सुप्रीम कोर्ट ने विशेष गहन पुनिरीक्षण एसआईआर को वैध ठहराया:बीजेपी इस फ़ैसले का किया स्वागत:
Delhi, 27 May 2026,
सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को विषेश गहन पुनरीक्षण एसआईआर के विरोध में विपक्षी पार्टियों एवं अन्य के द्वारा दायर याचिकाओं के पक्ष में दी गई सभी दलीलों को खारिज करते हुए विशेष गहण पुनिरीक्षण एसआईआर को वैध ठहराया है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यह चुनाव आयोग की ओर से स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव के संवैधानिक सिद्धांत को लागू करने के लिए की गई वैध कार्रवाई है।
एसआईआर फिर विरोध में दायर की गई याचिकाओं में कहा गया था कि एसआईआर ‘घुसपैठियों’ को हटाने के नाम पर पीछे के दरवाज़े से नागरिकता जांच करने की कोशिश है। चुनाव आयोग मनमाने तरीक़े से नागरिकता तय करने की शक्तियां अपने हाथ में ले रहा है और संसद के बनाए गए क़ानूनों, नियमों के साथ अपने ही मैनुअल में अनुचित तरीक़े से पार कर रहा है।
चीफ़ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने सुनवाई के दौरान कहा कि, याचिकाकर्ताओं की नागरिकता पर अंतिम फ़ैसला नहीं माना जाएगा। खुली अदालत में फ़ैसला सुनाते हुए कहा कि चुनाव आयोग को संविधान के अनुच्छेद 324 के तहत यह अधिकार है कि वह मतदाता सूची में नाम शामिल करने के लिए नागरिकता की जांच करे
जस्टिस ने खुली अदालत में फ़ैसला सुनाते हुए कहा कि चुनाव आयोग को संविधान के अनुच्छेद 324 के तहत यह अधिकार है कि वह मतदाता सूची में नाम शामिल करने के लिए नागरिकता की जांच करे।
सुप्रीम कोर्ट में बिहार मामले की सुनवाई जारी रहने के दौरान ही एसआईआर का दूसरा चरण शुरू हो चुका था, जिसमें पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु और असम सहित 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लगभग 51 करोड़ मतदाता शामिल हैं। वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण ने इसे न्यायपालिका के लिए ‘काला दिन’ बताया है तो इस मामले के याचिकाकर्ता योगेंद्र यादव ने कहा कि उन्हें इस फ़ैसले से अचरज नहीं हुआ है। वहीं भारतीय जनता पार्टी के नेताओं ने इस फ़ैसले का स्वागत किया है। हालांकि अदालत ने स्पष्ट किया कि यह जांच किसी व्यक्ति की नागरिकता पर अंतिम फ़ैसला नहीं मानी जाएगी अगर चुनाव आयोग को लगे कि किसी व्यक्ति के पास ज़रूरी दस्तावेज़ नहीं हैं या वह जांच में सफल नहीं हुआ है, तो वह मामला नागरिकता क़ानून के तहत अंतिम निर्णय के लिए केंद्र सरकार की सक्षम प्राधिकरण के पास भेज सकता है। नागरिकता पर अंतिम फ़ैसला नहीं माना जाएगा
चीफ़ जस्टिस ने खुली अदालत में फ़ैसला सुनाते हुए कहा कि चुनाव आयोग को संविधान के अनुच्छेद 324 के तहत यह अधिकार है कि वह मतदाता सूची में नाम शामिल करने के लिए नागरिकता की जांच करे। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हालांकि एसआईआर ने रीप्रेजेंटेशन ऑफ द पीपल एक्ट और रजिस्ट्रेशन ऑफ इलेक्टर्स रूल्स के तहत मतदाता सूची संशोधन की सामान्य प्रक्रिया की सीमाओं को कुछ हद तक विस्तार दिया लेकिन केवल इसी आधार पर इसे असंवैधानिक नहीं ठहराया जा सकता। अदालत ने माना कि यह प्रक्रिया एक असाधारण परिस्थिति में की गई थी लेकिन इसे अधिकार क्षेत्र से बाहर नहीं कहा जा सकता है। कोर्ट ने कहा कि मतदाता सूची संशोधन से जुड़े प्रक्रियात्मक सुरक्षा उपायों का पालन किया गया है।
इस मामले में एसोसिएशन फोर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स ने याचिकाकर्ता था। इसकी ओर से प्रशांत भूषण और नेहा राठी पेश हुए थे। इनकी उस दलील को भी सुप्रीम कोर्ट ने ख़ारिज कर दिया कि एसआईआर ने नागरिकता साबित करने का बोझ मतदाताओं पर डाल दिया। हालांकि कोर्ट ने यह भी दोहराया कि एसआईआर में स्वीकार्य किए जाने वाले दस्तावेज़ों के चयन में संतुलन बनाए रखना ज़रूरी होगा। प्रशांत भूषण ने एक्स पर लिखा है, ”सुप्रीम कोर्ट ने आख़िरका को सही ठहराने वाला फ़ैसला सुना दिया। कई राज्यों में चुनाव होने के महीनों बाद यह फ़ैसला सुनाया गया है, जहाँ इसी एसआईआर के आधार पर चुनाव कराए गए थे। पूरी प्रक्रिया एक पक्षपाती चुनाव आयोग ने चलाई, जिसमें 10 प्रतिशत से अधिक मतदाताओं के नाम हटाए गए और वह भी बेहद अपारदर्शी तरीक़े से। यह फ़ैसला भारतीय न्यायपालिका के लिए एक काला दिन है।
