परमार्थ निकेतन में कैलाश खेर के “जोगी” एल्बम का विमोचन
देवभूमि Rishikesh स्थित Parmarth Niketan आज आध्यात्मिक ऊर्जा और भक्ति भाव से आलोकित हो उठा, जब इसके पावन गंगा तट पर “जोगी” एल्बम का भव्य विमोचन हुआ। इस विशेष अवसर पर सुप्रसिद्ध गायक Kailash Kher ने अपनी उपस्थिति से कार्यक्रम को दिव्यता प्रदान की।
कार्यक्रम में Swami Chidanand Saraswati के सान्निध्य में विश्व विख्यात गंगा आरती का आयोजन हुआ, जिसमें भक्ति और आध्यात्मिकता का अद्भुत संगम देखने को मिला। माँ गंगा के तट पर वेद मंत्रों की गूँज, दीपों की स्वर्णिम आभा और “हर-हर गंगे” के जयघोष के बीच कैलाश खेर ने लगभग 700 वर्ष प्राचीन संत Kabir के अमर भजन को अपनी ओजस्वी आवाज में प्रस्तुत किया। उनके सुरों ने वातावरण को भक्ति और भाव से भर दिया, मानो संत कबीर की वाणी स्वयं पुनः जीवंत हो उठी हो।
“जोगी” एल्बम सनातन धर्म की अमर चेतना, भारत के ऋषियों की तपश्चर्या और Adi Shankaracharya के दिव्य जीवन को समर्पित एक संगीतमय प्रस्तुति है। इसमें उनके बाल्यकाल, संन्यास, भारत भ्रमण, शास्त्रार्थ और धर्म पुनर्जागरण के साथ-साथ राष्ट्र की आध्यात्मिक एकता के संदेश को अत्यंत भावपूर्ण ढंग से प्रस्तुत किया गया है।
इस अवसर पर स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने कहा कि जब संगीत साधना बनता है, तो वह ईश्वर का संदेश बन जाता है। उन्होंने “जोगी” को भारत की आध्यात्मिक धरोहर और गुरु परंपरा को समर्पित एक दिव्य स्तुति बताया। साथ ही उन्होंने युवाओं से Adi Shankaracharya के जीवन से प्रेरणा लेकर अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़े रहने का आह्वान किया।
Kailash Kher ने अपने संबोधन में कहा कि “जोगी” के माध्यम से वे यह संदेश देना चाहते हैं कि सनातन संस्कृति अडिग और अमर है। अनेक चुनौतियों और आक्रमणों के बावजूद भारत की आध्यात्मिक चेतना सदैव प्रबल रही है। उन्होंने कहा कि भारत जैसा देश विश्व में अद्वितीय है, जहाँ संस्कृति, करुणा, ज्ञान और अध्यात्म एक साथ प्रवाहित होते हैं।
कार्यक्रम के अंत में स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने कैलाश खेर को रुद्राक्ष का पौधा भेंट कर उनका सम्मान किया। यह आयोजन न केवल संगीत का उत्सव था, बल्कि भारतीय आध्यात्मिक परंपरा और संस्कृति के गौरव का भी जीवंत उदाहरण बन गया।
