फर्जी शस्त्र लाइसेंस गिरोह पर STF का बड़ा शिकंजा, मुख्य आरोपी समेत दो गिरफ्तार
मुख्यमंत्री के “अपराध मुक्त उत्तराखण्ड” विजन और दीपम सेठ के निर्देशन में चलाए जा रहे अभियान के तहत स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) उत्तराखण्ड ने फर्जी शस्त्र लाइसेंस मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए मुख्य आरोपी समेत दो लोगों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों के कब्जे से तीन अवैध हथियार, कारतूस और दो फर्जी शस्त्र लाइसेंस बरामद किए गए हैं।
एसटीएफ द्वारा बाहरी राज्यों से उत्तराखण्ड में स्थानांतरित होकर आए शस्त्र लाइसेंसों की जांच के दौरान मिले साक्ष्यों के आधार पर 4 जून 2026 को काशीपुर कोतवाली में मुकदमा दर्ज कराया गया था। इसी मामले की विवेचना के दौरान 10 जून की रात एसटीएफ और ऊधमसिंह नगर पुलिस ने संयुक्त अभियान चलाकर काशीपुर क्षेत्र से एक स्विफ्ट कार से चार अवैध हथियार और 237 कारतूस बरामद किए थे।
जांच में बरामद हथियारों, कारतूसों, कूटरचित लाइसेंसों और वाहन का संबंध काशीपुर निवासी सौरभ अग्रवाल, गौरव अग्रवाल और दीप्ति अग्रवाल से पाया गया। इसके बाद फरार आरोपियों की तलाश में एसटीएफ की कई टीमें लगातार दबिश दे रही थीं।
इसी क्रम में 11 जून की देर रात एसटीएफ ने रुद्रपुर रोडवेज के पास से मुख्य आरोपी सौरभ अग्रवाल और उसके चालक अमित पाल को हिरासत में लिया। तलाशी के दौरान उनके कब्जे से एक 12 बोर पम्प एक्शन बंदूक, एक 30 बोर ऑटोमैटिक पिस्टल, एक 32 बोर ऑटोमैटिक पिस्टल, आठ कारतूस तथा दो फर्जी शस्त्र लाइसेंस बरामद किए गए।
एसटीएफ के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक ने बताया कि राज्य में फर्जी शस्त्र लाइसेंसों के नेटवर्क की गहन जांच जारी है। अब तक इस संबंध में विभिन्न जनपदों में तीन मुकदमे दर्ज कर सात आरोपियों को जेल भेजा जा चुका है। जांच के दौरान अब तक कुल 12 अवैध हथियार, 315 कारतूस और कई फर्जी शस्त्र लाइसेंस बरामद किए गए हैं।
पूछताछ में यह भी सामने आया कि 10 जून को काशीपुर से बरामद स्विफ्ट कार को आरोपी अमित पाल ने साक्ष्य छिपाने की नीयत से एक पार्किंग में खड़ा कर दिया था। एसटीएफ ने उसके कब्जे से उक्त वाहन की चाबी भी बरामद कर ली है। पूछताछ में कुछ अन्य संदिग्ध व्यक्तियों के नाम भी प्रकाश में आए हैं, जिनके संबंध में सूचना विकसित कर आगे की कार्रवाई की जा रही है।
एसटीएफ ने स्पष्ट किया है कि राज्य में बाहरी राज्यों से स्थानांतरित होकर आए हजारों शस्त्र लाइसेंसों का सत्यापन अभियान जारी है। फर्जी शस्त्र लाइसेंस राष्ट्रीय सुरक्षा, सार्वजनिक शांति और कानून-व्यवस्था के लिए गंभीर खतरा हैं, इसलिए ऐसे मामलों में उत्तराखण्ड पुलिस “जीरो टॉलरेंस” की नीति के तहत कठोर कार्रवाई कर रही है।
एसटीएफ ने आमजन से भी अपील की है कि यदि किसी को फर्जी या संदिग्ध शस्त्र लाइसेंसों से संबंधित कोई जानकारी मिले तो तत्काल पुलिस या एसटीएफ को सूचित करें। सूचनाकर्ता की पहचान पूरी तरह गोपनीय रखी जाएगी।
