। यहां से रिफॉर्म एक्सप्रेस को पूरे देश में प्रोत्साहन मिला है। यहीं से डीबीटी, स्वच्छ भारत अभियान, गरीब कल्याण से जुड़े अभियान, डिजिटल इंडिया, जीएसटी जैसे व्यापक सुधारों को आकार मिला। यहां से ही आर्टिकल-370 की दीवार गिराने और तीन तलाक के खिलाफ कानून बनाने जैसे सामाजिक न्याय के साहसिक और संवेदनशील निर्णय लिए गए। यहीं इसी भाव के साथ साउथ ब्लॉक के उ‌द्घाटन के करीब 95 वर्षों के बाद, आज 13 फरवरी 2026 को भारत सरकार इन भवनों को खाली कर रही है और ‘सेवातीर्थ’ तथा ‘कर्तव्य भवनों’ में स्थानांतरित हो रही है।

केन्द्रीय मंत्रिमंडल आज यह संकल्प भी लेती है कि नॉर्थ और साउथ ब्लॉक को “युगे युगीन भारत राष्ट्रीय संग्रहालय” का हिस्सा बनाया जाए, जो हमारी हजारों वर्ष पुरानी सभ्यता से पीढ़ियों को प्रेरित करता रहेगा। ये संग्रहालय, हमारी कालातीत और शाश्वत सांस्कृतिक विरासत का उत्सव मनाएगा और हमारे गौरवशाली अतीत को समृद्ध भविष्य से जोड़ेगा।

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