राजनीतिक टिप्पणीकार और एसआईआर का विरोध करते रहे योगेंद्र यादव ने एक्स पर लिखा है, ”मैं आज एसआईआर मामले में सुप्रीम कोर्ट का फ़ैसला सुनने नहीं गया। इस मामले में एक याचिकाकर्ता होने के नाते और अदालत में बहस करने का अवसर मिलने के बावजूद, मुझमें उम्मीद, बेचैनी या कम-से-कम जिज्ञासा होनी चाहिए थी। लेकिन ऐसा कुछ नहीं था। यह मामला बहुत पहले तय हो चुका था. अब सिर्फ़ फ़ैसले की भाषा और उसकी बारीकियों का इंतज़ार था। असल में यह मामला उसी दिन तय हो गया था, जब सर्वोच्च अदालत ने चुनाव आयोग को बिहार चुनाव आगे बढ़ाने की अनुमति दे दी. बिना पहले इस मामले पर फ़ैसला सुनाए और बिना यह सुनिश्चित किए कि एसआईआर के बाद मतदाता सूची में आई गंभीर खामियों को सुधारा जाए।
योगेंद्र यादव ने लिखा है, ”भारत के सुप्रीम कोर्ट ने अब लाखों नागरिकों को मताधिकार से वंचित किए जाने को वैधता दी। इसके बाद जब चुनाव आयोग ने एसआईआर का दूसरा और तीसरा चरण शुरू कर दिया और अदालत आराम से उसकी संवैधानिकता पर बहस सुनती रही। तब एसआईआर एक अपरिवर्तनीय वास्तविकता बन चुका था। में है अब तक कम-से-कम 5.9 करोड़ लोग प्रभावित बताए जा रहे हैं और यह संख्या आगे चलकर 10 करोड़ तक पहुँच सकती है। यह कल्पना से बाहर था कि अदालत अब एसआईआर को असंवैधानिक घोषित कर दे और उसके बाद हुए सभी चुनाव रद्द कर दे।
टीएमसी नेता और वकील कल्याण बनर्जी ने अदालत के फ़ैसले के बाद मीडिया से बात करते हुए कहा, “सुप्रीम कोर्ट का फ़ैसला केवल बिहार मामले तक सीमित। सुनवाई के दौरान अदालत ने बार-बार कहा कि उसकी टिप्पणियां सिर्फ़ बिहार एसआईआर के संदर्भ में हैं। बिहार मामले में उठाई गई प्रक्रियागत अनियमितताओं की बात को सुप्रीम कोर्ट ने स्वीकार नहीं किया गया। चंटीएमसी नेता महुआ मोइत्रा ने एक्स पर लिखा, “आज सुप्रीम कोर्ट का बिहार एसआईआर पर फ़ैसला चुनाव आयोग की अव्यवहारिक, जल्दबाजी में की गई और भेदभावपूर्ण प्रक्रियाओं को मंज़ूरी देने जैसा है. इसके कारण पश्चिम बंगाल एसआईआर के बाद 27 लाख वैध मतदाता मतदान करने से वंचित रह गए और उनका भविष्य अब भी अनिश्चित बना हुआ है. न्याय होना चाहिए और न्याय होता हुआ दिखाई भी देना चाहिए.”
कछंणणबीजेपी ने सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले के बाद कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर हमला तेज़ कर दिया. पार्टी ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी शुरू से ही एसआईआर का विरोध इसलिए कर रहे थे क्योंकि वह घुसपैठियों और फ़र्ज़ी मतदाताओं के पक्ष में खड़े थे।
भारतीय जनता पार्टी सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने इस फ़ैसले का स्वागत करते हुए कहा, “कोर्ट ने आगे यह भी स्पष्ट किया है कि स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने के लिए यह प्रक्रिया बिल्कुल आवश्यक थी… हाल के वर्षों में शहरीकरण, पलायन, डुप्लीकेशन और नए निवासियों के आने जैसे कारणों से मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर नाम जोड़े और हटाए गए हैं।
वहीं, सुप्रीम कोर्ट के एसआईआर के फैसले को लेकर बीजेपी ने कांग्रेस और विपक्षी दलों पर निशाना साधा है। बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि आज सर्वोच्च न्यायालय ने एस आई की प्रक्रिया को पूर्णतः संविधान सम्मत सिद्ध कर दिया है। उन्होंने कहा कि इंडी गठबंधन, जो सनातन धर्म विध्वंसक और घुसपैठिया संरक्षक है, उसका वास्तविक चरित्र आज सामने आ गया है।
है, इसे चुनाव आयोग के अधिकार क्षेत्र में बताया है और स्वतंत्र तथा पारदर्शी चुनाव कराने के लिए अनिवार्य माना है. इंडिया गठबंधन का वास्तविक चरित्र, जो सनातन धर्म को नुकसान पहुंचाने वाला और घुसपैठियों का संरक्षण करने वाला है, आज पूरी तरह उजागर हो गया है।
